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हरियाणा कांग्रेस मे किए गए कई बड़े बदलाव, कांग्रेस को 1 साल बाद मिला नया प्रदेश अध्यक्ष, विधानसभा चुनाव में हार के बाद से शुरू हुए बदलाव

हरियाणा कांग्रेस मे किए गए कई बड़े बदलाव

 

 

हरियाणा विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस लगातार अपने ढांचे और नेतृत्व में बदलाव कर रही है। एक साल के भीतर तीन बड़े फैसले पार्टी ने लिए—प्रभारी की छुट्टी, नया संगठन और अब नया प्रदेश अध्यक्ष। कांग्रेस हाईकमान ने चौधरी उदयभान को हटाकर पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह को ये जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक बार फिर विधायक दल का नेता चुना गया है

दरअसल 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूरी उम्मीद थी कि, राज्य में सत्ता उसकी झोली में आएगी। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं का दावा था कि, जनता बदलाव चाहती है, लेकिन नतीजे उम्मीद से उलट निकले। BJP को 48 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस 37 पर सिमट गई।

इस हार के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमा गई। चुनावी रणनीति पर सवाल उठे और जिम्मेदारी तय करने की मांग जोर पकड़ने लगी। प्रभारी दीपक बाबरिया ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने तक की पेशकश कर दी। उन्होंने कहा कि, स्वास्थ्य कारणों से वे ज्यादा समय पार्टी को नहीं दे पा रहे

जून 2023 में हरियाणा कांग्रेस की जिम्मेदारी संभालने वाले दीपक बाबरिया के नेतृत्व में पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ा। लोकसभा में कांग्रेस ने 10 में से 5 सीटें जरूर जीतीं, लेकिन विधानसभा में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई।

नतीजों के बाद लगातार दबाव बढ़ा और आखिरकार 15 फरवरी 2025 को कांग्रेस हाईकमान ने दीपक बाबरिया को हटाकर बीके हरि प्रसाद को नया प्रभारी नियुक्त कर दिया। हरि प्रसाद इससे पहले भी 2013 में हरियाणा के प्रभारी रह चुके थे।

चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी ने महसूस किया कि, संगठन लंबे समय से कमजोर पड़ा है। 11 साल बाद कांग्रेस ने जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का बड़ा कदम उठाया।
4 जून को राहुल गांधी हरियाणा दौरे पर पहुंचे।

चंडीगढ़ में उन्होंने AICC और PCC के पर्यवेक्षकों के साथ मीटिंग कर संगठन को मजबूत करने का टास्क दिया। इसके बाद केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने 22 जिलों का दौरा किया और स्थानीय नेताओं से फीडबैक लेकर पैनल तैयार किए।

12 अगस्त को 32 जिला अध्यक्षों की सूची जारी हुई। खास बात ये रही कि, इनमें तीन नाम ऐसे नेताओं के थे, जो विधानसभा चुनाव में BJP से हार गए थे। जिसमें अंबाला कैंट से परविंदर परी, भिवानी रूरल से अनिरुद्ध चौधरी और गुरुग्राम रूरल से वर्धन यादव शामिल थे।

हार के बाद से ही चौधरी उदयभान पर सवाल उठ रहे थे। कांग्रेस के अंदरुनी हलकों में ये चर्चा चल रही थी कि, उन्हें जल्द बदला जाएगा। राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला, विधायक गीता भुक्कल, अशोक अरोड़ा, सांसद वरुण चौधरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह जैसे कई नामों की चर्चा रही

23 सितंबर को अचानक पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बिहार में होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग का न्योता मिला। दोनों ही CWC के सदस्य नहीं थे, जिससे अटकलें और तेज हो गईं।

चर्चा यही रही कि, राव नरेंद्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष और हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाया जाएगा। आखिरकार 29 सितंबर को कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नामों का ऐलान कर दिया।

कांग्रेस के इन बदलावों का मकसद साफ है 2029 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करना है। हाईकमान जानता है कि, BJP से टक्कर लेने के लिए केवल बड़े चेहरे काफी नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को एक्टिव करना जरूरी है।

प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी राव नरेंद्र सिंह को देकर पार्टी ने एक OBC चेहरे पर दांव खेला है। वहीं, भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विधायक दल का नेता बनाकर पार्टी ने अपने सबसे अनुभवी चेहरे को आगे रखा है।
कांग्रेस की असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी।

विपक्ष में रहते हुए पार्टी किस तरह से जनता से जुड़ती है और प्रदेश सरकार को घेरती है, ये देखना होगा। BJP फिलहाल सत्ता में है, लेकिन कांग्रेस लगातार बदलाव के जरिए अपनी वापसी की जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है।

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