देश

HINDUSTAN: “ये नया हिंदुस्तान है… जो चुप नहीं बैठता, जो सहन नहीं करता, जो आंखों में आंखें डालकर जवाब देता है!”

HINDUSTAN: “ये नया हिंदुस्तान है…

इसिलिए, “अब दुश्मन को सिर्फ डर नहीं लगता…
वो थर्राता है हमारी एकता से, हमारी शक्ति से,
और हमारे इरादों की पवित्रता से।”
क्योंकि, “हमारे हाथों में हथियार नहीं,
इरादों में आग है…, हम जंग नहीं चाहते,
मगर जवाब देना हम बख़ूबी जानते हैं।”

और ऐसा हिंदुस्तान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही बन पाया है, नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और निडरता का ही नतीजा है- कि, आज हमारा देश एक सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत बनता जा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सुरक्षा के मोर्चे पर वो साहसिक कदम उठाए हैं, जिनका असर अब हर नागरिक महसूस कर सकता है। आज, भारत की सीमाएं पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति ने दुश्मनों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक – जब देश पर खतरा मंडराया, तो मोदी सरकार ने दुनिया को दिखा दिया कि, भारत अब सहन नहीं करेगा, बल्कि मुंहतोड़ जवाब देगा।

ऐसा कहना बिल्कुल भी गलत नहीं है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश सुरक्षा के मामलों में दिन-प्रतिदिन मजबूत बनता जा रहा है. जिसके लिए हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 9 अप्रैल को फ्रांस के साथ 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए करीब 64,000 करोड़ रुपये के बड़े सौदे को मंजूरी दी है। जिसके बाद फ्रांस 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर जेट भारतीय नौसेना को सौंपेगा। जिन्हें हिंद महासागर में चीन से मुकाबले के लिए INS विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।

दोनों देशों के बीच 26 राफेल मरीन जेट की खरीद को लेकर कई महीनों से बातचीत चल रही थी। भारत नौसेना के लिए राफेल मरीन की डील उसी बेस प्राइज में करना चाहता था, जो 2016 में वायुसेना के लिए 36 विमान खरीदते समय रखी थी। इस डील की जानकारी सबसे पहले 2023 में PM मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान सामने आई थी। जिसके बाद रक्षा मंत्रालय ने लेटर ऑफ रिक्वेस्ट जारी किया था, जिसे फ्रांस ने दिसंबर 2023 में स्वीकार किया। इससे पहले सितंबर 2016 में 59 हजार करोड़ रुपए की डील में भारत वायुसेना के लिए फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद चुका है।

अब जानते हैं कि राफेल मरीन फाइटर जेट की खासियतें

राफेल मरीन भारत में मौजूद राफेल फाइटर जेट्स से एडवांस्ड है।

जिसका इंजन ज्यादा ताकतवर है, इसलिए ये फाइटर जेट INS विक्रांत से स्की जंप कर सकता है।

ये बहुत कम जगह पर लैंड भी कर सकता है। इसे ‘शॉर्ट टेक ऑफ बट एरेस्टर लैंडिंग’ कहते हैं।
राफेल के दोनों वैरिएंट में लगभग 85% कॉम्पोनेंट्स एक जैसे हैं।
जिसका मतलब है कि स्पेयर पार्ट्स से जुड़ी कभी भी कोई कमी या समस्या नहीं होगी।
ये 15.27 मी. लंबा, 10.80 मी. चौड़ा, 5.34 मी. ऊंचा है। इसका वजन 10,600 किलो है।
इसकी रफ्तार 1,912 kmph है। इसकी 3700 किमी की रेंज है। ये 50 हजार फीट ऊंचाई तक उड़ता है।
ये एंटीशिप स्ट्राइक के लिए सबसे बढ़िया माना जा रहा है।
इसे न्यूक्लियर प्लांट पर हमले के नजरिए से भी डिजाइन किया गया है।

पहले दौर की चर्चा जून 2024 में हुई थी 26 राफेल-एम फाइटर जेट खरीदने की डील पर पहले दौर की चर्चा जून 2024 में शुरू हुई थी। तब फ्रांस सरकार और दसॉ कंपनी के अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय की कॉन्ट्रैक्ट नेगोशिएशन कमेटी से चर्चा की थी। डील फाइनल होने पर फ्रांस राफेल-M जेट के साथ हथियार, सिमुलेटर, क्रू के लिए ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराएगा।

इन हथियारों में अस्त्र एयर-टु-एयर मिसाइल, एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट करने के लिए जेट में इंडियन स्पेसिफिक इन्हैंस्ड लैंडिंग इक्विपमेंट्स और जरूरी इक्विपमेंट्स शामिल किए गए हैं। फ्रांस ने ट्रायल्स के दौरान इंडियन एयरक्राफ्ट कैरियर्स से राफेल जेट की लैंडिंग और टेक-ऑफ स्किल का प्रदर्शन किया है, लेकिन रियल टाइम ऑपरेशन के लिए कुछ और इक्विपमेंट्स का इस्तेमाल करना होगा।

राफेल-M V/S राफेल
फीचर राफेल-M राफेल
एयरफ्रेम एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर लैंडिंग के हिसाब से एयरफ्रेम स्टैंडर्ड एयरफ्रेम

विंग फोल्डेबल नॉन फोल्डेबल

टेलहुक मौजूद है नहीं है

रडार नौसेना के हिसाब से बदलाव किया गया है स्टैंडर्ड रडार

हथियार कई सारे हथियारों के साथ एंटी शिप मिसाइल से लैस स्टैंडर्ड रेंज वाले हथियार

मिशन विमानवाहक पोत से जुड़े ऑपरेशन्स हवा से हवा में हमला, हवा
से जमीन पर हमले के साथ हवा में एयर रिफ्यूलिंग

भारतीय नेवी के लिए खरीदे जा रहे 22 सिंगल सीट राफेल-एम जेट और 4 डबल ट्रेनर सीट राफेल-एम जेट हिंद महासागर में चीन से मुकाबले के लिए INS विक्रांत पर तैनात किए जाएंगे। भारतीय नौसेना इन विमानों को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में INS डेगा में अपने होम बेस के रूप में तैनात करेगी। नौसेना के डबल इंजन वाले जेट आमतौर पर दुनियाभर की एयरफोर्स की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे विमानों की तुलना में ज्यादा महंगे होते हैं, क्योंकि समुद्र में इनके ऑपरेशन के लिए अतिरिक्त क्षमताओं की जरूरत होती है। इनमें अरेस्टिंग लैंडिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले लैंडिंग गियर भी शामिल हैं।

पहली खेप में 2-3 साल लग सकते हैं, वायुसेना के लिए विमान आने में 7 साल लगे थे INS विक्रांत के ट्रायल शुरू हो चुके हैं। उसके डेक से फाइटर ऑपरेशन परखे जाने बाकी हैं। सौदे पर मुहर लगने के कम से कम एक साल तक टेक्निकल और कॉस्ट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होंगी। एक्सपर्ट के मुताबिक नौसेना के लिए राफेल इसलिए भी सही है, क्योंकि वायुसेना राफेल के रखरखाव से जुड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर चुकी है।

यही नौसेना के भी काम आएगा। इससे काफी पैसा बच जाएगा। सूत्रों का कहना है कि राफेल-M की पहली खेप आने में 2-3 साल लग सकते हैं। वायु सेना के लिए 36 राफेल का सौदा 2016 में हुआ था और डिलीवरी पूरी होने में 7 साल लग गए थे।

राफेल में घातक हथियार
स्कैल्प मिसाइल -लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल।
मेटेयोर मिसाइल -लंबी दूरी तक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल।
लेजर गाइडेड बम (LGB) – 500-2000 पाउंड के बम, जो लेजर के बूते सटीक हमला करें।
नॉन गाइडेड क्लासिकल बम (NCB) – जमीन पर बमबारी के काम आने वाले परंपरागत बम।
हैमर जीपीएस बम (HAMMER) – हवा से जमीन पर मार करने वाला स्मार्ट बम, जो जीपीएस से सटीक हमला करे।

INS विक्रांत के एविएशन फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स यानी AFC को मिग-29 फाइटर प्लेन के लिहाज से तैयार किया गया था। मिग रूस में बने फाइटर प्लेन हैं, जो हाल के सालों में अपने क्रैश को लेकर चर्चा में रहे हैं। इसलिए भारतीय नौसेना अगले कुछ सालों में अपने बेड़े से मिग विमानों को पूरी तरह से हटाने जा रही है

आने वाले सालों में नौसेना की योजना तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के नौसेना वर्जन को विक्रांत पर तैनात करने की है। तेजस देश में बन रहा ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर प्लेन है। हालांकि DRDO की ओर से बनाए जा रहे तेजस को तैयार होने में अभी 5-6 साल का वक्त लगेगा। इसके 2030-2032 तक नेवी को मिल पाने की संभावना है।

वहीं, बात करें चीन की, तो चीन अब अपने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान का परीक्षण कर रहा है। ये 80 हजार टन से अधिक वजनी है। इससे पहले उसने 60,000 टन वजनी लियाओनिंग और 66,000 टन वजनी शांदोंग को भी चीन नेवी में शामिल कर चुका है। ऐसे में भारत भी चीन से मुकाबले के लिए अपनी नेवी की ताकत को बढ़ा रहा है।

वहीं, बात करें फ्रांस के साथ एक और बड़े सौदा की,तो 33,500 करोड़ रुपये का सौदा, तीन अतिरिक्त डीजल-इलेक्ट्रिक स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए है। जिनका निर्माण मझगांव डॉक्स की तरफ से फ्रांसीसी मेसर्स नेवल ग्रुप के सहयोग से किया जाएगा। इसे भी अब अंतिम रूप दिया जा रहा है, जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले बताया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बढ़ती हिंदुस्तान की ताकत को पाकिस्तान और चीन के साथ-साथ पूरी दुनिया देख रही है, और ये अच्छे से जान रही है कि, अगर नए भारत को छेड़ोगे, तो छोडेंगे नहीं, जय हिंद.. आपको ये वीडियो अच्छी लगी हो तो लाइक करें, चैनल को सबस्क्राइब करें, और सबसे जरूरी कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें…

Kirti Bhardwaj

Recent Posts

यूपी में सपा का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, कई मुद्दों पर सरकार को घेरा

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर राज्य…

11 hours ago

जंतर-मंतर आंदोलन को मिली नई ताकत! रविंद्र सिंह भाटी और निर्मल चौधरी की एंट्री, सरकार पर बढ़ा दबाव

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को…

12 hours ago

पेपर लीक पर सख्त होगी कार्रवाई, मोदी कैबिनेट ने बिल को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली के खिलाफ बड़ा कदम…

13 hours ago

ISRO Internship 2026: अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने वालों के लिए सुनहरा मौका

अगर आप अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग या नई तकनीक के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते…

13 hours ago

लखनऊ में बनेगा यूपी का नया विधानसभा भवन, कमल की आकृति में होगा भव्य परिसर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही नया विधानसभा परिसर बनने जा रहा है।…

13 hours ago

IRCTC तत्काल टिकट बुकिंग के नियमों में बदलाव, आधार OTP से होगी सुरक्षा मजबूत

आज के डिजिटल समय में ज्यादातर लोग अपने जरूरी काम ऑनलाइन ही करना पसंद करते…

14 hours ago