उत्तर प्रदेश

74वां: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मनाया 74वां जन्म दिवस, भारतीय राजनीति और BJP के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह, क्या 2029 में फिर लखनऊ से लडेंगे लोकसभा चुनाव?

74वां: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मनाया 74वां जन्म दिवस

 

आज एक ऐसी हस्ती, नेता का जन्मदिन है जिन्होंने अटल जी की विरासत को आगे बढ़ाने का काम बखूबी निभाया है। राजनीति में उनकी टक्कर का आदमी आज की तारीख में कोई नहीं है जी हां भारतीय राजनीति के एक मजबूत, संयमित और नीतिगत स्तंभ के रूप में स्थापित रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज 74 (74वां) वर्ष के हो गए। लगातार तीसरी बार लखनऊ से सांसद रहे राजनाथ सिंह (74वां) का जन्मदिन राजधानी में खास तरीके से मनाया जा रहा है।

उनके समर्थक और भाजपा कार्यकर्ता इसे यादगार बनाने में जुटे हैं। वहीं, राजनीतिक हलकों में इस मौके पर एक अहम चर्चा भी जोर पकड़ रही है — क्या राजनाथ सिंह (74वां) 2029 में फिर से लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे या अब अपनी राजनीतिक विरासत किसी और को सौंपेंगे?

इस सवाल का जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजनाथ सिंह (74वां) का कद भारतीय जनता पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में इतना बड़ा है कि उनके राजनीतिक भविष्य का निर्णय वही स्वयं लेंगे

राजनाथ सिंह (74वां) ने राजनीति की शुरुआत 1974 में जनसंघ से की थी, जब वे केवल 23 वर्ष के थे। उस समय देश में मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष थी। 1975 में वे मिर्जापुर के भाजपा जिलाध्यक्ष बने और 1977 में पहली बार विधानसभा पहुंचे। शिक्षा के रूप में उन्होंने भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया, लेकिन जीवन की प्रयोगशाला में उन्होंने राजनीति की केमिस्ट्री को बारीकी से समझा और आत्मसात किया।

राजनाथ सिंह (74वां) उन चुनिंदा नेताओं में हैं जो अपनी नीतिगत स्पष्टता, विचारधारा के प्रति निष्ठा और सौम्य व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाते हैं। यही कारण है कि 1980 और 1993 में चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हर बार नई ऊर्जा के साथ वापसी की।

लखनऊ और राजनाथ सिंह (74वां) का रिश्ता सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बाद लखनऊ की संसदीय सीट को संभालने का अवसर राजनाथ सिंह को 2014 में मिला। उन्होंने चुनाव में अटलजी की खड़ाऊ लेकर नामांकन किया था, जो इस बात का प्रतीक था कि वह सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि एक विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह (74वां) आज भी हर सार्वजनिक मंच से अटलजी को याद करना नहीं भूलते। उनका मानना है कि लखनऊ के लोगों की अपेक्षाएं सिर्फ एक सांसद से नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और सेवक से हैं

राजनाथ सिंह (74वां) के प्रतिनिधि और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, उनके संसदीय कार्यकाल में लखनऊ में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य हुए हैं। शहीद पथ, जिसका निर्माण आज राजधानी के आधारभूत ढांचे की रीढ़ बन चुका है, भी तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह की ही देन है।

त्रिपाठी बताते हैं कि 1999 में जब अटलजी प्रधानमंत्री बने और लखनऊ आए, तब एक जनसभा में शहीद पथ बनाने की मांग रखी गई। मंच पर मौजूद राजनाथ सिंह (74वां) ने तुरंत खड़े होकर इस मांग को स्वीकार किया और परियोजना को मंजूरी दिलाई।

1990 के दशक में जब कल्याण सिंह सरकार में राजनाथ सिंह शिक्षा मंत्री बने, तब उन्होंने नकल विरोधी अध्यादेश लागू कर पूरे प्रदेश में एक मजबूत संदेश दिया। उस वर्ष बोर्ड परीक्षा का परिणाम गिर गया, लेकिन नकल माफिया पर सख्त कार्रवाई हुई। आज भी उस दौर के विद्यार्थी गर्व से कहते हैं कि वे ‘राजनाथ और कल्याण सिंह के कार्यकाल के इंटर पास’ हैं।

राजनाथ सिंह (74वां) को भाजपा का संकटमोचक भी माना जाता है। उनके राजनीतिक कौशल का सबसे बड़ा उदाहरण 1997 में देखने को मिला, जब यूपी में मायावती ने कल्याण सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया। उस वक्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में राजनाथ सिंह ने बसपा और कांग्रेस में टूट कराकर ‘जन बसपा’ और ‘लोकतांत्रिक कांग्रेस’ जैसे नए दल बनवाए और कल्याण सरकार को गिरने से बचा लिया।

राजनाथ सिंह की राजनीतिक स्वीकार्यता सिर्फ भाजपा तक सीमित नहीं है। स्वर्गीय जयललिता, रामविलास पासवान, करुणानिधि, अहमद पटेल और प्रणव मुखर्जी जैसे नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध बेहद अच्छे रहे। आज भी ममता बनर्जी, लालू प्रसाद यादव, मायावती, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे जैसे विपक्षी नेताओं से उनके संवाद कायम हैं। भाजपा को जब भी किसी विपक्षी दल से बातचीत करनी होती है, राजनाथ सिंह एक भरोसेमंद चेहरा बनकर सामने आते हैं।

 

राजनाथ सिंह (74वां) अगले साल 75 वर्ष के हो जाएंगे। भाजपा में एक अनौपचारिक सिद्धांत है कि 75 वर्ष की उम्र के बाद नेताओं को मंत्री पद से मुक्त कर दिया जाता है। इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 75 के हो जाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह सिद्धांत मोदी पर लागू होता है, तो राजनाथ सिंह पर भी स्वाभाविक रूप से प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, भाजपा में इस नियम को कभी भी कठोर रूप से लागू नहीं किया गया है और अपवाद भी देखने को मिले हैं।

राजनाथ सिंह जैसे नेता जिनका अनुभव, संतुलन और कूटनीति की समझ पार्टी के लिए अत्यंत मूल्यवान है, उनके लिए अपवाद बनाए जाना असंभव नहीं।

 

राजनाथ सिंह का राजनीतिक सफर एक आदर्श का उदाहरण है। उन्होंने विधायक से लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, भाजपा अध्यक्ष, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री जैसे पदों को गरिमा और दक्षता के साथ निभाया है। उनके जैसे नेताओं के लिए चुनावी राजनीति में बने रहना या संगठन में कोई भूमिका निभाना, दोनों ही विकल्प समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

Kirti Bhardwaj

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