हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के वित्त (पेंशन) विभाग ने एक नया आदेश जारी करते हुए कहा है कि 15 मई 2003 या उससे पहले विज्ञापित पदों पर भर्ती हुए कर्मचारियों को अब पुरानी पेंशन योजना (OPS) चुनने का मौका दिया जाएगा।
सरकार के अनुसार, जिन कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया 15 मई 2003 या उससे पहले शुरू हुई थी, लेकिन उनकी नियुक्ति बाद में हुई और वे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के दायरे में आ गए, वे अब एक बार के विशेष विकल्प के तहत OPS का लाभ ले सकते हैं।
वित्त विभाग के आदेश के मुताबिक, पात्र कर्मचारी 31 अक्टूबर 2026 तक पुरानी पेंशन योजना चुनने का विकल्प दे सकते हैं। यदि कोई कर्मचारी तय समय सीमा तक आवेदन नहीं करता है, तो वह पहले की तरह NPS के तहत ही बना रहेगा। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि एक बार OPS या NPS का जो विकल्प चुना जाएगा, उसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा। संबंधित विभाग पात्रता की जांच के बाद 31 दिसंबर 2026 तक अंतिम आदेश जारी करेंगे।
जिन कर्मचारियों का आवेदन मंजूर हो जाएगा, उनके NPS खाते 28 फरवरी 2027 से बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद NPS में जमा कर्मचारी और सरकार के अंशदान सहित निवेश से हुई आय को तय नियमों के अनुसार समायोजित किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना अपनाएंगे, उन्हें जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। यानी OPS का लाभ लेने के साथ-साथ उन्हें GPF खाते में भी योगदान देना होगा।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू रहने के दौरान शुरू हुई थी, लेकिन नियुक्ति में देरी होने के कारण वे नई पेंशन योजना (NPS) के तहत आ गए थे। अब ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ लेने का अवसर मिलेगा।
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