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देश के लिए खतरा बने अवैध बांग्लादेशी, सैफ पर हुए हमले के बाद बढ़ी चिंता

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हमले के बाद अब ये सवाल उठने लगा है कि क्या भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी देश के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। दरअसल सैफ अली खान पर हमले का आरोपी बांग्लादेशी घुसपैठिया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ये पता चला है। ऐसे में बांग्लादेश से हो रही हमारे देश में अवैध घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। जो देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक है। सैफ अली खान के हमलावर का नाम पहले विजय दास बताया जा रहा था, लेकिन ये एक फर्जी नाम था। उसका असली नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है। वो एक बांग्लादेशी घुसपैठिया है। जो पिछले 6 महीने से मुंबई में साफ-सफाई का काम कर रहा था। लेकिन सुरक्षा ऐजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। हमलावर के पास कोई भी भारतीय पहचान पत्र नहीं था। उसने कोलकाता में जहांगीर शेख के नाम पर एक सिम कार्ड लिया था। इसका ये इस्तेमाल कर रहा था। अगर शरीफुल इस्लाम सैफ पर हमला नहीं करता तो किसी को भनक तक नहीं लगती और वो भारत का कुछ दिन बाद भारत का नागरिक बन जाता और धीरे-धीरे अपने परिवार को भी यहीं बसा लेता। अब सवाल सरकार पर उठता है कि आखिर अवैध बांग्लादेशियों पर लगाम क्यों नहीं लगा पा रही।

खतरा बन रहे अवैध बांग्लादेशी

बता दें कि सैफ अली खान पर हुआ हमला, कोई मामूली वारदात नहीं है। अगर एक बांग्लादेशी घुसपैठिया, सैफ के घर में घुसकर हमला कर सकता है, तो हमारे और आपके घरों पर भी हमला हो सकता है। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ, हमारे देश के लिए एक बड़ा खतरा है। क्योंकि अवैध घुसपैठिए बड़ी ही आसानी से सीमा पार करके भारत चले आते हैं। फिर फर्जी पहचान पत्र बनवाकर, फर्जी नामों से रहने लगते हैं। वो कोई भी हो सकते हैं, वो आपकी मेड हो सकती है, आपका ड्राइवर हो सकता है या फिर आपका माली हो सकता है। ना जाने कितने ही अवैध बांग्लादेशियों ने हिंदू नामों से पहचान पत्र बनवाए होंगे। दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में बसे होंगे।

 

सीमा पर कंटीले तार लगाए जाने जरूरी

बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीत करीब 4,096 किलोमीटर लंबा बॉर्डर है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर जंगल, पहाड़ और नदियों के बीच से गुजरता है। हमारे देश के पांच राज्य पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की सीमाएं बांग्लादेश से जुड़ी हुई हैं। बांग्लादेश, भारत के साथ सबसे लंबी सीमा साझा करता है। हांलाकि केंद्र सरकार ने अवैध बांग्लादेशियों को रोकने के लिए कई प्रयास किए हैं। गृहमंत्रालय के मुताबिक बांग्लादेश से लगती 3 हजार 141 किलोमीटर सीमा पर कंटीले तार लगाए गए हैं। लेकिन भारत-बांग्लादेश के बीच करीब 950 किलोमीटर की सीमा अभी पूरी तरह से खुली है। इसमें 900 किलोमीटर की सीमा नदियों से जुड़ी हैं। ऐसी जगह पर फेंसिंग का काम बहुत मुश्किल है। अब सवाल ये भी है कि सरकार इन अवैध बांग्लादेशियों पर एक्शन क्यों नहीं लेती। सबसे पहला राजनीतिक कारण ही नजर आता है। क्योंकि अगर सरकार एक्शन ले भी तो कई राजनीतिक दल इसका विरोध करेंगे ये राजनीतिक दल माने बैठे हैं कि अगर अवैध बांग्लादेशियों को निकालने की पहल की गई तो भारत के मुस्लिम नाराज हो जाएंगे और इससे उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान होगा। अभी जब दिल्ली में बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान का अभियान चला तो कई दलों ने किंतु-परंतु के साथ यही कहने की कोशिश की कि यह केवल चुनावी स्टंट है।

 

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