GOSWAMI: बांके बिहारी कॉरिडोर का बनना लगभग तय
गोस्वामियों (GOSWAMI) ने कह दिया है कि, हम हमारे ठाकुर जी लेकर चले जाएंगें अगर बांके बिहारी कॉरिडोर बनाया गया तो, लेकिन योगी सरकार भी कॉरिडोर को लेकर सख्त है… और इस बात पर प्रशासन भी पीछे हटने को तैयार नहीं है कि, कॉरिडोर को बनाने से रोका जाए।
सरकार औऱ प्रशासन हर वो संभव प्रयास करने को तैयार है जो बांके बिहारी कॉरिडोर को बनाने में सहायक हो। अब इस बात से हम सभी वाकिफ है कि मथुरा के वृंदावन में बांके बिहारी कॉरिडोर बनाने का गोस्वामी(GOSWAMI) परिवार विरोध कर रहा है। धर्मार्थ कार्य विभाग का कहना है कि विरोध की असल वजह सिर्फ गोस्वामी परिवारों के अधिकार का झगड़ा नहीं है। झगड़ा गोस्वामी(GOSWAMI) परिवारों और स्वामी हरिदास ट्रस्ट के बीच हर महीने लाखों रुपए के चढ़ावे की रकम का भी है।
जी हां सही सुना अधिकार का कोई झगड़ा नहीं है अगर झगड़ा है तो वो है चढ़ावे की रकम का। हालाकि ये कहना है सिर्फ धर्मार्थ कार्य विभाग का।
जाहिर सी बात है
कॉरिडोर बनने से बांके बिहारी मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि पर बड़ा अधिकार ट्रस्ट का होगा। विभाग का कहना है कि, सरकार का मजबूत इरादा है, कोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद अब कॉरिडोर बनाया जाएगा। सरकार चंद परिवारों से ज्यादा मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार है।
धर्मार्थ कार्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि, बांके बिहारी जी मंदिर स्वामी हरिदास ने स्थापित किया था। मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन स्वामी हरिदास ट्रस्ट के पास है। कायदे से मंदिर में आने वाले चढ़ावे की राशि, सोने-चांदी के जेवरात, सभी ट्रस्ट के दानपात्र में डाले जाने चाहिए। लेकिन, गोस्वामी(GOSWAMI) परिवारों ने मंदिर परिसर और उसके बाहर अपने दानपात्र लगा रखे हैं।
ट्रस्ट के दानपात्र की तुलना में कई गुना ज्यादा चढ़ावा गोस्वामी(GOSWAMI) परिवार के दानपात्र में आता है।
एक अनुमान के मुताबिक, हर महीने 50 लाख रुपये से ज्यादा का चढ़ावा गोस्वामी(GOSWAMI) परिवार के पास आता है। जबकि ट्रस्ट के पास महज 10-15 लाख रुपये महीने आ रहे हैं। जब कॉरिडोर का निर्माण हो जाएगा, तो वहां रखे जाने वाले सभी दानपात्र पर ट्रस्ट का ही अधिकार होगा। इससे गोस्वामी(GOSWAMI) परिवार की हर महीने की लाखों रुपए की कमाई बंद हो जाएगी। यही वजह है, गोस्वामी परिवार कॉरिडोर निर्माण का पुरजोर विरोध कर रहा है।
गोस्वामी(GOSWAMI) परिवार और स्थानीय कुछ लोग कॉरिडोर निर्माण का यूं ही विरोध नहीं कर रहे। शासन को रिपोर्ट मिली है कि रोज बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं से दर्शन के नाम पर ही लाखों रुपये की कमाई की जाती है। गोस्वामी (GOSWAMI)परिवार के साथ कुछ स्थानीय दुकानदार और पुलिसकर्मी भी भक्तों से मंदिर में भीड़भाड़ से बचाते हुए दर्शन कराने के 2 से 5 हजार रुपए तक वसूलते हैं।
धर्मार्थ कार्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि कुंज की गलियों को यथासंभव बचाने का प्रयास किया जाएगा। बांके बिहारी कॉरिडोर के निर्माण पर 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कॉरिडोर निर्माण के लिए पैसे की कमी नहीं है। जितनी जरूरत होगी, सरकार उतना बजट देगी।
वही बांके बिहारी मंदिर तक पहुंचने के लिए यहां के मुख्य रास्ते से 22 गलियां हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा छोटी गलियां भी हैं, जो एक-दूसरे से कनेक्ट हैं। धर्मार्थ कार्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि कॉरिडोर निर्माण से सेवादारों को बेदखल करना सिर्फ अफवाह है।
बांके बिहारी मंदिर के कॉरिडोर का प्लान धर्मार्थ कार्य विभाग ने कोर्ट में पेश किया है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कोर्ट की हरी झंडी मिलने के बाद प्लान पर काम शुरू किया जाएगा। काम शुरू होने से लेकर 2 से 3 साल में कॉरिडोर का निर्माण पूरा किया जाएगा।
वही बांके बिहारी मंदिर के वरिष्ठ सेवायत का कहना है कि, ठाकुरजी के जो साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए हैं, वो गोस्वामी (GOSWAMI)परिवार ने ही तो इकट्ठा किया है। जिस तरह से पौने दो सौ साल पहले 68 हजार रुपए खर्च कर मंदिर बनाया था, उसी तरह से ये नए मंदिर के लिए पैसा इकट्ठा हो रहा है। इसमें से हम लोग उपयोग नहीं करते हैं। सरकार पूरी तरह से मंदिर का अधिग्रहण करना चाहती है, उसी में उसका इंटरेस्ट है।
बल्कि हम(GOSWAMI) तो कह रहे हैं कि सारा पैसा ले लो, मंदिर ले लो, हमारे ठाकुरजी हमको दे दो। हम उनको लेकर चले जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेढ़ साल पहले ही बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर बनाने का संकेत दे दिया था। मोदी ने 23 नवंबर, 2023 को मथुरा में मीराबाई की 525वीं जयंती पर आयोजित समारोह में कहा था कि अयोध्या के लोकार्पण की तिथि आ गई है। मथुरा भी अब दूर नहीं, यह क्षेत्र भी विकास में पीछे नहीं रहेगा। भविष्य में यहां भगवान के दर्शन दिव्य रूप में होंगे।
बांके बिहारी कॉरिडोर निर्माण के लिए योगी सरकार ने अध्यादेश मंजूर किया है। शासन के सूत्रों के मुताबिक, विधानमंडल के मानसून सत्र में सरकार इसका विधेयक भी लेकर आएगी। विधेयक का विपक्ष विरोध कर कुछ सुझाव दे सकता है। लेकिन, दोनों सदनों में सरकार के पास बहुमत होने से विधेयक मंजूर होना तय है। विधेयक मंजूर होने के बाद इसकी नियमावली बनाई जाएगी। इसमें स्वामी हरिदास ट्रस्ट, सेवादारों और गोस्वामी(GOSWAMI) परिवार के अधिकार क्षेत्र और कामकाज तय किए जाएंगे।
मथुरा के भाजपा विधायक पंडित श्रीकांत शर्मा ने 2023 में मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा था। शर्मा ने मदन मोहन मंदिर से केसी घाट तक एक बड़ा कॉरिडोर बनना चाहिए। इसी कॉरिडोर में बांके बिहारी जी, राधा वल्लभजी के साथ देवालय का प्रवेश द्वार भी हो।
कॉरिडोर के लिए यमुना किनारे जमीन भी उपलब्ध है। यमुना के एक ओर पार्किंग बनाई जाए दूसरी ओर कॉरिडोर। इससे कुंज की गलियों का पुरातन स्वरूप भी बना रहेगा। लेकिन, सरकार ने केवल बांके बिहारी मंदिर के आसपास ही कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है।
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