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ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर खुश नहीं मंत्री और विधायक, 1,500 से अधिक ट्रांसफर फाइलें लंबित

CHANNEL4 NEWS INDIA


हरियाणा में कर्मचारियों और अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर एक बार फिर मंत्रियों और विधायकों की नाराजगी सामने आई है। हाल ही में 29 जुलाई को चंडीगढ़ स्थित संत कबीर कुटीर में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में यह मुद्दा खुलकर उठा। बैठक में दक्षिण हरियाणा के एक विधायक ने शिकायत की कि वह लंबे समय से कुछ ट्रांसफर कराने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों से कह रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यहां तक कहा कि “मैं तो एक सामान्य विधायक हूं, यहां तो मंत्रियों के कहने पर भी ट्रांसफर नहीं होते।” विधायक की इस शिकायत का कई मंत्रियों ने भी समर्थन किया। एक कैबिनेट मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि “हमारी ट्रांसफर फाइलों को जलेबी की तरह घुमाया जाता है।” सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी असहज हो गए और उन्होंने CMO के एक HCS रैंक के अधिकारी को फटकार लगाई। CM ने स्पष्ट निर्देश दिए कि मंत्रियों और विधायकों की ट्रांसफर से जुड़ी फाइलों को बेवजह रोका न जाए। बैठक के बाद जब विधायक अपने क्षेत्र लौटने लगे, तो संबंधित अधिकारी ने फोन कर बुलाया और उनकी ट्रांसफर फाइलों को मंजूरी दे दी।

कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों की 1,500 से अधिक ट्रांसफर फाइलें लंबित

सूत्रों का कहना है कि फिलहाल CMO में कैबिनेट मंत्रियों और विधायकों की 1,500 से अधिक ट्रांसफर फाइलें लंबित हैं। एक कैबिनेट मंत्री ने बैठक में बताया कि उनकी 200 से ज्यादा फाइलें अभी अटकी हुई हैं। इसके बाद कई मंत्रियों ने भी अपनी-अपनी लंबित फाइलों की संख्या बताई।हरियाणा में ट्रांसफर-पोस्टिंग के दो मुख्य प्रोसेस हैं। पहले प्रोसेस में विधायक या मंत्री सिफारिश नोट के जरिए CMO को ट्रांसफर का प्रस्ताव भेजते हैं, जिसे देखने का जिम्मा CMO में तैनात OSD स्तर के HCS अधिकारी का होता है। अगर विभाग में जगह खाली हो, तो वह मंजूरी देते हैं, वरना मामले को CM से स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। दूसरे प्रोसेस में विधायक, मंत्री को आवेदन देते हैं, जिसे मंत्री संबंधित विभाग के ACS को मार्क करते हैं, वहां से फाइल बनकर फिर मंत्री के माध्यम से CM के पास जाती है और मंजूरी के बाद ट्रांसफर होता है।

ट्रांसफर ऑनलाइन पॉलिसी के तहत होते हैं, मंत्रियों को कोई विशेष अधिकार नहीं 

हालांकि, CM नायब सिंह सैनी पहले ही साफ कर चुके हैं कि राज्य में सभी ट्रांसफर ऑनलाइन पॉलिसी के तहत होते हैं, इसलिए मंत्रियों को कोई विशेष अधिकार नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर किसी को ट्रांसफर कराना है, तो वह ऑनलाइन आवेदन करे, और समस्या होने पर जिले के DC की अध्यक्षता में बनी कमेटी से संपर्क करे। राज्य में वर्तमान में मंत्रियों के पास ग्रुप-D (माली, स्वीपर, चपरासी) तक के कर्मचारियों का भी ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं है। यह पूरा अधिकार CM के पास है और आदेश CMO से ही जारी होते हैं। पहले, मंत्रियों को सीमित समय के लिए ट्रांसफर के अधिकार मिलते थे, लेकिन 2019 में तत्कालीन CM मनोहर लाल खट्टर के दूसरे कार्यकाल में यह अधिकार हटा दिए गए। नायब सिंह सैनी के CM बनने के बाद भी यह व्यवस्था बरकरार है।

 

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