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कुलदीप यादव

भारतीय क्रिकेट टीम के चाइनामैन स्पिनर कुलदीप यादव एक बार फिर टीम चयन को लेकर चर्चा में हैं। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। खास बात यह रही कि मैच की पिच स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जा रही थी। ऐसे में उम्मीद थी कि कुलदीप को मौका मिलेगा, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा नहीं जताया। इसके बाद क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठने लगा कि अगर ऐसी परिस्थितियों में भी कुलदीप नहीं खेलेंगे, तो उन्हें मौका आखिर कब मिलेगा।

कुलदीप यादव कई सालों से भारतीय टीम का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें लगातार खेलने का मौका बहुत कम मिला है। अक्सर ऐसा देखने को मिला कि उनका नाम टीम में तो होता है, लेकिन अंतिम एकादश में जगह नहीं मिलती। इसी वजह से उनके घरेलू मैचों की संख्या भी दूसरे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम है। लंबे समय तक टीम के साथ रहने के बावजूद वे कई मुकाबलों में सिर्फ बेंच पर बैठे नजर आए हैं।

अगर उनके प्रदर्शन की बात करें तो आंकड़े उनके पक्ष में दिखाई देते हैं। वनडे क्रिकेट में कुलदीप ने कई अहम मौकों पर भारत को विकेट दिलाए हैं और उनका गेंदबाजी रिकॉर्ड दुनिया के कई बड़े स्पिनरों के बराबर या उनसे बेहतर रहा है। टेस्ट क्रिकेट में भी उन्होंने कम मैचों में शानदार औसत से विकेट हासिल किए हैं। यही कारण है कि उनके बाहर रहने के फैसले पर लगातार सवाल उठते रहते हैं।

पहले टीम में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी ऑलराउंडर मौजूद थे, इसलिए टीम संयोजन के कारण कुलदीप को बाहर बैठना पड़ता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार मौका नहीं मिल रहा। कई बार ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है जो थोड़ा बल्लेबाजी और थोड़ा गेंदबाजी कर सकते हैं, जबकि कुलदीप एक विशेषज्ञ स्पिनर हैं।

क्रिकेट जानकारों का मानना है कि सीमित ओवरों और टेस्ट क्रिकेट में विशेषज्ञ गेंदबाज कई बार मैच का रुख बदल सकते हैं। 2023 वनडे विश्व कप में भी भारत ने अतिरिक्त बल्लेबाज की जगह विशेषज्ञ तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी पर भरोसा किया था और उन्होंने शानदार प्रदर्शन करके टीम को कई अहम जीत दिलाई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि स्पिन विभाग में यही सोच कुलदीप यादव के साथ क्यों नहीं अपनाई जा रही।

एक और दिलचस्प बात यह है कि चयनकर्ता लगातार कुलदीप यादव को भारतीय टीम में चुनते हैं, लेकिन प्लेइंग इलेवन तय करते समय उन्हें मौका नहीं मिलता। इससे यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट की सोच एक जैसी नहीं है। अगर टीम मैनेजमेंट को लगता है कि कुलदीप अभी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं हैं, तो उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने का मौका दिया जा सकता है। लेकिन हर दौरे पर टीम के साथ रखना और फिर पूरे समय बेंच पर बैठाना किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है।

यह मामला सिर्फ कुलदीप यादव का नहीं है, बल्कि भारतीय टीम की चयन रणनीति से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम को यह तय करना होगा कि वह विशेषज्ञ खिलाड़ियों पर भरोसा करेगी या फिर हर विभाग में ऑलराउंडरों को प्राथमिकता देती रहेगी। फिलहाल कुलदीप यादव के भविष्य को लेकर यही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है कि उनकी मेहनत और रिकॉर्ड के बावजूद उन्हें नियमित मौके कब मिलेंगे।

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By admin