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Secret meeting of LeT-JeM in Bahawalpur: बहावलपुर में LeT–JeM की गुप्त बैठक से भारत सतर्क, महिला जिहादियों की मौजूदगी बढ़ा रही चिंता

Secret meeting of LeT-JeM in Bahawalpur: बहावलपुर में LeT–JeM की गुप्त बैठक से भारत सतर्क

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान के बहावलपुर में हुई एक संदिग्ध बैठक के बाद हाई अलर्ट जारी कर दिया है। यह बैठक धार्मिक जलसे की आड़ में आयोजित की गई, जिसमें पाकिस्तान के दो कुख्यात आतंकी संगठनों—लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM)—के शीर्ष सरगनाओं की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है। विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के मिलने की खबर ने भारतीय खुफिया तंत्र को सतर्क कर दिया है।

बहावलपुर को मसूद अजहर का गढ़ माना जाता है, और अक्सर उसे यहीं देखा गया है। जिस जलसे का आयोजन शनिवार को हुआ, उसका नाम ‘सीरत-ए-नबी (PBUH) और सहीह बुखारी’ बताया जा रहा है। यह कार्यक्रम जामिया उम्म अब्दुल अजीज, तौहीद चौक, अहमदपुर ईस्ट में आयोजित हुआ। सतह पर भले यह धार्मिक आयोजन दिखाई दिया हो, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट बताते हैं कि इस जलसे में कई आतंकी समर्थक और संगठन से जुड़े लोग शामिल थे। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें महिला जिहादियों की भागीदारी की भी बात सामने आई है, जो भविष्य की आतंकी रणनीति में महिलाओं की सक्रिय भूमिका की ओर संकेत करती है।

सैफुल्लाह कसूरी की बहावलपुर यात्रा को भारतीय खुफिया एजेंसियां बेहद संदेह की नजर से देख रही हैं। यह वही व्यक्ति है जो कई बड़े आतंकी ऑपरेशनों की साजिश रचने में शामिल रहा है। बताया जाता है कि कश्मीर, जम्मू और भारत के अन्य हिस्सों में हुए कई हमले उसी की प्लानिंग का हिस्सा रहे हैं। पहलगाम हमले से पहले भी कसूरी ने बहावलपुर में मसूद अजहर से मुलाकात की थी और उसे ऑपरेशन की पूरी जानकारी दी थी। इस पृष्ठभूमि में अब हुई नई मुलाकात को सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे के रूप में देख रही हैं।

कसूरी और मसूद अजहर के बीच हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को लेकर सतर्क है। पिछले महीनों में आतंकियों द्वारा टारगेटेड हमले, IED प्लांटिंग और सीमा पार से घुसपैठ में अचानक वृद्धि देखी गई है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन भारत में आतंकी ढांचे को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियों के पास यह इनपुट है कि LeT और JeM मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन की रणनीति तैयार कर रहे हैं। दोनों संगठनों के शीर्ष कमांडरों का मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है और जब भी ऐसा होता है, उसकी परिणति भारत के खिलाफ किसी बड़े मॉड्यूल की साजिश के रूप में सामने आती है। इसलिए भारतीय सुरक्षा तंत्र ने तुरंत सीमा क्षेत्रों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। विशेषकर पंजाब, जम्मू, राजस्थान और गुजरात की सीमाओं पर निगरानी और सुरक्षा चक्र को और मजबूत किया गया है।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां आतंकी संगठनों की बदलती रणनीति को दिखाती हैं। पहले जहां आतंकवादी केवल हथियारबंद लड़ाकों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब महिलाओं को भी कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जा रही है। महिला जिहादियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि आतंकी संगठन भविष्य में ऐसे मॉड्यूल तैयार कर सकते हैं जिन्हें पकड़ पाना और पहचानना सुरक्षा एजेंसियों के लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस बैठक की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय और गृह मंत्रालय को भी विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), सैन्य खुफिया और राज्य पुलिस बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सीमा क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है और ड्रोन निगरानी भी तेज कर दी गई है। इसी के साथ, एजेंसियां उन मॉड्यूल्स और स्लीपर सेल्स पर भी शिंकजा कसने की कोशिश कर रही हैं जो किसी नई साजिश का हिस्सा बन सकते हैं।

पाकिस्तान में धार्मिक कार्यक्रमों की आड़ में आतंकी बैठकों का आयोजित होना नया नहीं है, लेकिन इस बार जिस तरह से महिला जिहादियों की उपस्थिति सामने आई है, उसने सुरक्षा तंत्र को और सतर्क कर दिया है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि आतंकी संगठन अपनी रणनीति बदल रहे हैं और भारत के खिलाफ “हाइब्रिड टेररिज़्म” का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं—जहां महिलाएं, साधारण दिखने वाले लोग और लोकल सपोर्ट सिस्टम का उपयोग कर आतंकी कार्रवाइयां की जा सकें।

भारतीय एजेंसियां अब हर तरह की गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और पाकिस्तान की आतंकी संरचना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिशें भी तेज की हैं। लेकिन आतंकी संगठन लगातार अपने तरीके बदलकर फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं।

इस समय सुरक्षा एजेंसियों का पूरा ध्यान सीमा पार की हर गतिविधि को समझने, संभावित मॉड्यूल्स को पकड़ने और भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी षड्यंत्र को समय रहते नाकाम करने पर केंद्रित है।

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