कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। उनका यह दौरा जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामले की जांच की स्थिति जानने को लेकर था। राहुल गांधी पैलेट गन से घायल हुए पीड़ित साहिल लोहबच को भी अपने साथ लेकर पहुंचे।
राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही मीडिया से भी बात करेंगे।
दरअसल, 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। यह आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था और बाद में उनके इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को समाप्त हुआ।
पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती और पुलिसकर्मियों पर हुई हिंसा की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी गठित की है।
इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। कमेटी में पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड डीजीपी एल.आर. बिश्नोई को शामिल किया गया है।
कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया या नहीं। इसमें पैलेट गन के कथित इस्तेमाल की भी जांच होगी। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिसकर्मियों के साथ की गई हिंसा की घटनाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
अब राहुल गांधी के थाने पहुंचने के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में आ गया है। फिलहाल पुलिस की जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट पर सभी की नजरें हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जिम्मेदारी किसकी तय होती है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
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