Big decision of Maharashtra cabinet: महाराष्ट्र कैबिनेट का बड़ा फैसला
महाराष्ट्र में आगामी लोकल बॉडी चुनावों से पहले राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों से जुड़े कानून में बदलाव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के तहत चुनावी प्रक्रिया में आ रही कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए एक ऑर्डिनेंस लाने का निर्णय लिया गया है, ताकि ग्रामीण स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनाव तय समय पर कराए जा सकें।
कैबिनेट ने महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति एक्ट, 1961 में संशोधन को हरी झंडी दे दी है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब राज्य में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव लंबे समय से लंबित हैं और सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए सरकार पर दबाव बना हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव बिना किसी कानूनी रुकावट के समय पर पूरे हो सकें।
मौजूदा कानून के तहत एक्ट के सेक्शन 14(2) में यह प्रावधान था कि यदि किसी उम्मीदवार का नॉमिनेशन पेपर चुनाव अधिकारी द्वारा स्वीकार या खारिज किया जाता है, तो उसके खिलाफ संबंधित जिला अदालत में अपील की जा सकती है। व्यवहार में यह प्रावधान चुनाव प्रक्रिया के लिए बड़ी बाधा बन गया था। कई मामलों में उम्मीदवारों द्वारा दायर अपीलें अलग-अलग जिला अदालतों में लंबित रहीं, जिससे चुनाव प्रक्रिया लंबे समय तक अटक जाती थी और निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराना संभव नहीं हो पाता था।
इन्हीं व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए राज्य चुनाव आयोग ने सरकार को इस प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव दिया था। आयोग का मानना था कि नॉमिनेशन को लेकर अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाइयों के चलते लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। राज्य सरकार ने आयोग के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कानून में संशोधन का फैसला किया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब एक अध्यादेश के जरिए यह बदलाव लागू किया जाएगा। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में नॉमिनेशन पेपर को स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय पूरी तरह चुनाव अधिकारी का होगा और उसका फैसला अंतिम माना जाएगा। इसके खिलाफ किसी भी जिला अदालत में अपील की अनुमति नहीं होगी। साथ ही इस संशोधन के तहत राज्य सरकार को इन चुनावों के संचालन से जुड़े नियम बनाने का अधिकार भी दिया जाएगा।
इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार, पूरे महाराष्ट्र में फैली 336 पंचायत समितियों और 32 जिला परिषदों के चुनाव 31 जनवरी तक कराना अनिवार्य है। सरकार का मानना है कि यदि नॉमिनेशन को लेकर अदालती अपीलों का रास्ता खुला रहता है, तो इतनी बड़ी संख्या में चुनाव तय समयसीमा में कराना मुश्किल हो सकता है।
कैबिनेट बैठक में सिर्फ चुनावों से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर भी एक अहम निर्णय लिया गया। बैठक में राज्य के किलों, गढ़ों और अन्य राज्य-संरक्षित स्मारकों पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने और हटाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन को मंजूरी दी गई।
इस निर्णय के तहत संस्कृति मंत्री की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति राज्य के सभी किलों और संरक्षित स्मारकों पर अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस कदम उठाएगी और भविष्य में इस तरह के अतिक्रमण को रोकने की रणनीति भी तैयार करेगी। इसके लिए संस्कृति विभाग से जुड़े पिछले सरकारी निर्णय के दायरे को बढ़ा दिया गया है, ताकि अब सिर्फ किले और गढ़ ही नहीं, बल्कि सभी राज्य-संरक्षित स्मारक इस नीति के तहत आएं।
इस समिति में संस्कृति मंत्री के अलावा राजस्व मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, पर्यटन मंत्री, लोक निर्माण मंत्री, वन मंत्री और बंदरगाह एवं विकास मंत्री को भी सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही संबंधित विभागों के सचिव, प्रधान सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव भी समिति का हिस्सा होंगे। इस बहु-विभागीय समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्मारकों से जुड़े मामलों में समन्वित और प्रभावी कार्रवाई हो सके।
सरकार का मानना है कि महाराष्ट्र में ऐतिहासिक किलों और स्मारकों की संख्या काफी अधिक है और ये राज्य की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। अतिक्रमण के चलते न सिर्फ इन स्मारकों की ऐतिहासिक संरचना को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पर्यटन की संभावनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में एक सशक्त और अधिकार संपन्न समिति के जरिए इस समस्या से निपटने की योजना बनाई गई है।
कैबिनेट के इन दोनों फैसलों को राज्य प्रशासन और राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ जहां जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों को समय पर कराने की दिशा में सरकार ने कानूनी अड़चनें दूर करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए प्रशासनिक ढांचा मजबूत करने का कदम उठाया गया है। इन फैसलों का असर आने वाले समय में राज्य की ग्रामीण राजनीति और सांस्कृतिक संरक्षण नीति दोनों पर देखने को मिल सकता है।
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