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Eknath Shinde targets Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना, ‘धुरंधर’ के डायलॉग से डिप्टी CM ने किया उद्धव पर ‘वार’, ‘महायुति’ को बताया ‘धुरंधर’ विपक्ष को दिया कड़ा संदेश

Eknath Shinde targets Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना

फिल्म ‘धुरंधर’ इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म के किरदार, संवाद और कहानी को दर्शकों का खासा समर्थन मिल रहा है। इसी लोकप्रियता की गूंज अब सियासत में भी सुनाई देने लगी है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए फिल्म ‘धुरंधर’ के चर्चित किरदार ‘रहमान डकैत’ का हवाला दिया और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर मुंबई को लूटने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को ‘धुरंधर’ बताते हुए विपक्ष को कड़ा संदेश दिया।

एकनाथ शिंदे ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब राज्य में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) समेत नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है। विधानसभा में ‘अंतिम सप्ताह संकल्प’ पर बहस के दौरान बोलते हुए शिंदे ने शायरी, व्यंग्य और फिल्मी संवादों के जरिए विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) को निशाने पर रखा और कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक मुंबई महानगरपालिका पर शासन किया, उन्होंने शहर के खजाने को लूटने का काम किया।

शिंदे ने फिल्म ‘धुरंधर’ के किरदार रहमान डकैत का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई के खजाने को लूटने वाले ऐसे कई लोग आए और चले गए। उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि रहमान डकैत कौन था और उसने क्या किया। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह व्यक्तिगत हमले नहीं करते, लेकिन इतिहास गवाह है कि बीएमसी पर लंबे समय तक सत्ता में रहने के दौरान कुछ लोगों ने जनता के धन का दुरुपयोग किया। शिंदे ने कहा कि धुरंधर महायुति ऐसे सभी लोगों को मुंहतोड़ जवाब देगी।

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मौजूदा महायुति सरकार सिर्फ एक ट्रेलर है और असली तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले नगर निगम चुनावों में महायुति गठबंधन की जीत तय है और यह साबित होगा कि असली धुरंधर कौन हैं। महायुति गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं, जो फिलहाल महाराष्ट्र में सत्ता में हैं।

बहस के दौरान एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की विधान परिषद में कम उपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो लोग सदन में दो घंटे भी नहीं बैठ सकते, वे लोकतंत्र और जनहित की बातें कैसे कर सकते हैं। शिंदे ने तंज कसते हुए कहा कि कुछ विधायक सत्र को पर्यटन की तरह लेते हैं और आम जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय सदन से गायब रहते हैं।

हिंदुत्व के मुद्दे पर भी शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिसने सत्ता के लिए विश्वास और विचारधारा का सौदा किया हो, वह किसी विचारधारा का सच्चा उत्तराधिकारी नहीं हो सकता। यह टिप्पणी उन्होंने शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की हिंदुत्व विरासत की ओर इशारा करते हुए की। शिंदे ने कहा कि दूसरों के बारे में बुरा बोलने से किसी का चरित्र बेहतर नहीं होता और राजनीति में सिद्धांतों का महत्व होना चाहिए।

महायुति सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए शिंदे ने शिक्षा मंत्री की तारीफ की और बताया कि सीबीएसई पाठ्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज पर 21 पन्नों का अध्याय शामिल किया गया है। उन्होंने इसे सरकार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता बताया। शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं जनता के लिए गेम-चेंजर साबित हुई हैं और इसका असर आने वाले चुनावों में साफ दिखाई देगा।

उद्धव ठाकरे द्वारा उपमुख्यमंत्री पद की संवैधानिकता पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए शिंदे ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बने थे, तब भी उन्हें गैर-संवैधानिक बताया गया और हटाने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि अब वही लोग उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से हटाने की बातें कर रहे हैं। शिंदे ने इसे राजनीतिक हताशा करार दिया।

शीतकालीन सत्र को लेकर विपक्ष पर हमला करते हुए शिंदे ने कहा कि हाल ही में समाप्त हुए सत्र के दौरान विपक्ष आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाने में पूरी तरह नाकाम रहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने विधानसभा को रात दो बजे तक चलाया, ताकि जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो सके, लेकिन विपक्ष का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा। शिंदे ने आरोप लगाया कि विपक्ष सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझा हुआ है, जबकि महायुति सरकार विकास और सुशासन पर केंद्रित है।

फिल्म ‘धुरंधर’ के संदर्भ के साथ एकनाथ शिंदे का यह राजनीतिक हमला आने वाले चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में नई धार और तीखापन जोड़ता नजर आ रहा है।

Kirti Bhardwaj

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