उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश: बस में सीट पर छटपटा रहा था धड़…नीचे सड़क पर पड़ा बालक का सिर, बाप अंगोछे से पोंछ रहा था चेहरे पर लगा खून

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने न केवल एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया, बल्कि शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। यह घटना उन हादसों में से है जो समाज को हिला देती हैं और सवाल उठाती हैं कि आखिर कब तक मासूम जानें सड़कों पर लापरवाही का शिकार होती रहेंगी।

यह हृदय विदारक घटना रविवार दोपहर करीब 12:30 बजे हुई, जब अलीगढ़ से हाथरस के गांव मेवली जा रही बारात की बस में सवार एक 11 वर्षीय बच्चा मोहम्मद अली अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था। उसी वक्त सामने से आ रहे मैक्स वाहन ने उसकी गर्दन को ऐसी चपेट में लिया कि उसका सिर धड़ से अलग हो गया। यह हादसा हाथरस के जंक्शन क्षेत्र में हाजीपुर रेलवे फाटक के पास हुआ, जहां फिलहाल एक ओवरब्रिज का निर्माण चल रहा है और संकरी सर्विस रोड से वाहन गुजरते हैं।

खुशियों से भरा दिन एक भयावह त्रासदी में बदला

मोहम्मद अली, अलीगढ़ शहर के मकदूम नगर, कमेला रोड निवासी आस मोहम्मद का इकलौता बेटा था। वह अपने ताऊ साबूद्दीन और चाचा बाबूद्दीन के बेटों – साहिल और दानिश – की बारात में बेहद उत्साहित होकर शामिल हुआ था। परिवार ने बताया कि वह पिछले पांच दिनों से इस शादी को लेकर बेहद खुश था और खुद अपने पिता के साथ जाकर नई पैंट और शर्ट खरीदकर लाया था। वह बारात के दिन सुबह जल्दी उठ गया और बस में सबसे पीछे वाली सीट पर खिड़की के पास बैठ गया।

मोहम्मद अली के लिए यह शादी की एक यादगार यात्रा होनी थी, लेकिन यह उसकी जिंदगी की आखिरी यात्रा साबित हुई। बस जब हाजीपुर रेलवे फाटक पर पहुंची तो निर्माणाधीन ओवरब्रिज की वजह से उसे संकरी सर्विस रोड से जाना पड़ा। रास्ता इतना तंग था कि बस को कच्चे रास्ते में उतारना पड़ा। ठीक सामने एक पेड़ आ गया जिससे बस रुक गई।

दोनों वाहनों के आमने-सामने आने से बना खतरनाक संयोग

इसी दौरान सामने से मैक्स वाहन आ गया। चालक ने बस से सटाकर मैक्स निकालने की कोशिश की। दोनों वाहन इतने पास आ गए कि इनके बीच सिर्फ कुछ इंच का फासला रह गया। मोहम्मद अली खिड़की से बाहर झांक रहा था, शायद अपने पिता को देखने के लिए जो बस के नीचे खड़े थे। लेकिन किसी को क्या मालूम था कि अगले ही पल एक खौफनाक दृश्य सामने आने वाला है।

जैसे ही मैक्स बस के पास से निकला, उसकी बॉडी मोहम्मद अली की गर्दन से टकराई और उसे धड़ से अलग कर दिया। सिर खिड़की से नीचे सड़क पर गिर गया जबकि उसका धड़ सीट पर ही रह गया। इस दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

बिलखते पिता और चाचा ने थामा सिर और धड़

हादसे के समय मोहम्मद अली के पिता आस मोहम्मद बस के बाहर खड़े थे। जैसे ही उन्होंने देखा कि उनका बेटा खिड़की से बाहर झांकते हुए खून से लथपथ गिरा, वह दौड़कर पहुंचे और सड़क पर पड़े अपने बेटे के सिर को गोद में लेकर फूट-फूट कर रोने लगे।

वहीं, मोहम्मद अली के ताऊ साबूद्दीन ने बस की सीट से उसका धड़ उठाया और सड़क पर दौड़ते हुए भाई तक पहुंचे। दोनों हाथों में सिर और धड़ थामे यह दृश्य जितना मार्मिक था, उतना ही समाज की लापरवाही को उजागर करने वाला था।

पिता ने अपने बेटे के सिर को धड़ से जोड़ने की कोशिश की। वह कभी अंगोछे से खून रोकने की कोशिश करता, तो कभी सिर को धड़ से मिलाकर खड़ा हो जाता – मानो उम्मीद थी कि उसका बच्चा जिंदा हो उठेगा। लेकिन मौत ने अपनी दस्तक दे दी थी।

शादी की खुशियां बदल गईं मातम में, बारात लौटी वापस

बस में कुल 65 लोग सवार थे। कुछ देर पहले जो गीत, हंसी और उत्साह का माहौल था, वह अब चीख-पुकार और सन्नाटे में बदल गया था। हादसे के बाद कई लोग तो उसी वक्त बस से उतरकर अपने घरों को लौट गए।

विवाह स्थल पर केवल 10–15 लोग ही पहुंचे और रस्में बहुत ही सादगी और शोक में पूरी की गईं। परिवार ने कुछ अन्य वाहनों की व्यवस्था कर बरातियों को वापस भेजा। हर किसी की आंखें नम थीं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि शादी के दिन किसी घर का चिराग इस तरह बुझ जाएगा।

स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया और पुलिस कार्रवाई

हादसे के बाद घटनास्थल पर पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने दोनों वाहनों – बस और मैक्स – को अपने कब्जे में ले लिया है।

CO जेएन अस्थाना ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि दोनों वाहन चालक मौके से फरार हो गए थे और उनकी तलाश की जा रही है। साथ ही परिजनों से अभी तक कोई तहरीर नहीं दी गई है, लेकिन जैसे ही तहरीर दी जाएगी, रिपोर्ट दर्ज की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ओवरब्रिज निर्माण की लापरवाही बनी मौत की वजह

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाजीपुर रेलवे फाटक के पास जो ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां पर पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई है और सर्विस रोड बेहद संकरी है। इस कारण से आए दिन यहां जाम और टक्कर की घटनाएं होती रहती हैं।

ना तो वहां किसी प्रकार का ट्रैफिक नियंत्रण है, ना ही सुरक्षा के लिए कोई संकेतक या बेरिकेट्स लगाए गए हैं। यदि वहां पर स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के मानकों का पालन किया होता तो शायद मोहम्मद अली की जान बच सकती थी।

समाज और शासन को एक चेतावनी

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक सड़कों पर बच्चों की जानें जाती रहेंगी? कब तक हमारी लापरवाहियों की कीमत मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी?

मोहम्मद अली की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की असफलता का ज्वलंत उदाहरण है – जिसमें सड़क निर्माण होते हुए भी सुरक्षा मानक नहीं अपनाए गए, वाहनों की भीड़ में ट्रैफिक नियंत्रण नहीं था और न ही चालकों में जवाबदेही की भावना थी।

मानवता को झकझोरने वाली तस्वीरें

हादसे के बाद की तस्वीरें दिल को दहला देने वाली थीं। एक तरफ पिता अपने बेटे के कटे सिर को गोद में लेकर इधर-उधर भागता दिखा, तो दूसरी ओर चाचा धड़ को संभाले हुए जमीन पर गिरते-पड़ते बस की तरफ दौड़ते नजर आए। बस की सीटें खून से लथपथ थीं, बच्चे सहमे हुए थे, महिलाएं बिलख रही थीं।

यह दृश्य उस मानवता को झकझोरने के लिए काफी था जो अब हादसों को एक सामान्य खबर समझकर भूल जाती है। लेकिन जिन परिवारों पर बीतती है, उनके लिए यह जख्म कभी नहीं भरता।

आवश्यक सुझाव और अपील

प्रशासन को चाहिए कि सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाए।

स्कूली और बारात जैसी भीड़भाड़ वाली बसों के संचालन पर विशेष ट्रैफिक नियम बनाए जाएं।

वाहनों की खिड़कियों पर सुरक्षा ग्रिल और बंद सिस्टम अनिवार्य किया जाए ताकि झांकने की घटनाएं न हों।

ऐसे हादसों में तत्काल न्यायिक जांच हो और दोषियों को कठोर सजा दी जाए।

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