उत्तर प्रदेश

मुरादनगर श्मशान घाट में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन पानी की टंकी पर शटरिंग गिरने से कई मजदूर दबे

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर श्मशान घाट में एक बार फिर बड़ा हादसा हुआ है, जब निर्माणाधीन पानी की टंकी पर लगी शटरिंग अचानक गिर गई। इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप मलबे में 11 से अधिक मजदूर दब गए। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और सभी दबे हुए मजदूरों को मलबे से निकालने की कोशिश की। इस हादसे में घायल हुए मजदूरों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मुरादनगर श्मशान घाट में निर्माणाधीन पानी की टंकी के निर्माण कार्य में लगे मजदूर शटरिंग पर काम कर रहे थे। इस दौरान एक मजदूर शटरिंग की रिपेयरिंग कर रहा था, तभी अचानक शटरिंग भरभराकर गिर गई। शटरिंग गिरने के साथ ही उस पर काम कर रहे कई मजदूर भी नीचे गिर गए। इस हादसे के बाद मलबे में दबे मजदूरों की चीखें सुनाई दीं, जिससे आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।

जानकारी के अनुसार, मुरादनगर के ग्राम उखलारसी स्थित श्मशान घाट में एक मजदूर काम करते वक्त फिसलकर गिर गया था। गिरते वक्त उसने शटरिंग का एक बांस पकड़ने की कोशिश की, जिससे शटरिंग पूरी तरह से गिर गई। इसके बाद, सभी मजदूर नीचे गिर गए और मलबे में दब गए।

राहत और बचाव कार्य

घटना के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य में भाग लिया। उन्होंने मलबे से मजदूरों को बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। करीब छह लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया, जबकि अन्य मजदूरों को निकालने के प्रयास लगातार जारी रहे। राहत कार्य में स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी मदद कर रही है।

अस्पताल में भर्ती किए गए मजदूरों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें इलाज के लिए आईसीयू में रखा गया है। हालांकि, किसी भी मजदूर की मौत की सूचना अभी तक नहीं आई है। घटना की जांच के लिए पुलिस मौके पर मौजूद है और विधिक कार्रवाई की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि निर्माणाधीन पानी की टंकी पर लगी शटरिंग में कुछ मरम्मत का काम चल रहा था। मजदूर शटरिंग की रिपेयरिंग कर रहे थे, और अचानक शटरिंग का ढांचा कमजोर होकर गिर गया। यह पूरी घटना बहुत ही संयोग से घटित हुई, क्योंकि उस दौरान एक मजदूर का गिरना शटरिंग को गिराने का कारण बना। माना जा रहा है कि यह हादसा किसी निर्माण संबंधी लापरवाही के कारण हुआ हो सकता है।

मुरादनगर में यह दूसरा बड़ा हादसा

यह घटना मुरादनगर श्मशान घाट में होने वाला दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले, इसी स्थान पर कुछ महीने पहले भी एक हादसा हुआ था, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे। इस बार भी घटनास्थल पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

पुलिस और प्रशासन का रुख

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मामले की पूरी जांच का आदेश दिया है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और इस मामले में उचित कार्रवाई करने की बात की है। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि लापरवाही या किसी प्रकार की नियमों की अनदेखी पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उधर, गाजियाबाद के एसएसपी ने भी मामले की पूरी जांच कराए जाने की बात की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

मजदूरों की स्थिति और इलाज

घायलों का इलाज अभी जारी है और अस्पताल में उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि घायलों को सभी जरूरी चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं, और उनकी हालत में सुधार हो रहा है। कुछ मजदूरों की स्थिति अभी भी नाजुक बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन ने पूरी कोशिश की है कि सभी घायलों को समय पर उपचार मिले।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की भूमिका

इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के लोगों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न सिर्फ मजदूरों को मलबे से बाहर निकाला, बल्कि उन्हें सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाने का काम भी किया। उनका यह योगदान काबिले तारीफ था, क्योंकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में स्थानीय लोगों का सक्रिय सहयोग बेहद जरूरी होता है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी का सवाल

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या निर्माण कार्य में मजदूरों की सुरक्षा का सही तरीके से ध्यान रखा गया था? यदि शटरिंग को ठीक से फिट किया गया होता और निर्माण कार्य के दौरान सही सुरक्षा उपायों का पालन किया गया होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था। यह घटना एक बार फिर से निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और मजदूरों के जीवन को खतरे में डालने के मुद्दे को सामने लाती है।

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