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मुश्किलों में हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र, नारनौल कोर्ट में राव नरेंद्र के खिलाफ दाखिल चार्जशीट

मुश्किलों में हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र

 

हरियाणा कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उनके खिलाफ नारनौल कोर्ट में पीसी एक्ट के तहत करीब 12 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में चालान पेश किया है।

ये मामला वर्ष 2014 का है और अब अदालत में सुनवाई शुरू होगी।दरअसल इस मामले में राव नरेंद्र सिंह पर आरोप है कि, उन्होंने धर्मेंद्र कुहाड़ से पलवल में 30 एकड़ जमीन के लिए क्लासिफाइड लैंड यूज की अनुमति देने के बदले 30 से 50 करोड़ रुपये की मांग की थी

धर्मेंद्र कुहाड़ ने इस बात का स्टिंग ऑपरेशन कर ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली थी। जिसके बाद उन्होंने इस रिकॉर्डिंग की सीडी तत्कालीन इनेलो विधायक रामपाल माजरा को सौंपी।

वहीं रामपाल माजरा ने वर्ष 2014 में प्रदेश के लोकायुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि, राव नरेंद्र सिंह ने भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के माध्यम से राजनीतिक पद का दुरुपयोग किया।

लोकायुक्त ने मामले की जांच के लिए IPS अधिकारी वि. कामराजा को जिम्मेदारी सौंपी वि. कामराजा ने शिकायत की जांच कर 27 अप्रैल 2015 को अपनी अंतिम रिपोर्ट लोकायुक्त को सौंप दी।

जिसके बाद लोकायुक्त ने 16 दिसंबर 2015 को हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखकर आगे की कार्रवाई का सुझाव दिया। इस प्रक्रिया के बाद, राव नरेंद्र सिंह के खिलाफ 29 जनवरी 2016 को धारा 7 पीसी एक्ट के तहत मामला थाना राज्य चौकसी ब्यूरो गुरुग्राम में दर्ज किया गया।

इस केस की जांच अब नारनौल यूनिट के DSP अशोक डागर कर रहे हैं। उन्होंने एडिशनल सेशन जज हर्षाली चौधरी की कोर्ट में चालान पेश किया। अब ये मामला कोर्ट में चलेगा और अदालत इसे सुनवाई के बाद आगे बढ़ाएगी।

ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि, ये मामला राव नरेंद्र सिंह के लिए काफी संवेदनशील साबित हो सकता है, क्योंकि ये आरोप न केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा है, बल्कि इसमें जमीन और भारी रकम की मांग का भी मामला शामिल है।

ऐसे मामलों का राजनीतिक प्रभाव अक्सर लंबे समय तक रहता है और ये कांग्रेस के लिए भी चिंता का विषय हो सकता है। राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा है कि, कोर्ट की कार्रवाई से राव नरेंद्र सिंह की साख पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि ये पुराना मामला है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। भ्रष्टाचार के मामलों में लंबी जांच और कोर्ट की सुनवाई आम होती है।

आपको बता दें कि, ये केस लगभग 12 साल पुराना है और अब कोर्ट में चालान पेश होने के बाद इसकी सुनवाई शुरू हो जाएगी। अदालत में राव नरेंद्र सिंह को अपने बचाव में पूरी तैयारी करनी होगी।

ये मामला दिखाता है कि, राजनीतिक और प्रशासनिक पद का दुरुपयोग किस प्रकार गंभीर आरोपों को जन्म दे सकता है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो इसका असर न केवल राव नरेंद्र सिंह पर पड़ेगा, बल्कि उनके राजनीतिक करियर पर भी प्रभाव पड़ेगा।

ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मामले चुनावी माहौल और पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकते हैं। भ्रष्टाचार के आरोप और कोर्ट में लंबी सुनवाई राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकते हैं।

 
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