क्या सच में नेपाल ने भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है ? विदेश मंत्रालय की सफाई आई सामने

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह (Balen Shah) के संसद में दिए गए एक बयान को लेकर नेपाल और भारत दोनों देशों में चर्चा शुरू हो गई। प्रधानमंत्री के बयान को कुछ लोगों ने भारत की जमीन पर नेपाल के कब्जे के दावे के रूप में देखा, जिसके बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय को आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।

संसद में क्या बोले थे प्रधानमंत्री?

संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि सीमा क्षेत्रों में केवल भारत द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जे के आरोप ही नहीं हैं, बल्कि कुछ ऐसे इलाके भी हैं जहां नेपाल की ओर से इस्तेमाल की जा रही जमीन भारत के अधिकार क्षेत्र में आ सकती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद से जोड़कर देखा।

विदेश मंत्रालय ने क्या सफाई दी?

नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lok Bahadur Paudel Chhetri ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का बयान किसी नए क्षेत्रीय दावे या सीमा बदलने की मांग से संबंधित नहीं था।
मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री का संदर्भ सीमा पर स्थित “दसगजा क्षेत्र” यानी नो-मैन्स-लैंड और सीमा पार भूमि उपयोग से था। कुछ स्थानों पर ऐसी स्थिति है जहां एक देश के नागरिक दूसरे देश की सीमा के भीतर आने वाली जमीन पर खेती करते हैं या उसका उपयोग करते हैं।

क्या है दसगजा क्षेत्र?

नेपाल और भारत की सीमा के बीच कुछ स्थानों पर नो-मैन्स-लैंड क्षेत्र मौजूद है, जिसे नेपाल में “दसगजा” कहा जाता है। यह दोनों देशों के बीच निर्धारित सीमा पट्टी होती है, जहां किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण या कब्जा नहीं होना चाहिए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि तकनीकी अध्ययनों में ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं जहां नेपाल के नागरिक भारतीय क्षेत्र में आने वाली जमीन का उपयोग कर रहे हैं, जबकि कुछ स्थानों पर भारतीय नागरिक नेपाली क्षेत्र की जमीन का उपयोग कर रहे हैं।

मंत्रालय ने क्या कहा?

मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान इसी तकनीकी वास्तविकता की ओर इशारा कर रहा था। इसका मतलब यह नहीं था कि नेपाल भारत की किसी भूमि पर अपना दावा कर रहा है या किसी नए क्षेत्र पर कब्जे की बात कर रहा है। सरकार के अनुसार, यह सीमा क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं और भूमि उपयोग से जुड़ा मुद्दा है, जिसे दोनों देशों के सहयोग से सुलझाया जा सकता है।

सीमा विवादों पर भी बोले शाह

इसी संसदीय सत्र के दौरान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि भारत और नेपाल को सीमा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से करना चाहिए। उन्होंने विवादित क्षेत्रों Lipulekh, Limpiyadhura और Kalapani का भी उल्लेख किया और कहा कि इन मुद्दों का समाधान आपसी संवाद के जरिए निकाला जाएगा।

विवाद के बाद आई स्पष्टता

प्रधानमंत्री के बयान के बाद उठे विवाद और आलोचनाओं को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया कि उनका आशय सीमा क्षेत्रों में भूमि उपयोग और अतिक्रमण जैसी तकनीकी समस्याओं से था, न कि किसी नए क्षेत्रीय दावे से। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि नेपाल भारत के साथ सीमा संबंधी मुद्दों को शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के पक्ष में है।

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