महिला आरक्षण बिल पर बदले अखिलेश यादव के सुर,PM मोदी ने बताया था ‘दोस्त अखिलेश’

करीब तीन महीने पहले संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने थे। उस समय समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बिल का खुलकर विरोध किया था। लेकिन अब मानसून सत्र से पहले उनका रुख कुछ बदला हुआ दिखाई दे रहा है। अखिलेश यादव ने संकेत दिए हैं कि अगर सरकार उनकी कुछ अहम मांगें मान लेती है तो उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करने पर विचार कर सकती है।

हाल ही में महिला संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े एक प्रतिनिधिमंडल ने अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से अलग करते हुए जल्द लागू किया जाए। साथ ही समाजवादी पार्टी से संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर महिलाओं का समर्थन करने की अपील की गई।

बैठक के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए महिला आरक्षण का समर्थन किया, लेकिन इसके साथ तीन अहम शर्तें भी सामने रखीं। उनका कहना है कि महिला आरक्षण सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राज्यसभा और विधान परिषद जैसी संस्थाओं में भी लागू किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण में उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की। तीसरी शर्त यह रखी कि उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण को 2027 के विधानसभा चुनाव से ही लागू किया जाए।

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में जब केंद्र सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को संसद में लाना चाहती थी, तब समाजवादी पार्टी ने विपक्ष के साथ मिलकर इसका विरोध किया था। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा था कि “अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, कभी-कभी हमारी मदद भी कर देते हैं।” हालांकि उस समय सपा ने सरकार का साथ नहीं दिया और बिल का समर्थन नहीं किया।

अब माना जा रहा है कि बदलते राजनीतिक हालात के बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सरकार सपा की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाती है तो महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बन सकती है।

क्या हैं समाजवादी पार्टी की तीन प्रमुख मांगें?
महिला आरक्षण लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा और विधान परिषद में भी लागू किया जाए।
पिछड़े वर्ग, दलित और मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण में उचित हिस्सेदारी मिले।
उत्तर प्रदेश में महिला आरक्षण की व्यवस्था 2027 के विधानसभा चुनाव से लागू की जाए।

क्यों बदला सपा का रुख?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में देश की राजनीति में कई बड़े बदलाव हुए हैं। विपक्षी दलों की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही है, जबकि एनडीए की ताकत बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह विरोध की राजनीति से बचना चाहती है।

साथ ही 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी अब ज्यादा दूर नहीं हैं। ऐसे में सपा महिलाओं और पिछड़े वर्ग के वोटरों के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रही है। इसलिए पार्टी ने सीधे विरोध करने के बजाय अपनी शर्तों के साथ समर्थन का रास्ता चुना है।

admin

Recent Posts

2027 से पहले बड़ा सियासी उलटफेर? SAD-BJP गठबंधन की फिर वापसी के संकेत

पंजाब की राजनीति में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक उलटफेर…

15 hours ago

मध्य प्रदेश: नागपुर-बैतूल हाइवे पर ट्रक के पीछे घुसी अनियंत्रित कार

बैतूल-नागपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुलताई के पास शनिवार तड़के करीब 3:30 बजे भीषण सड़क हादसा…

15 hours ago

सिंगापुर में भारतीय मूल के कारोबारी को दिवालिया घोषित किया गया, 407 प्रवासी श्रमिकों की सैलरी बकाया

सिंगापुर में एक प्रवासी भारतीय नागरिक और कई कंपनियों के निदेशक को यहां दिवालिया घोषित…

15 hours ago

BCI की प्रेस कॉन्फ्रेंस सोमवार तक टली, मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग के बीच बड़ा अपडेट

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने शनिवार को होने वाली अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को सोमवार…

15 hours ago

राशिफल 22 अगस्त 2026: मेष से मीन तक जानें आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

22 अगस्त 2026 का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग परिणाम लेकर आएगा। किसी…

19 hours ago

यूरोप क्यों बन रहा है दुनिया का ‘हॉट जोन’? जानिए हीटवेव के पीछे की 6 बड़ी वजहें

यूरोप इन दिनों सिर्फ गर्म नहीं हो रहा, तप रहा है। तापमान के रिकॉर्ड टूट…

19 hours ago