BIHAR: राबड़ी देवी को नया सरकारी आवास आवंटित
बिहार की राजनीति इन दिनों एक नए और दिलचस्प विवाद की चपेट में है। मामला है पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी की कद्दावर नेता राबड़ी देवी के सरकारी आवास का। राबड़ी देवी का पता बदल गया है, और इसके साथ ही उनके परिवार के वरिष्ठ नेता लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव का भी आवास बदलने वाला है। यह कदम नीतीश सरकार ने उठाया है, लेकिन इस नए आवास पर राजनीति का बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा।
नीतीश सरकार ने राबड़ी देवी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के अनुसार नया सरकारी बंगला आवंटित किया है। यह बंगला 39, हार्डिंग रोड पर स्थित है। नियमों के अनुसार, राबड़ी देवी को अगले छह महीनों के भीतर 10, सर्कुलर रोड वाला पुराना आवास खाली करना होगा।
यह वही ऐतिहासिक बंगला है, जहाँ से दशकों तक लालू-राबड़ी परिवार की सक्रिय राजनीति संचालित होती रही। इसी वजह से इस बंगले के बदलने का मामला राजनीतिक हल्कों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।सरकार की ओर से कहा गया है कि यह एक पूरी तरह से नियमित प्रक्रिया है।
नियमों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को जो आवास निर्धारित किया गया है, वही प्रदान किया जा रहा है। हालांकि, आरजेडी का रुख बिल्कुल अलग है। पार्टी ने साफ कह दिया है कि राबड़ी देवी पुराना बंगला नहीं छोड़ेंगी। आरजेडी ने सवाल उठाया है कि अचानक आवास बदलने की जरूरत क्यों पड़ी। क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा है या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया है?
सरकार के समर्थन में, विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि बिहार में पांच सांविधानिक पद होते हैं, जिनमें से चार के लिए आवास पहले ही निर्धारित हैं। पांचवे पद यानी नेता प्रतिपक्ष के लिए भी औपचारिकता पूरी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया—“विवाद की कोई जरूरत नहीं है। यह सिर्फ नियमों के तहत किया गया आवंटन है।”
लेकिन असली सवाल अब भी यही है कि राबड़ी देवी एक बड़े और आधुनिक बंगले में जाने से क्यों इनकार कर रही हैं। नया बंगला पुराने आवासीय सुविधा की तुलना में कहीं अधिक बड़ा और आधुनिक है। यह लगभग तीन एकड़ में फैला हुआ है, जबकि 10, सर्कुलर रोड का बंगला केवल एक एकड़ में है।
कागज़ों के अनुसार, नया आवास VVIP मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। नया बंगला छह बड़े बेडरूम, दो मंजिला मुख्य भवन, विशाल हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, ऑफिस स्पेस, स्टाफ क्वार्टर, ड्राइवर रूम, हाई-लेवल सुरक्षा चौकी और आधुनिक CCTV सिस्टम से लैस है। इसके अलावा बंगले में नीम, पीपल, गुलमोहर, अमलतास और मोगरा जैसे पेड़ों के साथ बड़ा गार्डन और किचन प्लॉट भी मौजूद है।
तो फिर विवाद की जड़ क्या है? आरजेडी का कहना है कि यह केवल बंगला नहीं, बल्कि पार्टी की राजनीतिक पहचान और विरासत से जुड़ा मामला है। 10, सर्कुलर रोड का बंगला लालू-राबड़ी परिवार की राजनीति का केंद्र रहा है। इसी वजह से पार्टी इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं है और इसे “कद छोटा करने की साजिश” बता रही है।
सरकार का तर्क बिल्कुल उलटा है। नीतीश सरकार का कहना है कि राबड़ी देवी का कद बड़ा है, इसलिए उन्हें बड़ा और आधुनिक बंगला दिया जा रहा है। उनका दावा है कि विपक्ष केवल राजनीतिक ड्रामा कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह आवास विवाद आने वाले समय में RJD और सरकार के बीच टकराव को और बढ़ाएगा। यह केवल बंगले का मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीक, भावनाओं और शक्ति संतुलन से जुड़ा मामला है।
अब सवाल यही है कि क्या राबड़ी देवी वास्तव में नया बंगला स्वीकार करेंगी या यह विवाद आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति का गर्म विषय बना रहेगा। बिहार की राजनीति में यह घटना कई मायनों में नए मोड़ और बहस का केंद्र बन सकती है।
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