Jagadguru Ramabhadracharya: जगद्गुरू रामभद्राचार्य अपने बयान से फिर सुर्खियों में आए
जगद्गुरू रामभद्राचार्य (Jagadguru Ramabhadracharya)आए दिन अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। और हाल ही में उनके कुछ बयान विवाद का भी कारण बनते हुए दिखे हैं। आपको प्रेमानंद महाराज पर उनका विवादित बयान तो याद होगा, जिसमें उन्होंने प्रेमानंद महाराज के संस्कृत ज्ञान पर सवाल उठाए थे और ना केवल सवाल उठाए थे बल्कि उन्हें संस्कृत में श्लोक बोलने तक का चैलेंज दे बैठे थे।
जिसके बाद प्रेमानंद महाराज और जगद्गुरू रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) के अनुयायी आपस में ही भिड़ गए थे, जिसके बाद काफी विवाद देखने को मिला था। वहीं, जगद्गुरू रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) को खुद वीडियो जारी कर इस विषय पर अपनी सफाई देनी पड़ी थी। ये तो बात थी एक बयान की।
इसके बाद जगद्गुरू रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) ने कुछ दिन पहले कहा था कि डॉ. भीमराव आंबेडकर को संस्कृत नहीं आती थी और यदि उन्हें आती, तो वे मनुस्मृति का अपमान नहीं करते। इस पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने साधु-संतों को गलत बयानबाजी न करने और विवादित बयानों से बचने की सलाह दी है।
बगैर किसी का नाम लिए मायावती ने कहा गलत बयानबाजी करने से बेहतर है कि वे चुप रहें। उन्होंने बाबा साहेब के अनुयायियों द्वारा मनुस्मृति का विरोध करने के कारणों को समझने की भी सलाह दी। साथ ही कहा कि बाबा साहेब की विद्वता पर टिप्पणी करने वाले साधु-संत उनके सामने कुछ भी नहीं हैं। वही हाल ही में जगद्गुरू का पश्चिमी यूपी को मिनी पाकिस्तान कहना भी बड़ा विवाद का कारण बना हुआ है।
अभी इन विवादों ने थमने का नाम भी नहीं लिया था कि इतने में ही जगद्गुरू रामभद्राचार्य (Jagadguru Ramabhadracharya)का एक और बयान सामने आता है जो फिर सियासत को गरमाने वाला होता है, अब उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था पर बयान दिया है। उत्तरप्रदेश के मेरठ की ये बात है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ के विक्टोरिया पार्क में रामकथा चल रही थी, जिसमें जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए। 8 सितंबर से जारी इस कथा के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और महिलाओं के अधिकारों को लेकर कई बातें कहीं… रामभद्राचार्य ने कहा कि, केवल हिंदू धर्म ही ऐसा है जहां महिलाओं को देवी के रूप में सम्मानित किया जाता है,
उन्होंने अन्य धर्मों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि, वहां महिलाओं को बेबी या बीवी कहा जाता है… जगद्गुरू रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) यही नहीं रूके उन्होंने इस्लाम धर्म पर भी तंज कसते हुए कहा कि, इस्लाम में महिलाओं की दुर्गति होती है, एक महिला से 25-25 बच्चे पैदा करने और फिर तीन बार तलाक-तलाक देकर छोड़ने जैसी बातें इस्लाम में देखने को मिलती हैं,
उन्होंने दावा किया कि, हिंदू परंपरा में ऐसा नहीं है और यहां मां को पिता से भी बड़ा दर्जा दिया जाता है.
जगद्गुरु रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) ने बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी, उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि, वो अपने बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों में न भेजें, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने वाले सरस्वती विद्यालय में पढ़ाएं. उन्होंने कहा कि संतान तीन हो, चाहे से तीनो ही बेटा या फिर बेटी कोई भी हो, उन्हें संस्कारी बनाना सबसे जरूरी है.
रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) ने संसद में महिलाओं को दिए गए 33 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा भी उठाया… उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में और ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए. उनका कहना था कि समाज में महिलाओं को ऊंचा दर्जा देने की परंपरा हिंदू धर्म से ही शुरू हुई है.
ये पहली बार नहीं है जब स्वामी रामभद्राचार्य चर्चा में आए हों… हाल ही में उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मिनी पाकिस्तान बताकर भी विवाद खड़ा कर दिया था. रामकथा में दिए गए उनके इन बयानों को लेकर लोगों के बीच जोरदार बहस जारी है.
वही रामभद्राचार्य(Jagadguru Ramabhadracharya) के इस बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है… उन्होंने कहा कि, ऐसे बयान समाज को बांटने वाले हैं और हिंदुओं को गुमराह करने का काम करते हैं. मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने साफ कहा कि पश्चिमी यूपी में किसी तरह का पलायन नहीं हुआ है जो जहां पर है वो वहीं रह रहा है, यहां के लोग खुशहाल हैं.
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बताया कि संभल, मुजफ्फरनगर और मेरठ में हिंदू और मुसलमान मिलजुलकर रहते हैं. सहारनपुर, बागपत, बिजनौर, मुरादाबाद इन तमाम जगहों पर पहले से जितनी आबादी है आज भी उतनी ही है, अगर यहां मुस्लिमों की आबादी बढ़ी है तो गैर मुस्लिमों की आबादी भी बढ़ी है. यहां दोनों समुदायों की आबादी लगातार बढ़ रही है. एक धर्मगुरु के नाते मैं उनका सम्मान करता हूं. उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक गुरु का यह दावा बिल्कुल बेबुनियाद और गलत है.
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने जनसंख्या के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि पूरे देश में मुस्लिम केवल 20 प्रतिशत हैं और 80 प्रतिशत गैर-मुस्लिम हैं. चाहे योगी सरकार हो फिर कोई और सरकार हो. जनसंख्या का सरकार से कोई भी लेना-देना नहीं है,
जनसंख्या तो हमेशा बढ़ती ही रहती है, उन्होंने तंज करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले साध्वी ऋतंभरा, प्रज्ञा ठाकुर और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने तीन-तीन बच्चे पैदा करने की अपील की थी तो यह सवाल उठता है कि क्या किसी मुसलमान ने बच्चे पैदा करने से मना किया? या फिर क्या किसी मुस्लिम संगठन ने कब बच्चों को जन्म देने की बात से मना किया है? जिनके पास बच्चे नहीं हैं उनका दर्द पूछिए.
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