आज बात उस प्रोटेस्ट की, जिसने राजधानी दिल्ली की सियासत और शिक्षा व्यवस्था दोनों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी के राष्ट्रीय संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का खुलकर समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने कथित नीट पेपर लीक और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही ख़ामियों को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए… दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को छात्रों और युवा संगठनों का प्रदर्शन तेज हो गया…. हजारों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे थे… इसी बीच RLP प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और छात्रों के साथ एकजुटता दिखाई… बेनीवाल ने कहा कि, देश के युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है… अगर बार-बार परीक्षाओं में ख़ामियां सामने आती हैं, तो इससे लाखों मेहनती छात्रों का विश्वास टूटता है। उन्होंने साफ कहा कि, परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए… ‘संसद मार्च’ शुरू होने से पहले छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा… उन्होंने आरोप लगाया कि, NDA सरकार छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में असफल रही है… बेनीवाल ने कहा कि, कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर उन्होंने पहले भी अपनी चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इस विषय को सर्वदलीय बैठक के दौरान भाजपा नेतृत्व के समक्ष भी उठाया गया था। उन्होंने ये भी कहा कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक युवाओं का भरोसा बहाल नहीं हो सकता। प्रदर्शन के दौरान हनुमान बेनीवाल ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई केवल छात्रों की नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। बेनीवाल ने ये भी कहा कि अगर छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें लाठीचार्ज का सामना करना पड़े, तो वे उसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने दोहराया कि वे हमेशा राजस्थान और देशभर के युवाओं के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी इसी प्रणाली की मांग का समर्थन करते रहेंगे… दूसरी ओर, दिल्ली में प्रदर्शन उस समय और उग्र हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च शुरू किया… बड़ी संख्या में छात्र और युवा संसद का घेराव करने के उद्देश्य से आगे बढ़े… स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया.. जानकारी के अनुसार, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इसके बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों के संसद भवन के करीब पहुंचने पर सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियात के तौर पर संसद के मुख्य द्वार को भी कुछ समय के लिए बंद कर दिया। संसद परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर छात्र निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर इस मुद्दे पर राजनीतिक समर्थन भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में सरकार इस पूरे मामले पर क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।
