इस साल मार्च का महीना बेहद ही अलग रवैया दिखा रहा है। मैदानी इलाकों में पारा इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि तापामान 40 डिग्री के पार चला गया है और अभी से अप्रैल-मई की गर्मी का एहसास होने लगा है। वहीं, दूसरी तरफ पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी हो रही है, जिससे ठंडक मिल रही है और कई जगहों पर ओले भी गिर रहे हैं। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि ये सब क्यों हो रहा है?
बता दें कि, देश के अधिकतर इलाकों में तापमान अभी से 40 डिग्री के आस-पास पहुंच गया है। हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और पंजाब में तेज गर्मी हो रही है। हीट वेव (लू) का अलर्ट जारी है। वहीं, पहाड़ी इलाकों में इसके विपरीत हो रहा है।
हिमाचल प्रदेश के पांच जिलों (मंडी, बिलासपुर, सोलन, कांगड़ा और कुल्लू) में ओले गिरने का येलो अलर्ट है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में बारिश और बर्फबारी हो रही है। जिससे पहाड़ी इलाकों को राहत मिल रही है, लेकिन मैदानों में गर्मी बनी हुई है। वहीं, अगले 4-5 दिन कुछ जगहों पर बारिश के आसार हैं, लेकिन गर्मी अभी थमने वाली नहीं है।
बताए कि, इस मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ है। यह एक तरह की हवा की प्रणाली है जो भूमध्य सागर से नमी लेकर आती है और जब यह हिमालय की पहाड़ियों से टकराती है तो बारिश, बर्फबारी और कभी-कभी ओले गिराते हैं। बता दें कि, अभी एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, इसलिए पहाड़ों में यह सब हो रहा है।
बता दें कि, क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन है। पश्चिमी विक्षोभ पहले सर्दियों में ज्यादा आते थे, अब उनका पैटर्न बदल गया है। आर्कटिक और भूमध्य सागर के गर्म होने से ये कमजोर हो गए हैं। नतीजा – सर्दी में कम बर्फबारी और मार्च में ही तेज गर्मी का एहसास हो रहा है।
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