Former Prime Minister of Pakistan Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान कैसे हुए लापता ?
पाकिस्तान में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत-स्थिति से जुड़ी अफवाहों और उनके परिवार–समर्थकों की बढ़ती चिंता ने देश और दुनिया में हलचल मचा दी है। उनके 24 दिन पुराने सोशल-मीडिया पोस्ट को फिर से लेकर विवाद छिड़ गया है, जिसमें इमरान ने अपने देश के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर तीखे आरोप लगाए थे।
इमरान का वह आखिरी पोस्ट 4 नवंबर को उनके आधिकारिक एक्स हैंडल से प्रकाशित हुआ था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि “आसिम मुनीर पाकिस्तान के इतिहास का सबसे जालिम तानाशाह और मानसिक रूप से असंतुलित इंसान है। उसके शासन में ज़ुल्म की हदें पार हो गई हैं … मुनीर सत्ता के लालच में कुछ भी कर सकता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि मुनीर और उनकी पत्नी के खिलाफ कई षड्यंत्र हुए हैं।
उस पोस्ट के बाद से इमरान खान की न तो कोई नई तस्वीर या वीडियो सार्वजनिक हुई है, और न ही उन्हें जेल के बाहर देखा गया — जिससे उनकी सेहत व सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। उनके बेटे कासिम खान ने जोर देकर कहा है कि उन्हें अपने पिता से मिलने या बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही, न ही जेल से किसी प्रकार की “प्रूफ ऑफ लाइफ” मिली है। उन्होंने खुलासा किया कि इमरान को “जीरो-पारदर्शिता” वाली एक “डेथ सेल” (मृत्युदंड-सेल) में रखा गया है, जहाँ न परिवार से किसी प्रकार की मुलाकात हो रही है, न फोन कॉल या हस्ताक्षरित कोई नोट्स मिल रहे हैं।
उनकी बहनें, साथ ही पार्टी समर्थक जिस जेल — अदियाला जेल (Adiala Jail, रावलपिंडी) — में उनकी रिहाई या हालत जानने की कोशिश कर रहे थे, वहाँ पहुँचने पर उन्होंने दावा किया कि उन्हें पुलिस द्वारा “बहुत ही बेरहमी” से पीटा गया। उनके मुताबिक, उन्हें बिना किसी उकसावे के जबरदस्ती जमीन पर गिराया गया, बाल पकड़े गए, खींचा-तानी हुई, और उन्हें अस्त-व्यस्त हाल में छोड़ा गया। ये सब उस दिन हुआ, जब वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने भाई से मिलने का प्रयास कर रही थीं।
जेल प्रशासन ने इन सभी अफवाहों और आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि इमरान खान “पूर्ण रूप से स्वस्थ” हैं और उन्हें पूरी मेडिकल देखभाल दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जेल से स्थानांतरित नहीं किया गया है।
इमरान ने अपने उस अंतिम पोस्ट में यह भी कहा था कि देश में अब संविधान या कानून का शासन नहीं है — उन्होंने इसे बदलकर “Asim Law” (आसिम कानून) कर दिया गया है। उन्होंने आर्मी प्रमुख के शासन को “अभूतपूर्व ज़ुल्म और अन्याय” का पर्याय बताया, और कहा कि उनकी पत्नी व अन्य नेताओं के खिलाफ यह अत्याचार सत्ता के लालच की वजह से हो रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) अब किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगी और इस “कठपुतली सरकार” के साथ समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक पार्टी कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।
हालाँकि, अफवाहों का यह तानाजा शोर अभी भी बायपास नहीं हुआ है और उनके समर्थक, परिवार तथा विपक्षी नेताओं की ओर से मांग तेज है कि उन्हें या तो इमरान की कोई नई जानकारी दी जाए — चाहे वह वीडियो हो, तस्वीर हो, या फिर स्वास्थ्य प्रमाण — ताकि “प्रूफ ऑफ लाइफ” मिल सके। कासिम खान ने चेतावनी दी है कि यदि उनके पिता का कुछ भी हुआ, तो पूरी राजनीतिक और कानूनी ज़िम्मेदारी सेना प्रमुख और वर्तमान सरकार की होगी।
इस बीच, जेल प्रशासन व सरकार की ओर से जारी स्वास्थ्य व अनुरक्षण दावे, समर्थकों व परिवार की जुबानी “नो मीटिंग, नो कॉल, नो प्रूफ” की याचिका — दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम हैं। इस विवादित माहौल में न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति, बल्कि मानवाधिकार, पारदर्शिता, न्याय व जेल प्रशासन की जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दे फिर से उभर कर सामने आए हैं।
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