BIHAR DOMOCILE POLICY: डोमिसाइल नीति को लेकर CM नीतीश कुमार की नई घोषणा
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासत तेजी से गरमाती जा रही है। डोमिसाइल नीति (BIHAR DOMOCILE POLICY) को लेकर CM नीतीश कुमार की नई घोषणा पर अब विपक्ष ने सरकार को घेर लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखा सवाल उठाते हुए पूछा – “नीतीश जी, विपक्ष का डर कैसा लग रहा है?” उन्होंने दावा किया कि, ये सब उनकी पार्टी की घोषणाओं की नकल है, और NDA सरकार के पास खुद की कोई नीति नहीं बची है।
तेजस्वी ने कहा कि, एक समय जो सरकार डोमिसाइल नीति(BIHAR DOMOCILE POLICY) को सिरे से खारिज करती थी, अब वही उसे लागू कर रही है, सिर्फ इसलिए क्योंकि यह बात हमने उठाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली की फ्री यूनिट, सरकारी नौकरी, रसोइयों और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि, युवा आयोग और एक करोड़ रोजगार जैसे उनके प्रस्तावों की भी नकल की है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि, 20 सालों की थकी-हारी NDA सरकार अब केवल हमारी घोषणाओं की नकल करने में लगी है। सरकार की खुद की कोई दृष्टि है, न कोई योजना। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता(BIHAR DOMOCILE POLICY) भी यह देख रही है कि कैसे ये सत्ताधारी दल विपक्ष की बातों पर ही नाच रहे हैं।
इस बीच तेजस्वी यादव ने एक और मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि उनके नाम से दो अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड (EPIC नंबर) जारी हुए हैं। हालांकि EC ने यह साफ कर दिया है कि उनका EPIC नंबर बदला नहीं गया है। पटना के दीघा थाने में इस संबंध में एक स्थानीय नागरिक ने शिकायत भी दर्ज कराई है।
पुलिस ने बताया कि शिकायत को जिला निर्वाचन कार्यालय को भेज दिया गया है, जहां से निर्देश मिलने पर प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। आयोग ने तेजस्वी से उस वोटर आईडी को सौंपने के लिए कहा है, जिसका वे दावा कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में कांग्रेस भी मैदान में उतर आई है।
पार्टी प्रवक्ता प्रणव झा ने निर्वाचन आयोग पर NDA सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि, बिहार में वोटर लिस्ट के SIR के नाम पर लाखों गरीब और वंचित लोगों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।
प्रणव झा ने आरोप लगाया कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के उस सुझाव को भी नकार दिया जिसमें आधार कार्ड को वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने की बात कही गई थी।
उन्होंने इसे एक “साजिश” बताया, ताकि BJP और JDU को चुनाव में फायदा मिल सके।कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि बिहार की जनता इस अन्याय को देख रही है और विधानसभा चुनाव में BJP-JDU गठबंधन को इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि, सरकार और चुनाव आयोग राज्य के लोगों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि, मोदी सरकार को न तो न्यायपालिका पर भरोसा है और न ही भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) पर… यही वजह है कि चुनाव आयोग की नियुक्ति करने वाली समिति से CJI को हटा दिया गया। ये लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
बिहार में डोमिसाइल नीति और चुनाव आयोग से जुड़ी घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। विपक्ष जहां इसे अपनी जीत मान रहा है, वहीं सरकार पर लगातार नकल और डर का आरोप लगाया जा रहा है। दूसरी ओर, EC भी विपक्ष के निशाने पर आ गया है। ये साफ है कि, आने वाले चुनाव से पहले बिहार की सियासत में घमासान और भी तेज़ होने वाला है।
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