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कांग्रेस उम्मीदवार ने लौटाया टिकट, ज्ञायक पाटनी के टिकट में फंसा पेंच

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की आहट तेज होती जा रही है, जिसमें सीटों और उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक हलचल जारी है। शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी तीन घोषित सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इस स्थिति ने सपा के विधायक अबू आजमी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि नवाब मलिक ने उनकी सिटिंग सीट पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।

कांग्रेस खेमे में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्टी ने सचिन सावंत को अंधेरी वेस्ट से उम्मीदवार बनाया है, लेकिन सावंत ने इस सीट से लड़ने से मना कर दिया है। वे बांद्रा ईस्ट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें अंधेरी वेस्ट से टिकट दिया है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल बन सकता है। इसके अलावा, कांग्रेस ने बांद्रा वेस्ट से आसिफ जकारिया को उम्मीदवार बनाया है, जो बीजेपी के आशीष शेलार के खिलाफ मुकाबला करेंगे। अमरावती में हेमंत चिमोते को टिकट दिया गया है, जबकि भिवंडी वेस्ट से दयानंद चोरघे को मैदान में उतारा गया है। शरद पवार ने भी एनसीपी में आए ज्ञायक पाटनी को टिकट देने का आश्वासन दिया है।

सपा की स्थिति भी अच्छी नहीं दिख रही है। अबू आजमी ने एमवीए से 5 सीटें मांग की थीं, लेकिन शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने उनकी 3 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। भिवंडी पूर्व से सपा के रईस शेख विधायक हैं, लेकिन शिवसेना ने धुले सिटी से पूर्व विधायक अनिल गोटे को टिकट दे दिया। कांग्रेस ने मालेगांव सेंट्रल से एजाज बेग और भिवंडी वेस्ट से दयानंद चोरघे को अपना प्रत्याशी बनाया। इस प्रकार, सपा की सीटों पर सहयोगी दलों ने उन्हें धोखा दिया है, जिससे अबू आजमी की चुनौती बढ़ गई है।

अबू आजमी ने ऐलान किया है कि यदि उन्हें 5 सीटें नहीं मिलीं, तो वे पूरी 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लेंगे। इससे उनकी राजनीतिक रणनीति में एक नई दिशा आ सकती है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखनी होगी। इस चुनाव में एमवीए के भीतर खींचतान की संभावना बढ़ती जा रही है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

बता दें कि, इस चुनावी दंगल में शिवसेना और कांग्रेस की रणनीतियाँ स्पष्ट हैं, जबकि सपा की स्थिति संकट में है। अबू आजमी के लिए यह चुनौती केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की मजबूती बनाए रखने की भी है। चुनावी मैदान में उतरे इन सभी दलों की दृष्टि आगामी चुनाव परिणामों पर टिकी हुई है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी इस चुनावी महासमर में जीतती है।

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