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Panipat: नमाज के दौरान युवक की मौत, परिजन बोले- पोस्टमार्टम नहीं, ये अल्लाह की मर्जी

Panipat: पानीपत जिले के सिवाह गांव स्थित पीर बाबा की मस्जिद में शुक्रवार को जुम्मे की नमाज अदा करने के बाद एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतक की पहचान 45 वर्षीय तैयब के रूप में हुई, जो विद्यानंद कॉलोनी का निवासी था। यह घटना उस समय हुई जब युवक नमाज अदा करने के बाद मस्जिद से बाहर निकल रहा था और अचानक गिर पड़ा। इस घटना को लेकर स्थानीय पुलिस ने शव को अज्ञात मानते हुए पोस्टमार्टम के लिए जिला नागरिक अस्पताल भेज दिया, लेकिन मृतक के परिजनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया और कहा कि यह अल्लाह की मर्जी है, इसलिए शव को बिना पोस्टमार्टम के दफनाने की अनुमति दी जाए।

मृतक की पहचान और घटनाक्रम

सूत्रों के मुताबिक, मृतक तैयब शुक्रवार को जुम्मे की नमाज पढ़ने के लिए सिवाह गांव स्थित पीर बाबा की मस्जिद गए थे। मस्जिद में नमाज अदा करने के बाद जब वह बाहर निकले, तभी अचानक गिर पड़े और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पुलिस को सूचित किया। स्थानीय पुलिस ने शव को पहचानने के प्रयास किए, लेकिन चूंकि मृतक के पास कोई पहचान पत्र नहीं था, इसलिए शव को अज्ञात मानते हुए उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला नागरिक अस्पताल भेज दिया।

कुछ समय बाद, मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी मिली। वे मौके पर पहुंचे और शव को अस्पताल से वापस लेने की मांग की। परिजनों ने पुलिस से स्पष्ट रूप से कहा कि वे पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते हैं क्योंकि उनका मानना था कि यह घटना अल्लाह की मर्जी से हुई है। मृतक के परिवार के सदस्य शहजाद, नईम, अब्दुल कादिर, और मोहम्मद साजिद ने बताया कि तैयब का निधन एक प्राकृतिक कारण से हुआ है और यह सब अल्लाह की इच्छा से हुआ है।

पोस्टमार्टम का विवाद

पानीपत(Panipat) की स्थानीय पुलिस के लिए यह मामला काफी जटिल हो गया था। पुलिस को शव को अज्ञात मानते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया को पूरा करना था, जबकि परिजनों का स्पष्ट रूप से कहना था कि वे इसे धार्मिक दृष्टिकोण से देख रहे थे और पोस्टमार्टम करवाना नहीं चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि यह घटना नमाज अदा करते समय हुई है, जिससे उनका विश्वास है कि तैयब की मौत को एक ईश्वर की इच्छा के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए परिजनों की भावना का सम्मान किया और शव को बिना पोस्टमार्टम के परिजनों के हवाले कर दिया। यह मामला पानीपत (Panipat) के सिवाह गांव में चर्चा का विषय बन गया और स्थानीय लोग भी इस घटना को लेकर अपनी अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे थे। कुछ लोगों का मानना था कि यह एक प्राकृतिक घटना थी, जबकि अन्य लोगों ने इसे एक रहस्यमय घटना के रूप में देखा।

परिजनों का बयान

परिजनों ने बताया कि तैयब का जीवन काफी साधारण था और वह अपने परिवार के साथ विद्यानंद कॉलोनी में रहता था। वे यह मानते थे कि तैयब की मौत अल्लाह की मर्जी से हुई है, और इसलिए उन्हें इस बारे में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। शहजाद, नईम, अब्दुल कादिर और मोहम्मद साजिद ने कहा, “हमने तय किया है कि हम पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे, क्योंकि यह एक धार्मिक दृष्टिकोण है। हम मानते हैं कि तैयब की मौत उसी समय हुई जब वह जुम्मे की नमाज पढ़ने के बाद अल्लाह के पास पहुंचने के लिए तैयार थे। हमें इस घटना में कोई संदिग्धता नहीं दिखाई देती।”

मृतक के परिवार ने पुलिस से भी यही अनुरोध किया था कि वह शव को बिना किसी जांच के परिवार को सौंप दे, ताकि वे अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें और उसे सम्मानपूर्वक दफन कर सकें। परिवार के सदस्य इस बात पर जोर दे रहे थे कि उनके लिए यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक कारण से हुई घटना है और इसे अल्लाह की मर्जी मानकर वे इसे उसी रूप में स्वीकार कर रहे हैं।

सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण

सिवाह गांव में रहने वाले कुछ लोगों ने कहा कि “यह घटना अल्लाह के फैसले का हिस्सा है और हमें इसे समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि इसे किसी रहस्य या साजिश से जोड़ने की।” इस बात से संबंधित एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “कभी-कभी हमें यह समझने की आवश्यकता होती है कि जीवन और मृत्यु दोनों ही अल्लाह की इच्छा के अधीन होते हैं। जब यह सब कुछ हो जाता है, तो हमें इसे बिना किसी प्रश्न के स्वीकार करना चाहिए।”

पुलिस की भूमिका

पानीपत(Panipat) पुलिस ने मामले में उचित कार्रवाई की, लेकिन उनका कार्य चुनौतीपूर्ण था। चूंकि मृतक की पहचान पहले नहीं हो पाई थी, पुलिस को शव को अज्ञात मानकर पोस्टमार्टम के लिए भेजना पड़ा था। लेकिन जैसे ही परिजनों को सूचना मिली, उन्होंने तुरंत अस्पताल पहुंचकर पुलिस से शव वापस लेने की मांग की।

पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और परिजनों की भावना का सम्मान करते हुए शव को वापस कर दिया।

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