पंजाब में पटाखों से 500 तक पहुंचा AQI
पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में दिवाली का हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोग अपने-अपने घरों और मोहल्लों में दीप जलाकर, रंग-बिरंगी लाइटों और आतिशबाजी के साथ इस पावन त्योहार का आनंद ले रहे थे।
हालांकि, इस बार दिवाली का जश्न कई जगहों पर हादसों और प्रदूषण की वजह से चिंता का विषय बन गया।
दरअसल दिवाली की रात पटाखों की जोरदार आतिशबाजी का असर पंजाब के शहरों की हवा पर साफ दिखाई दिया। राज्य के पर्यावरण निगरानी केंद्रों की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार शाम 8 बजे तक पंजाब में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 114 दर्ज किया गया।
लेकिन जैसे ही पटाखों की आवाज गूंजने लगी, AQI में तेजी से वृद्धि देखने को मिली। रात 9 बजे ये 153 (एक सौ तिरपन)और 10 बजे के बाद 309 तक पहुंच गया। आधी रात तक पंजाब के कई शहरों में ये आंकड़ा 500 तक पहुंच गया, जो “अत्यंत खतरनाक” श्रेणी में आता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि, इस तरह की गंभीर प्रदूषण स्थिति बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है।
रात भर शहरों में उत्सव का माहौल भी बना रहा। अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया और श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन कर दिवाली की खुशी मनाई।
वहीं, आतिशबाजी के चलते काफी जगह हादसे हुए जिनमें चंडीगढ़ के मनीमाजरा स्थित शास्त्री नगर में दिवाली की रात एक पौधा नर्सरी में आग लग गई। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास किया।
हालांकि, नर्सरी के पास एक गैस एजेंसी होने के कारण आसपास के क्षेत्र में खतरा बढ़ गया था, लेकिन समय पर राहत कार्यों के कारण कोई बड़ी क्षति नहीं हुई।
इसके अलावा मोहाली के जीरकपुर में दिवाली के दिन पटाखों में बारूद भरते समय अचानक विस्फोट हो गया। इस हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया। घायल व्यक्ति की पहचान सूरज के रूप में हुई।
स्थानीय लोगों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे चंडीगढ़ के सेक्टर-32 अस्पताल में रेफर किया गया। वहीं, मोहाली में चार बच्चे भी पटाखों के बारूद से झुलस गए। जिनके चेहरे और हाथों पर चोटें आई हैं।
दिवाली की रात मोहाली के अस्पतालों में कुल 23 जलने के मामले पहुंचे।वहीं मोहाली में पटाखे की चिंगारी से एक कार भी जल गई। फायर ब्रिगेड को सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक कार आधे से ज्यादा जल चुकी थी।
फायर ब्रिगेड ने लगभग पांच से सात मिनट में आग पर काबू पाया हादसे हुए। वहीं, हिमाचल प्रदेश में दीपावली की रात तीन अलग-अलग स्थानों पर आग की घटनाएं हुईं।
कुल्लू जिला, मणिकर्ण में बहुमंजिला “कसोल इन” होटल में भीषण आग लगी, जिससे होटल की ऊपरी मंजिल जलकर राख हो गई। शिमला जिला, रामपुर बुशहर में खोपड़ी मंदिर के पास चार-पांच दुकानों में आग लगी, जिसमें रखा सारा सामान जल गया।
कांगड़ा जिला, नगरोटा बगवा में एक इलेक्ट्रिक दुकान में आग लगने से लाखों रुपए का सामान राख हो गया। दमकल कर्मचारियों ने समय पर आग पर काबू पाया और आग के आसपास फैलने से रोका।
ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि, त्योहारों में पटाखों की अत्यधिक मात्रा न केवल आग का कारण बनती है बल्कि वायु प्रदूषण को भी अत्यधिक बढ़ा देती है। इस साल पंजाब में AQI के 500 तक पहुंचने से ये साफ हो गया है कि, पटाखों का अति-उपयोग स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
लोग दिवाली मनाने के लिए उत्साहित हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा और पर्यावरण का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
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