हिमाचल में तबाही, 69 लोगों ने गंवाई जान, 37 लोग लापता, सीएम सुक्खू ने की घोषणा

CHANNEL4 NEWS INDIA


हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। पहाड़ों की ये आपदा सिर्फ सड़कों, पुलों और घरों को नहीं निगल रही, बल्कि राजनीतिक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का नया मंच भी बनती जा रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा से जूझते लोगों को राहत देने का बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के घर इस आपदा में पूरी तरह से टूट गए हैं, उन्हें हर महीने 5000 रुपये किराए के रूप में दिए जाएंगे, ताकि वो कहीं सुरक्षित रह सकें। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि खाने-पीने और अस्थायी ठहरने का इंतज़ाम स्थानीय प्रशासन की ज़िम्मेदारी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही कैबिनेट बैठक में विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी जाएगी।

’69 लोग जान गंवा चुके हैं और 37 लोग लापता’ 

सीएम सुक्खू ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि अभी बरसात की शुरुआत ही है और राज्य को अब तक 700 करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुकसान हो चुका है। अब तक 69 लोग जान गंवा चुके हैं और 37 लोग लापता हैं। 280 सड़कें बंद, 332 ट्रांसफॉर्मर खराब, और 784 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। यानी राज्य में आम जनजीवन पूरी तरह चरमराया हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस गंभीर स्थिति की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को दी है और राज्य को मदद देने की गुज़ारिश की है। केंद्रीय गृह मंत्री ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है और जल्द ही केंद्र सरकार की टीम राज्य में पहुंचकर नुकसान का मूल्यांकन करेगी। उम्मीद है कि केंद्र से हिमाचल को आर्थिक राहत दी जाएगी।

आपदा के वक्त हो रही राजनीति

इस भीषण आपदा के बीच राजनीतिक तकरार भी तेज़ हो गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उनका फोन नहीं उठा रहे। इस पर सुक्खू का पलटवार आया —”ये सरासर झूठ है, कल ही उनसे बात हुई है।” सीएम ने साफ कहा कि इस वक्त राजनीति नहीं, राहत की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि जयराम ठाकुर को मंडी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की बजाय ग्राउंड पर जाकर लोगों की मदद करनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस बार एक साथ कई इलाकों में बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जो चिंता का विषय हैं।

सरकार राहत देने की कोशिश में जुटी

सरकार इन घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करवा रही है, ताकि आगे बेहतर प्रबंधन किया जा सके।हिमाचल आज एक अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। सरकार राहत देने की कोशिश में जुटी है, लेकिन विपक्ष इस पर राजनीति का तड़का लगा रहा है। ऐसे वक्त में जनता को तात्कालिक मदद, पारदर्शिता और तेजी से काम चाहिए।राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि जनता को नेता नहीं, राहत चाहिए।फीते काटने और बयान देने से हालात नहीं सुधरते, ग्राउंड पर काम करने से होता है।मुख्यमंत्री सुक्खू का यह ऐलान राहत देने वाला जरूर है, लेकिन उसे समय पर लागू करना और सही तरीके से लोगों तक पहुंचाना सबसे अहम होगा। अब देखना यह है कि सियासी बयानबाज़ी से ऊपर उठकर, सब मिलकर हिमाचल को इस आपदा से उबार पाएंगे या नहीं?

 

Rupesh Jha

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