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मुस्लिम भक्त का कैला मैया के प्रति अटूट आस्था, राशिद खान ने लांघी मजहब की सीमा

उत्तर भारत में प्रसिद्ध कैला मैया का प्रतिवर्ष लगने वाला चैत्र नवरात्रि का लक्खी मेला शुरू हो गया है। लाखों भक्तों का अटूट जनसैलाब उमड़ रहा है। राजस्थान का लघु कुंभ कहें जाने वाले इस मेले में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पैदल चलकर मां के दरबार में पहुंच रहे हैं।

इस बार कैला मां के लक्खी मेले में एक मुस्लिम भक्त अपने मजहब की सीमा लांगकर इंसानियत का संदेश देते हुए कैला मैया की यात्रा कर रहा है।

हजारों भक्तों की भीड़ में कैला मैया के जयकारें लगाते हुए, कैला मैया के इस मुस्लिम भक्त को देख हर कोई हैरान रह जाता है। आगरा का रहने वाला यह मुस्लिम भक्त कैला मैया की यात्रा स्कूटी से कर रहा है। सर पर टोपी और हाथों में कैला मैया का ध्वज लिए आस्था के सरोवर में डूब, जयकारा लगाते हुए इस मुस्लिम युवक को चलते देख हर व्यक्ति एक बार तो आश्चर्य में पड़ जाता है।

फिलहाल कैला मां का यह मुस्लिम भक्त सभी की आंखों का सितारा और सौहार्द की मिसाल बना हुआ है।

आगरा के रहने वाले राशिद खान बताते हैं कि 9 सालों से वह कैला मैया की निरंतर यात्रा करते आ रहे हैं। कैला मैया के प्रति उनके अंदर आस्था आगरा से आने वाले लाखों पैदल यात्रियों को देखकर जागृत हुई थी। राशिद का कहना है कि 9 साल पहले जब वह पहली बार कैला मैया की यात्रा में करने आए तो उनके फोटो भी अखबारों में छप गए। अपने फोटो को अखबार में देखकर राशिद और उनके मिलने वालों को भी काफी खुशी हुई।

राशिद का कहना है कि हम मुसलमान जरूर है लेकिन इंसानियत को सबसे पहले मानते हैं। इस्लाम धर्म हमें इंसानियत की सबसे पहले सीख देता है। एक सच्चा मुसलमान सबसे पहले इंसानियत को ही मानता है। मुसलमान में अगर इंसानियत नहीं तो कुछ भी नहीं। राशिद का कहना है कि इंसानियत के बारे में हुजूर ए पाक और करीम मोहम्मद साहब ने भी फरमाया है।

आगरा के राशिद खान बताते हैं कि ईश्वर और परमात्मा तो एक है, लेने वाला और देने वाला भी एक है। धरती पर आकर मजहब बनाने वाले तो हम इंसान है और भेदभाव भी हमने और तुमने पैदा किया। अगर इंसान में इंसानियत नहीं है तो कुछ भी नहीं है।

सबसे खास बात यह है कि आगरा के राशिद खान धर्म से मुसलमान जरूर है। लेकिन वह हिंदू धर्म के सभी देवी – देवताओं के भी हाथ जोड़कर दर्शन करते हैं। कैला मां की यात्रा के बारे में उनका कहना है कि कैला मैया में हमारी गहरी आस्था है। हम हर साल कैला मैया के दर्शन करने आते है। राशिद का कहना है कि कैला मैया के प्रति हमें हमारी आस्था पुरी है और कई सालों से हम मैया में आस्था लगाए हुए बैठे हैं। आगे माता रानी जो भी करेंगी वह सब अच्छा ही होगा।

राशिद का कहना है कि वह अपनी यात्रा माहे रमजान के पाक महीने में कर रहे हैं. कैला मैया की यात्रा के साथ-साथ वह अपने रोज और नमाज भी अदा कर रहे हैं. रमजान चलने के कारण ही उन्होंने इस बार अपनी यात्रा पैदल चलने के बजाय स्कूटर से शुरू की है.

राशिद खान ने अपनी यात्रा के बारे में बताया कि उन्होंने चार दिन पहले आगरा से कैला मां की यात्रा स्कूटी से शुरू की थी और अब वह करौली पहुंच चुके है. उन्होंने अपनी स्कूटी पर एक संदेश भी लिखवा रखा है. ` न हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा. इंसानियत, इंसान की औलाद है इंसान बनेगा अमन, अमन.. इसके अलावा उन्होंने राशिद बने रामदास त्यागी यह भी अपनी स्कूटी पर लिखवा रखा है. आगरा में रहने वाले राशिद खान चाय की दुकान चलाते हैं. आगरा में काली माता मंदिर, ट्रांसपोर्ट नगर में उनकी स्पेशल चाय वाला के नाम से दुकान है

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