राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को उस समय एक असहज स्थिति पैदा हो गई, जब केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बार-बार बिजली चली गई। यह प्रेस वार्ता मोदी सरकार के कार्यकाल और विभिन्न उपलब्धियों को लेकर आयोजित की गई थी, लेकिन कार्यक्रम के बीच हुए पावर कट ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव मीडिया के सामने केंद्र सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और पिछले वर्षों की उपलब्धियों पर विस्तार से जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान सभागार की बिजली कई बार बाधित हुई और कुल मिलाकर करीब 13 मिनट तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। बिजली कटने के बावजूद मंत्री ने अपना संबोधन नहीं रोका। कम रोशनी वाले हॉल में उन्होंने अपना भाषण जारी रखा और मौजूद पत्रकारों को संबोधित करते रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर रोशनी की व्यवस्था करने की कोशिश की, जिससे मंत्री अपना संबोधन जारी रख सकें।
राज्य की सत्ताधारी पार्टी के मुख्यालय में ही बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटना जल्द ही चर्चा का विषय बन गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। कई लोगों ने इसे तकनीकी खामी बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़कर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
घटना के बाद राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा कि राजस्थान की बिजली भी अब “झूठ को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।” कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिजली का बार-बार चले जाना सरकार की स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार, भाजपा सरकार अपने कामकाज और प्रदर्शन से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब देने में असहज महसूस कर रही है।
इस घटना के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। विपक्ष जहां इसे सरकार की विफलताओं से जोड़कर देख रहा है, वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यह केवल तकनीकी समस्या थी, जिसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में होने वाली तकनीकी गड़बड़ियां भी राजनीतिक माहौल में बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं, खासकर तब जब मामला सत्तारूढ़ दल के कार्यक्रम से जुड़ा हो।
गौरतलब है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केंद्र में प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल और विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने के लिए आयोजित की गई थी। अश्विनी वैष्णव सरकार की उपलब्धियों, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रेलवे आधुनिकीकरण और डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर मीडिया को संबोधित कर रहे थे। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकार के विकास कार्यों को सामने रखना था, लेकिन बीच में हुई बिजली कटौती ने पूरी प्रेस वार्ता का फोकस बदल दिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का केंद्र बन गई।
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