मरने से पहले अतुल सुभाष ने वीडियो जारी किया था। - फोटो : सोशल मीडिया।
बिहार के समस्तीपुर जिले के निवासी, इंजीनियर अतुल सुभाष की मौत ने उनके परिवार और समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। बेंगलुरु में आत्महत्या करने वाले अतुल सुभाष के सुसाइड के बाद उनके परिवार ने दहेज कानून को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दहेज कानून की एकतरफा प्रकृति ने उनके बेटे की जान ली, और यह घटना पुरुषों के खिलाफ भेदभाव को उजागर करती है।
अतुल सुभाष ने मरने से पहले एक वीडियो और पत्र सोशल मीडिया पर जारी किया था, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए अपने ससुराल वालों को जिम्मेदार ठहराया। वीडियो में, उन्होंने बताया कि वह अपनी पत्नी, सास, साले और चचेरे ससुर से लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित हो रहे थे। उन्होंने लिखा कि उनके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।
अतुल ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि उनकी पत्नी और सास उन्हें आत्महत्या करने के लिए उकसाती थीं। उन्होंने उल्लेख किया कि उनकी सास उन्हें यह कहती थी कि “तुमने अब तक आत्महत्या क्यों नहीं की? तुम्हारे मरने के बाद मेरी बेटी का सबकुछ होगा। तुम्हारे माता-पिता भी जल्दी मर जाएंगे, और तुम्हारा पूरा परिवार कोर्ट के चक्कर काटेगा।” अतुल ने यह भी लिखा कि उसने उस वक्त जवाब दिया था कि अगर वह मर जाएगा तो परिवार की पार्टी कैसे चलेगी, लेकिन अब वह इस दुखद परिस्थिति से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं देख रहा था।
अतुल के परिवार का कहना है कि दहेज कानून ने उनके बेटे की जिंदगी को नष्ट कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून केवल महिलाओं के लिए है और पुरुषों के खिलाफ एकतरफा भेदभाव करता है। अतुल के चचेरे भाई बजरंग प्रसाद ने कहा कि यह घटना दहेज कानून की विकृतियों को उजागर करती है और यह एक बड़ी सामाजिक और कानूनी समस्या है। उनका कहना था, “सरकार को अब जागना होगा और दहेज कानून में सुधार लाना होगा, ताकि किसी और को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।”
अतुल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि उनकी मौत के बाद उनके शव के पास उनकी पत्नी या ससुरालवालों को न आने दिया जाए। उन्होंने यह मांग की कि उनकी अस्थियों का विसर्जन तब तक न किया जाए जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और उनके माता-पिता को झूठे आरोपों से बरी नहीं किया जाता।
अतुल के पत्र में एक और गंभीर आरोप था, जिसमें उन्होंने एक जज पर आरोप लगाया कि उसने उनसे पांच लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी, ताकि उनका केस रफा-दफा किया जा सके। अतुल ने लिखा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उनकी अस्थियों को कोर्ट के बाहर गटर में बहा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस जज की शिकायत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में करेंगे। अतुल का यह पत्र न केवल उनके व्यक्तिगत दर्द और संघर्ष को उजागर करता है, बल्कि यह एक बड़ा सवाल भी उठाता है कि क्या न्यायिक प्रणाली में ऐसी घटनाओं का इलाज हो रहा है या नहीं।
अतुल की मौत के बाद उनके परिवार के सदस्य गुस्से और दुख के मिश्रित भावनाओं में हैं। उनके परिवार का कहना है कि अतुल की आत्महत्या का कारण केवल दहेज कानून का एकतरफा रूप है, जिसने उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया और आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। वे मानते हैं कि यदि यह कानून पुरुषों के लिए भी न्यायपूर्ण होता, तो अतुल को इस तरह का कदम उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
अतुल के परिवार ने बेंगलुरु में पुलिस से न्याय की मांग की है और पुलिस ने अब उनकी पत्नी और ससुराल वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह देखने की कोशिश कर रही है कि दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोप कितने सही हैं। इस मामले में अब तक पुलिस ने कोई ठोस आरोप नहीं लगाए हैं, लेकिन यह मामला समाज में दहेज कानून की संजीदगी को लेकर एक गंभीर बहस का विषय बन गया है।
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