उत्तर प्रदेश

स्वास्थ्य विभाग में तबादलों पर गतिरोध,CM की सहमति के बिना नहीं होंगे तबादले,15 जून को समाप्त हो चुका है तबादला सत्र

15 जून को समाप्त हो चुका है तबादला सत्र
CM की सहमति के बिना नहीं होंगे तबादले
स्वास्थ्य विभाग में तबादलों पर गतिरोध

लखनऊ के स्वास्थ्य विभाग में इस बार तबादला सत्र बिना किसी उल्लेखनीय स्थानांतरण के समाप्त हो गया है। इसके पीछे उच्च स्तर पर बने गंभीर गतिरोध को प्रमुख कारण माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सभी तबादला संबंधित फाइलों का परीक्षण कर उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास भेज दिया है। अब मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद ही कोई भी तबादला संभव हो सकेगा।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) के तबादलों की सूची पर विभागीय मंत्री, शासन और निदेशालय के बीच सहमति नहीं बन पाई है। जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजी गईं सिफारिशें शासन स्तर पर अनदेखी का शिकार रहीं, जिससे असंतोष और भ्रम की स्थिति बनी रही।

इस विवाद का असर सिर्फ CMO तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाबुओं से लेकर चिकित्सा अधिकारियों तक सैकड़ों प्रस्तावित तबादले अटके रह गए।
बताया जा रहा है कि, निदेशालय स्तर पर तैयार की गई तबादला सूची से उप मुख्यमंत्री संतुष्ट नहीं थे।

परिणामस्वरूप, स्वास्थ्य महानिदेशक, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, निदेशक (प्रशासन), निदेशक नर्सिंग और पैरामेडिकल की ओर से भेजी गई तमाम सिफारिशों को उप मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।
आपको बता दें कि तबादला सत्र की समय सीमा 15 जून को समाप्त हो चुकी है। इसके चलते अब यदि कोई स्थानांतरण किया जाना है तो उसमें मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य होगी।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सीमित संख्या में ही तबादले हो पाएंगे, वो भी केवल आपात या प्रशासनिक दृष्टिकोण से जरूरी होने पर।
इस बीच चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अपेक्षाकृत अधिक सक्रियता दिखाई है।

उप मुख्यमंत्री ने इस विभाग से आई फाइलों पर सहमति दे दी, जिसके बाद नर्सिंग अधिकारियों और लैब टेक्नीशियन के तबादले संपन्न हो सके।

उल्लेखनीय है कि इस विभाग के प्रमुख सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ही हैं, जो स्वास्थ्य विभाग में भी प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
वहीं, आयुष विभाग के अंतर्गत होम्योपैथी निदेशालय से हुए तबादलों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

कुछ समूहों के सभी तबादलों को निरस्त कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन तबादलों में स्थानांतरण नीति की अनदेखी और लेन-देन जैसी गंभीर शिकायतें सामने आईं थीं। मामले की जानकारी जब आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ तक पहुंची तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी तबादलों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया।

इसके बाद निदेशक होम्योपैथी प्रो. अरविंद कुमार वर्मा ने ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देते हुए निरस्तीकरण आदेश जारी किया। हालांकि, इस विषय पर उनसे कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने कहा कि इस निरस्तीकरण का कारण निदेशक ही स्पष्ट कर सकते हैं।

स्वास्थ्य महकमे में चल रही यह खींचतान न केवल प्रशासनिक सुचिता पर सवाल उठाती है, बल्कि इससे मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी हैं, जिनकी स्वीकृति के बिना स्वास्थ्य विभाग में कोई स्थानांतरण संभव नहीं है।

 

 

Ritika Bhardwaj

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