Raksha Bandhan 2026: इस बार रक्षाबंधन का त्योहार बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा और इसी दिन साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। यही वजह है कि लोगों के बीच इस बात को लेकर भ्रम है कि क्या ग्रहण के कारण राखी बांधने के समय में बदलाव होगा, क्या सूतक काल लगेगा और क्या रक्षाबंधन की पूजा प्रभावित होगी।
हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए ग्रहण को लेकर सामान्य रक्षाबंधन उत्सव पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
आइए 5 आसान प्वाइंट में समझते हैं कि 28 अगस्त को होने वाले चंद्र ग्रहण और रक्षाबंधन को लेकर क्या स्थिति रहेगी।
साल 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस बार पूर्णिमा तिथि 27 और 28 अगस्त के दौरान पड़ रही है, जिसके चलते कुछ लोगों में तारीख को लेकर भ्रम था। हालांकि पर्व के लिए 28 अगस्त को ही मुख्य रूप से माना जा रहा है।
रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। इसके बाद मिठाई खिलाने और उपहार देने की परंपरा है। ऐसे में इस साल भी भाई-बहन इस त्योहार को सामान्य रूप से मना सकते हैं।
28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। यह 2026 का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण होगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण का आंशिक चरण भारतीय समय के अनुसार सुबह करीब 8:03 बजे शुरू होगा और इसका अधिकतम चरण करीब 9:43 बजे रहेगा। आंशिक ग्रहण का चरण लगभग 11:21 बजे समाप्त होगा।
ग्रहण का एक उपच्छाया चरण इससे पहले सुबह करीब 6:53 बजे शुरू होगा और पूरा ग्रहणीय क्रम दोपहर करीब 12:31 बजे तक चल सकता है।
इस ग्रहण को वैज्ञानिक दृष्टि से इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि चंद्रमा का बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी Umbra में प्रवेश करेगा। इसे गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जा रहा है।
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। नहीं, 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।
ग्रहण के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। इसी वजह से भारत में रहने वाले लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे। ग्रहण दुनिया के कुछ अन्य हिस्सों में दिखाई देगा, जिनमें अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के कुछ क्षेत्र शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि भारत में रहने वाले लोगों को ग्रहण देखने के लिए रात में आसमान की ओर देखने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि ग्रहण का समय ही ऐसा है जब भारत से चंद्रमा दिखाई नहीं देगा।
चंद्र ग्रहण के साथ सबसे ज्यादा चर्चा सूतक काल को लेकर होती है। पारंपरिक मान्यताओं में ग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है, लेकिन इसका पालन कई जगह ग्रहण के दिखाई देने और स्थानीय परंपराओं से जोड़ा जाता है।
28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से कई धार्मिक स्रोतों के अनुसार भारत में इस ग्रहण का सूतक प्रभाव लागू नहीं माना जाएगा और रक्षाबंधन की सामान्य धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं।
इसलिए केवल चंद्र ग्रहण की खबर सुनकर राखी बांधने या रक्षाबंधन की पूजा को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं। जो लोग विशेष धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, वे अपने स्थानीय पंचांग या आचार्य की सलाह के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण रक्षाबंधन का पर्व सामान्य रूप से मनाया जा सकता है। बहनें भाई को तिलक लगाकर राखी बांध सकती हैं और पूजा की अन्य पारंपरिक रस्में भी कर सकती हैं। हालिया रिपोर्टों में भी यही बताया गया है कि भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण राखी बांधने की परंपरा को रोकने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि राखी बांधने के समय को लेकर एक अलग बात का ध्यान रखना जरूरी है। रक्षाबंधन पर भद्रा काल और स्थानीय पंचांग में बताए गए शुभ समय को कई परिवार महत्व देते हैं। इसलिए यदि आप विशेष मुहूर्त में राखी बांधना चाहते हैं तो अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
नहीं। 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण निश्चित रूप से एक खास खगोलीय घटना है, लेकिन भारत में इसके दिखाई न देने के कारण रक्षाबंधन के त्योहार पर कोई प्रत्यक्ष ग्रहण संबंधी बाधा नहीं है। विज्ञान की दृष्टि से यह एक सामान्य खगोलीय घटना है, जबकि धार्मिक दृष्टि से सूतक और अन्य नियमों को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही अलग-अलग बातों से भ्रमित होने के बजाय तथ्य समझना जरूरी है। 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा, उसी दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी होगा, लेकिन भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसी कारण भारत में सामान्य रूप से राखी बांधने और त्योहार मनाने में कोई विशेष रुकावट नहीं बताई जा रही है।
नोट: ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियम स्थान, परंपरा और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। यदि आपके परिवार में किसी विशेष परंपरा का पालन किया जाता है, तो स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें।
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