मिजोरम में पहली बार आयोजित इस सम्मेलन को पूर्वोत्तर क्षेत्र में सहकारी आंदोलन के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सहकारिता मंत्रालय ने कहा कि सहकारी विकास अब पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती और दूरदराज इलाकों तक पहुंचकर स्थानीय समुदायों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऑर्गेनिक खेती, बागवानी, मसाले, मत्स्य पालन, बांस और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सहकारी मॉडल के जरिए बड़े बाजारों से जोड़ा जा सकता है।
सम्मेलन में असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम सहित सभी पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा NABARD, NCDC, NAFED, NCCF, NDDB, NFDB, NEDFi और विभिन्न सहकारी संस्थानों के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। राज्यों ने डेयरी सहकारी समितियों, सहकारी बैंकिंग, अनाज भंडारण अवसंरचना, PACS विस्तार, मत्स्य क्षेत्र और वैल्यू चेन विकास को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। साथ ही ऑर्गेनिक और पारंपरिक उत्पादों के निर्यात और मार्केट लिंकज बढ़ाने के अनुभव भी प्रस्तुत किए गए।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव Ashish Kumar Bhutani ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए “एक जैसा मॉडल” यहां प्रभावी नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष की जरूरतों के अनुसार लचीली नीतियां और समाधान तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंस और समीक्षा बैठकों के जरिए राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों को दूर किया जा सके।
डॉ. भूटानी ने सहकारी बैंकिंग सुधारों को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि देशभर के लगभग 1,500 शहरी सहकारी बैंकों के लिए एकीकृत तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने पर काम किया जा रहा है। इससे बैंकिंग सेवाओं की लागत कम होगी, ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और सहकारी बैंकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रालय FCI और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना को मिशन मोड में लागू करने पर कार्य कर रहा है।
सम्मेलन में “भारत ऑर्गेनिक्स” जैसी पहलों के माध्यम से किसानों के उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग, प्रमाणन और विपणन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। मंत्रालय ने कहा कि किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच दिलाने के लिए राज्यों को अवसंरचना और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही NCDC के माध्यम से सहकारी परियोजनाओं के वित्तपोषण को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
कार्यशाला में सहकारी बैंकिंग सुधार, साइबर सुरक्षा तैयारी, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी समितियों का सुदृढ़ीकरण, MPACS गठन, वैल्यू चेन और मार्केट लिंकज विकास, अनाज भंडारण योजना और पूर्वोत्तर में सहकारी विकास रणनीतियों पर कई विषयगत सत्र आयोजित किए गए। सम्मेलन का समापन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सहकारी संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण समृद्धि, रोजगार सृजन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
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