Haryana New District: ‘हांसी’ पर क्यों बरपा ‘हंगामा’!
हरियाणा में हांसी को नया जिला बनाए जाने के फैसले ने सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज कर दिया है। इनेलो प्रमुख अभय सिंह चौटाला ने इस फैसले को प्रशासनिक नहीं, बल्कि “कमाई का बंदोबस्त” करार देते हुए सीधे बीजेपी के नेताओं पर निशाना साधा। दूसरी ओर भाजपा और सरकार इसे जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी करना और सुशासन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
बता दें कि, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिसंबर 2025 में हांसी को आधिकारिक रूप से हरियाणा का 23वां जिला घोषित किया था… सरकार का दावा है कि इससे हिसार जिले के पुनर्गठन के जरिए प्रशासनिक बोझ कम होगा… साथ ही हांसी और नारनौंद क्षेत्र के लोगों को दफ्तरों तक कम दूरी तय करनी पड़ेगी। हांसी पहले से ही 2016 से पुलिस जिला के रूप में काम कर रहा था, जिसे अब पूर्ण जिला दर्जा दिया गया है।
वहीं, अभय चौटाला का आरोप है कि हांसी को जिला बनाने के पीछे भाजपा सरकार की विकास नहीं, बल्कि “पैसा कमाने” की मंशा है। उनका कहना है कि हांसी से भाजपा विधायक विनोद भयाना ने शहर से सटे इलाकों में हजारों एकड़ जमीन खरीदी हुई है और जिला बनने के बाद इन जमीनों की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी।
अभय चौटाला ने ये भी तर्क दिया कि, अगर वास्तव में सिर्फ प्रशासनिक सुविधा ही मकसद होता तो गोहाना और डबवाली जैसे क्षेत्रों को भी जिला बनाया जाता, जहां लोग वर्षों से मांग कर रहे हैं।
वहीं, दूसरी तरफ हांसी विधायक विनोद भयाना ने अभय चौटाला के आरोपों को “बेतुका और निराधार” बताते हुए चुनौती दी कि, अगर जमीन खरीद के सबूत दे दिए जाएं, तो वे राजनीति छोड़ देंगे। भयाना का कहना है कि हांसी जिला बनना यहां के लोगों की दशकों पुरानी मांग थी, जिसे अब जाकर पूरा किया गया है, उल्टा आरोप लगाने वाले विकास रोकने की राजनीति कर रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने ये भी तर्क दिया कि जिला बनने से स्थानीय स्तर पर सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ेगा, जिससे आम जनता को सीधा लाभ होगा।
जबिक, कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं ने हांसी को जिला बनाने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे “देरी से मिला हक़” बताया, लेकिन साथ ही सरकार पर आरोप लगाया कि दूसरे क्षेत्रों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। विपक्षी खेमे में ये भी चर्चा है कि सैनी सरकार ने हांसी को जिला बनाकर राजनीतिक संदेश देने और जाट–गैर-जाट समीकरण साधने की कोशिश की है…
हांसी, गोहाना और डबवाली जैसे इलाकों में अब बहस इस बात पर है कि जिला बनाने का लाभ किसको ज्यादा मिलेगा… जनता को या जमीन कारोबारी और नेताओं को।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आने वाले चुनावों में हांसी जिला मुद्दा बनेगा… इनेलो इसे “जमीन और जेब गर्म करने का मॉडल” बताएगी, जबकि भाजपा इसे “सुशासन और विकास का मॉडल” कहकर पेश करेगी। फिलहाल लोगों की नजर इस पर है कि, नए जिले के गठन के बाद प्रशासनिक ढांचा, दफ्तरों की स्थापना और विकास परियोजनाएं ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतरती हैं या ये फैसला भी सिर्फ भाषणों और आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट कर रह जाता है।
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