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Supreme Court ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, हो सकता है दुरुपयोग- CJI

यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की और कहा कि नए नियम अस्पष्ट हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

वहीं, याचिकाकर्ता का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और इन्हें लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। अदालत ने तत्काल सुनवाई पर सहमति जताते हुए कहा है कि वह मामले की स्थिति से अवगत है।

आलोचकों का आरोप है कि नए नियमों में स्पष्ट प्रक्रिया का अभाव है और इनके दुरुपयोग की आशंका बनी हुई है। नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिनमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी होगा। उनका ये भी कहना है कि नया ढांचा ओबीसी समुदाय को संभावित पीड़ित मानता है, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों को बाहर रखता है, जिससे उन्हें भेदभाव का स्थायी दोषी बताया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान CJI की बड़ी टिप्पणी सामने आई है। उन्होंने कहा, ‘आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं। अब क्या इस नए कानून से हम और पीछे की ओर जा रहे हैं?’ याचिकाकर्ता ने कहा कि रैगिंग होगी और रैगिंग करने वाले छात्र शिकायत भी करेंगे। जस्टिस बागची ने कहा कि संविधान राज्य को एससी/एसटी के लिए विशेष कानून बनाने का अधिकार देता है यदि 2012 के नियमों में व्यापक सुरक्षा की बात की गई है तो क्या सामाजिक न्याय की सुरक्षा वाले कानून में बचाव के उपाय होने चाहिए? हमें ऐसे स्तर पर नहीं जाना चाहिए जहां हमने संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह स्कूलों को अलग कर दिया हो।

वहीं, इन नियमों के खिलाफ कई राज्यों में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया है कि नियमों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।

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