गहलोत का शेखावत को चैलेंज “निर्दोष हो तो सामने आओ”,जानीए पूरा मामला
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव घोटाले को लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को जोधपुर प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि शेखावत अगर वाकई निर्दोष हैं, तो उन्हें आगे आकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए बातचीत करनी चाहिए।
गहलोत ने कहा, “गजेंद्र सिंह शेखावत दो-तीन बार के सांसद हैं, वर्तमान में कैबिनेट मंत्री हैं, ये छोटी बात नहीं है। अगर वे निर्दोष हैं, तो मुझे खुशी होगी। लेकिन इसका हल तभी निकलेगा जब मैं, शेखावत, संघर्ष समिति के सदस्य और 5-7 पीड़ित एक साथ बैठें। मेरा मकसद केवल पीड़ितों की समस्या का हल है।”
गहलोत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री रहते जो दस्तावेज उनके पास आए, उसमें शेखावत के परिवार के नाम शामिल थे। इसी आधार पर शेखावत ने दिल्ली में मानहानि का केस दर्ज किया। गहलोत के मुताबिक अब तक इस केस की 15 पेशियां हो चुकी हैं। “अब शेखावत को यह केस वापस लेना चाहिए और आमने-सामने बैठकर पीड़ितों की मदद करनी चाहिए,” गहलोत ने कहा।
संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड ने निवेशकों को उच्च रिटर्न और विदेश यात्रा जैसे लालच देकर लगभग 950 करोड़ रुपये की ठगी की। 2008 में बाड़मेर से शुरू हुई इस सोसाइटी ने 237 शाखाएं खोलकर करीब डेढ़ लाख लोगों से निवेश करवाया।
निवेशकों को एजेंट बना दिया गया, और उनसे कहा गया कि वे नए निवेशक जोड़ें जिससे उन्हें कमीशन मिलेगा। इस तरह चेन सिस्टम बनाकर लोगों को जाल में फंसाया गया। लेकिन जब पैसा लौटाने की बारी आई, तो निवेशकों को ब्याज तक नहीं मिला।
जांच में सामने आया कि सोसाइटी की बहीखातों में 1100 करोड़ रुपये के ऋण दर्शाए गए हैं, जिनमें अधिकतर फर्जी नाम हैं। इस घोटाले का मास्टरमाइंड विक्रम सिंह एसओजी की गिरफ्त में है।
इन आरोपों पर गजेंद्र सिंह शेखावत ने पहले ही साफ किया है कि वह इस घोटाले से किसी तरह से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा, “गहलोत बार-बार मेरा नाम जोड़कर चरित्र हनन कर रहे हैं। उन्होंने मेरी दिवंगत मां को भी अभियुक्त बताया, जो बेहद आपत्तिजनक है। इसी कारण मैंने मानहानि का केस दायर किया।”
पूर्व सीएम गहलोत का कहना है कि अगर शेखावत वाकई निर्दोष हैं तो उन्हें पीड़ितों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, “मानहानि केस का स्वागत है, लेकिन जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह मामला खत्म नहीं होगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक और राजनीतिक मोर्चे पर भी गर्मा चुका है। आने वाले समय में यह राजस्थान की राजनीति में एक अहम मुद्दा बन सकता है।
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