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Mohan Bhagwat statement on PM Modi successor: PM मोदी के उत्तराधिकारी पर मोहन भागवत का बयान, बहस में शामिल होने से संघ प्रमुख ने किया साफ मना, कहा: “अगले PM का फैसला खुद मोदी और BJP करेगी”

Mohan Bhagwat statement on PM Modi successor: PM मोदी के उत्तराधिकारी पर मोहन भागवत का बयान

देश में राजनीतिक हलचल और भविष्य की राजनीति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का एक बयान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस बहस में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।

भागवत ने स्पष्ट कहा कि देश का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका फैसला भारतीय जनता पार्टी और स्वयं नरेंद्र मोदी ही करेंगे। उन्होंने कहा कि यह विषय न तो संघ के अधिकार क्षेत्र में आता है और न ही वे इस पर कोई टिप्पणी करना उचित समझते हैं।

चेन्नई में RSS के शताब्दी वर्ष समारोह में भाग लेने पहुंचे मोहन भागवत से मीडिया ने पूछा कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी के बाद देश की कमान किसके हाथ में होगी। इस सवाल पर उन्होंने कहा, “कुछ सवाल मेरे दायरे से बाहर हैं, इसलिए इस बारे में मुझे कुछ भी कहना नहीं है। मैं सिर्फ शुभकामनाएं दे सकता हूं, और कुछ नहीं। मोदी जी के बाद कौन, यह खुद मोदी जी और बीजेपी को तय करना है।”

भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीति के कुछ हलकों में आगामी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो रही है। हालांकि, भागवत का रुख साफ करता है कि संघ फिलहाल इस बहस में हिस्सा नहीं लेना चाहता और वह भाजपा के संगठनात्मक निर्णयों से दूरी बनाए रखना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे इस संकेत के रूप में देख रहे हैं कि 2024 के बाद की राजनीति या भाजपा के अंदर संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर संघ की भूमिका सीमित ही रहेगी।

9 दिसंबर को दिए गए इस बयान ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान इसलिए भी खींचा है क्योंकि अक्सर यह माना जाता रहा है कि भाजपा और संघ की कई नीतियों और निर्णयों में वैचारिक समानता रहती है। लेकिन भागवत ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रधानमंत्री पद जैसे संवैधानिक और संगठनात्मक मुद्दों का फैसला पूरी तरह भाजपा के अधिकार क्षेत्र में है।

भागवत ने अपने भाषण में देश की सामाजिक एकता को लेकर भी व्यापक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर भारत को विश्वगुरु बनना है, तो जाति और भाषा के आधार पर होने वाले विभाजनों को समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि संघ की भविष्य की दिशा यही होगी कि वह समाज में जागरूकता फैलाए, विभाजन मिटाए और एकता को मजबूत करे। उनका कहना था कि देश में एकता का मजबूत ढांचा खड़ा किए बिना भारत का वैश्विक नेतृत्व संभव नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमें RSS को एक लाख या उससे ज्यादा स्थानों तक ले जाना है। हमें अपने देश में जाति और भाषायी विभाजन को खत्म करना है और एकता वाला समाज बनाना है।” उनके अनुसार, भारत की सशक्त छवि तभी बन सकती है जब समाज के सभी वर्गों के बीच सौहार्द और समन्वय सुनिश्चित हो।

इसी क्रम में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में आयोजित ‘संघ की 100 वर्ष की यात्रा—नए क्षितिज’ कार्यक्रम में मोहन भागवत ने अपने विचार और विस्तार से रखे। उन्होंने कहा कि संघ की अब तक की यात्रा को अक्सर तथ्यों के बजाय धारणाओं के आधार पर देखा गया है। चाहे वह समर्थक हों या विरोधी—दोनों ही कई बार वास्तविकताओं से परे बात करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए।

भागवत ने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा ने संगठन को एक व्यापक पहचान दी है, लेकिन इसके बारे में बहुत सी गलतफहमियाँ और पूर्वाग्रह भी बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से देशभर में नए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ स्वयंसेवक आम जनता से बातचीत करेंगे और संघ के बारे में सही जानकारी साझा करेंगे।

उन्होंने कहा, “हमारा अनुभव यह बताता है कि संघ को लेकर अधिकतर चर्चाएँ धारणाओं पर आधारित होती हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि स्वयंसेवक लोगों के बीच जाएं, उनसे बात करें और तथ्यात्मक रूप से बताएं कि संघ क्या है, कैसे काम करता है और समाज में उसकी भूमिका क्या है।”

भागवत ने यह भी कहा कि देश में संवाद की कमी कई तरह की गलतफहमियों को जन्म देती है। इसलिए संघ चाहता है कि भविष्य में संवाद और सहमति की संस्कृति और मजबूत बने। उनके अनुसार, संघ अब अपने अगले 100 वर्षों की दिशा तय करने में जुटा है, और इसका प्राथमिक लक्ष्य समाज का संगठन, एकता और जागरूकता होगा।

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