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Tariq Rahman reached Bangladesh: तारिक रहमान 17 साल बाद पहुंचे बांग्लादेश, बांग्लादेश की राजनीति में हो सकता है बड़ा घटनाक्रम

Tariq Rahman reached Bangladesh: तारिक रहमान 17 साल बाद पहुंचे बांग्लादेश

बांग्लादेश की राजनीति में 17 साल बाद तारिक रहमान की वापसी को एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी वापसी न सिर्फ बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के लिए अहम मानी जा रही है, बल्कि देश के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात के संदर्भ में भी इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बीच तारिक रहमान की वापसी पर भारत के पूर्व राजनयिकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। बांग्लादेश में भारत की उच्चायुक्त रह चुकीं रीवा गांगुली दास ने तारिक रहमान की वापसी को बांग्लादेश के लिए “उम्मीद भरा संकेत” बताया है।

रीवा गांगुली दास ने कहा कि तारिक रहमान की घर वापसी बांग्लादेश के नजरिए से बेहद अहम है। उनके अनुसार, वह देश में शांति और स्थिरता बहाल करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जब बांग्लादेश विभिन्न तरह की राजनीतिक और वैचारिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब तारिक रहमान जैसे नेता की सक्रिय मौजूदगी संतुलन बनाने में मददगार साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान लंबे समय से ब्रिटेन में रह रहे थे। वह करीब 17 साल तक स्वनिर्वासन में रहे और 2008 से लंदन में निवास कर रहे थे। गुरुवार को उनकी ढाका वापसी हुई, जहां एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। उनकी वापसी को बीएनपी समर्थकों ने पार्टी के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा है।

रीवा गांगुली दास ने इस बात पर भी जोर दिया कि विदेश में रहते हुए भी तारिक रहमान ने अपनी पार्टी पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी राजनीतिक क्षमता को दर्शाता है कि वह देश से बाहर रहते हुए भी बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी को प्रभावी ढंग से मैनेज कर सके। उनके मुताबिक, तारिक रहमान ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखा।

पूर्व भारतीय राजनयिक ने यह भी कहा कि बांग्लादेश में इस समय दक्षिणपंथी ताकतों के उभार को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे माहौल में तारिक रहमान एक संतुलनकारी भूमिका निभा सकते हैं। रीवा गांगुली दास के अनुसार, वह ऐसे नेता हैं जो विभिन्न विचारधाराओं के बीच संतुलन साधने की क्षमता रखते हैं और यही वजह है कि उनकी वापसी को स्थिरता की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

तारिक रहमान की वापसी ऐसे समय में हुई है, जब बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के दौर से गुजर रहा है। हाल ही में युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में अशांति फैल गई थी। इस घटना ने पूरे बांग्लादेश को झकझोर कर रख दिया। हादी को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाने वाला नेता माना जाता था। उनकी हत्या के बाद से ही देश में तनाव का माहौल बना हुआ है।

इसी पृष्ठभूमि में तारिक रहमान की वापसी को कई राजनीतिक विश्लेषक एक अहम मोड़ के तौर पर देख रहे हैं। रीवा गांगुली दास ने कहा कि बांग्लादेश इस समय अलग-अलग तरह की विचारधाराओं के उभार का साक्षी बन रहा है। ऐसे में तारिक रहमान मध्यमार्गी ताकतों को मजबूती देने और राजनीतिक संतुलन कायम रखने में योगदान दे सकते हैं।

ढाका के शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही तारिक रहमान ने नंगे पैर बांग्लादेश की धरती पर खड़े होकर अपनी वापसी को प्रतीकात्मक रूप से दर्ज किया। इस कदम को उनके समर्थकों ने भावनात्मक और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा। एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में बीएनपी समर्थक मौजूद थे, जिन्होंने उनका स्वागत किया।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो आने वाले फरवरी में प्रस्तावित चुनावों में बीएनपी एक प्रमुख दावेदार के रूप में उभर कर सामने आई है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। अंतरिम सरकार ने देश के सख्त आतंकवाद-रोधी कानून के तहत एक कार्यकारी आदेश के जरिए अवामी लीग पर चुनावी प्रतिबंध लगाया है।

2001 से 2006 तक बीएनपी सरकार के दौरान पार्टी की सहयोगी रही जमात-ए-इस्लामी अब बीएनपी की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी मानी जा रही है। बदलते राजनीतिक हालात में बीएनपी के नेतृत्व की भूमिका और भी अहम हो गई है। खालिदा जिया की तबीयत खराब होने के बाद 2018 से ही तारिक रहमान पार्टी की प्रभावी अगुवाई कर रहे हैं।

रीवा गांगुली दास का मानना है कि तारिक रहमान की वापसी से बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई गतिशीलता आएगी। उन्होंने कहा कि यह वापसी ऐसे समय में हुई है, जब देश को स्थिर नेतृत्व और संतुलित राजनीति की जरूरत है। उनकी मौजूदगी से न केवल बीएनपी को मजबूती मिलेगी, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में भी एक नया संतुलन उभरता दिखाई दे सकता है।

Kirti Bhardwaj

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