price of gold will come below Rs 1 lakh!: 1 लाख के नीचे आएगी GOLD की कीमत !
त्योहारों का मौसम खत्म होते ही सोने की कीमतों में जो आग लगी हुई थी, वह अब ठंडी पड़ती दिख रही है। कुछ ही दिनों पहले तक जो सोना नए-नए रिकॉर्ड बना रहा था, अब उसके दाम तेजी से नीचे आ रहे हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, सोना 1.32 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर से फिसलकर अब 1.21 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इस भारी गिरावट ने न सिर्फ निवेशकों को चौंकाया है, बल्कि बाजार में हलचल भी मचा दी है।
जिन लोगों ने ऊंचे दामों पर सोने में निवेश किया था, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। वहीं, जो लोग त्योहारों के बाद शादी-ब्याह के सीजन में खरीदारी करने की योजना बना रहे थे, उनके लिए यह गिरावट राहत की खबर है। अब बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट जारी रहेगी या फिर सोने का यह अस्थायी ठहराव है?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट कई कारणों से आई है। सबसे पहला और प्रमुख कारण है मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग। जब सोने ने इस महीने की शुरुआत में रिकॉर्ड स्तर छुआ, तो उन निवेशकों ने जिन्होंने कम दामों पर सोना खरीदा था, बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी। नतीजतन, बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं।
दूसरा बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर की मजबूती। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और यह सोने के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है। सोने और डॉलर के बीच आमतौर पर उलटा रिश्ता देखा जाता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना अन्य मुद्राओं में महंगा हो जाता है, जिससे उसकी मांग घटती है। निवेशक भी अपने फंड्स को सोने जैसे सुरक्षित निवेश से निकालकर डॉलर या इक्विटी मार्केट में लगाना पसंद करते हैं।
तीसरा कारण है मांग में आई कमी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान जो जबरदस्त खरीदारी हुई थी, वह अब धीमी पड़ चुकी है। त्योहारी मांग समाप्त होने से कीमतों पर दबाव बना है और सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है।
यह गिरावट केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर भी दिख रहा है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘स्पॉट गोल्ड’ का भाव 4,381.21 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन वहां से इसमें 6 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट आई और यह 4,100 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह 2013 के बाद सोने में आई सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट में से एक रही है।
भारत में सोने के दामों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। 1.32 लाख रुपये से 1.21 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट इसी वैश्विक उतार-चढ़ाव का परिणाम है। अस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई का कहना है कि इस गिरावट ने पिछले नौ हफ्तों से जारी लगातार तेजी पर ब्रेक लगा दिया है।
अब बाजार की नजर इस बात पर है कि आगे क्या होगा। क्या सोना एक लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे जा सकता है? ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक टेक्निकल करेक्शन है। जब किसी कमोडिटी की कीमत बहुत तेजी से बढ़ती है, तो बाजार में थोड़ी बहुत गिरावट आना स्वाभाविक होता है। इसे बाजार का संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया कहा जा सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि फिलहाल निवेशकों का ध्यान सोने से हटकर अन्य निवेश विकल्पों की ओर जा रहा है। अमेरिका और भारत के बीच संभावित व्यापार समझौते, अमेरिका-चीन वार्ता में सकारात्मक संकेत और ग्लोबल इक्विटी मार्केट में सुधार ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इससे सोने जैसे ‘सेफ हेवन’ निवेश की मांग में थोड़ी कमी देखी जा रही है।
आईबीजेए की उपाध्यक्ष अक्षा कम्बोज का कहना है कि शॉर्ट-टर्म में भले ही सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहे, लेकिन लंबी अवधि में सोना अभी भी सुरक्षित निवेश माना जाता है। उनके अनुसार, जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय आकर्षक अवसर साबित हो सकता है।
बाजार में एक और अहम कारक है जो सोने की कीमतों को फिर से सहारा दे सकता है—शादी का सीजन। भारत में हर साल नवंबर से मार्च तक लाखों शादियां होती हैं और इस दौरान गहनों की मांग तेजी से बढ़ती है। जैसे-जैसे यह मांग बाजार में आएगी, सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और इसे एक स्वाभाविक करेक्शन के रूप में देखा जाना चाहिए। आने वाले हफ्तों में शादी-ब्याह की खरीदारी से सोने की कीमतों में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों और खरीदारों दोनों की निगाहें बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।
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