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Babri Masjid in Murshidabad: मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास, कोलकाता ब्रिगेड ग्राउंड में पांच लाख लोगों का सामूहिक गीता पाठ, धार्मिक आयोजन पर राजनीतिक चर्चा तेज

Babri Masjid in Murshidabad: मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में इस सप्ताहांत एक बड़ा धार्मिक आयोजन सुर्खियों में है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड ग्राउंड में रविवार को होने वाला सामूहिक गीता पाठ अपनी विशालता और आयोजकों की तैयारियों के कारण राज्यभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सनातन संस्कृति संसद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 5 लाख लोगों और 150 से अधिक संतों के शामिल होने की संभावना है। बड़े पैमाने पर हो रहे इस आयोजन को लेकर धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

इस कार्यक्रम से एक दिन पहले मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हिमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया गया, जिसने पहले ही माहौल को गर्म कर दिया था। उसी पृष्ठभूमि में रविवार का सामूहिक गीता पाठ और भी अधिक चर्चा में है। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन पूरी तरह धार्मिक है और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। लेकिन राज्य में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक इसे अलग नजरिए से भी देख रहे हैं।

गीता पाठ सुबह 9 बजे शुरू होकर दोपहर 12:30 बजे तक चलेगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ज्ञानानंद महाराज होंगे। उनके साथ बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, पद्म भूषण प्राप्त साध्वी ऋतंभरा और योग गुरु बाबा रामदेव भी मौजूद रहेंगे। इन्हें देशभर में बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक प्रभाव वाले व्यक्तियों के रूप में माना जाता है। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्व देती है

सनातन संस्कृति संसद के सचिव निर्गुणानंद महाराज ने जानकारी दी कि यह कार्यक्रम अपने पैमाने की वजह से ऐतिहासिक होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि पांच लाख लोगों का एक साथ गीता पाठ करना अपने आप में एक अनोखी आध्यात्मिक घटना होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले संतों को उनके महत्व और पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार बैठाया जाएगा। गीता पाठ समाप्त होने के बाद कई प्रमुख वक्ता अपना विचार व्यक्त करेंगे।

ब्रिगेड ग्राउंड में कार्यक्रम के लिए तीन बड़े स्टेज बनाए गए हैं। मेन स्टेज के दोनों ओर दो-दो साइड स्टेज स्थापित किए गए हैं। देशभर से आने वाले बड़े संत मेन स्टेज पर होंगे और वहीं से गीता पाठ का संचालन किया जाएगा। राज्य के प्रमुख संत साइड स्टेज पर बैठेंगे। मेन स्टेज के सामने एक छोटा सांस्कृतिक मंच भी बनाया गया है, जहां गीता पाठ शुरू होने से पहले तीन भजनों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए विशेष सुरक्षा, प्रवेश मार्ग, निकास सुविधाएं और चिकित्सा केंद्रों की व्यवस्था की गई है।

इस कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में राजनीतिक संदर्भ भी मौजूद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी इसी तरह का एक बड़ा सामूहिक गीता पाठ आयोजित किया गया था, जिसने उस समय काफी चर्चा बटोरी थी। अब 2026 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक बार फिर इतना बड़ा धार्मिक आयोजन किए जाने को लेकर विभिन्न राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। हालांकि आयोजक लगातार यह दावा कर रहे हैं कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि केवल धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल का ब्रिगेड ग्राउंड लंबे समय से बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों, सभाओं और रैलियों का केंद्र रहा है। यही कारण है कि यहां होने वाले प्रत्येक कार्यक्रम को अक्सर राजनीतिक चश्मे से भी देखा जाता है। लेकिन आयोजकों की ओर से यह आग्रह किया जा रहा है कि इस कार्यक्रम को केवल आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए, क्योंकि इसका मुख्य लक्ष्य लोगों में गीता के संदेश और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रसार करना है।

राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक जमीन को देखते हुए इतना बड़ा धार्मिक आयोजन निश्चित रूप से जनमानस पर प्रभाव डालता है। चुनावी वर्ष के करीब होने के कारण यह कार्यक्रम विभिन्न राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का कारण बना हुआ है। हालांकि यह भी सच है कि बंगाल में धार्मिक-सांस्कृतिक सभाओं की लंबी परंपरा रही है और कई बार ऐसे कार्यक्रमों का सीधा राजनीतिक प्रभाव नहीं होता

कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से भी व्यापक तैयारी की गई है। सुरक्षा के लिए हजारों पुलिस कर्मियों की तैनाती, ट्रैफिक रूट में बदलाव, पार्किंग की व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियां की गई हैं ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो और भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।

यह आयोजन अपने पैमाने, धार्मिक तीव्रता और बड़े संतों की उपस्थिति के कारण बंगाल ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। आयोजकों का दावा है कि उनका उद्देश्य समाज में धार्मिक सद्भाव और गीता के संदेश को बढ़ावा देना है, जबकि विश्लेषक इस घटना के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर भी निगाह रखे हुए हैं।

Ritika Bhardwaj

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