मेरठ SP ने संगीत सोम की गाड़ी रोकी
मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कांवड़ कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई जब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं – पूर्व विधायक संगीत सोम और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी – की निजी गाड़ियों को पुलिस ने रोक दिया। सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के तहत लगाए गए बैरिकेड्स के कारण दोनों नेताओं की कारों को रोकना प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया।
मौके पर जमकर बहस, नाराज़गी और हॉट-टॉक देखने को मिली।
घटना सुबह की है जब भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम अपनी निजी कार से मोदीपुरम के दुल्हैड़ा चौकी के पास बने कार्यक्रम स्थल की ओर जा रहे थे।
हाईवे पर कांवड़ियों की भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों से पुलिस ने रास्ता वनवे कर रखा था। ऐसे में SP ट्रैफिक राघवेंद्र और ADM सिटी ब्रजेश कुमार ने सोम की गाड़ी रोक दी। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उन्हें सरकारी गाड़ी से ही कार्यक्रम स्थल तक जाने की अनुमति है।
इस पर संगीत सोम नाराज़ हो गए और गाड़ी से उतरते हुए बोले –
“गाड़ी पीछे नहीं हटेगी, ये आयोजन हमारा है। हमारे मुख्यमंत्री आ रहे हैं। व्यवस्था बनाना हमारा कर्तव्य है। गाड़ी आगे जाएगी, आप निश्चिंत रहें।”
पुलिस अधिकारियों ने संयम बरतते हुए उन्हें समझाने की कोशिश की कि यह आदेश सुरक्षा कारणों और भीड़ नियंत्रण के तहत है। लेकिन सोम अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि उनकी निजी गाड़ी नहीं जाएगी तो वे सड़क पर ही बैठ जाएंगे। इस दौरान उनके समर्थकों ने बैरिकेड्स हटाने की भी कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
आखिरकार, विवाद को टालते हुए संगीत सोम 3 किमी का चक्कर लगाकर शोभित यूनिवर्सिटी स्थित हेलिपैड पहुंचे, जहां से सभी जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुए।
सिर्फ संगीत सोम ही नहीं, राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्हें कांवड़ रूट पर तैनात पुलिसकर्मियों ने पहचान नहीं पाया और उनकी गाड़ी को रोक दिया। इससे नाराज वाजपेयी ने गुस्से में कहा –
“गाड़ी यहीं खड़ी कर दूंगा, अभी सबको पता लग जाएगा।”
बाद में जब तैनात कर्मचारियों को जानकारी हुई कि वे राज्यसभा सांसद हैं, तब जाकर उन्हें आगे जाने दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और राजनेताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी को उजागर किया। एक तरफ पुलिस और प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था के तहत बनाए गए नियमों का पालन करवा रहा था, तो दूसरी तरफ वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इन प्रतिबंधों से असहज और अपमानित महसूस कर रहे थे।
SP सिटी आयुष विक्रम सिंह ने स्वयं संगीत सोम से रिक्वेस्ट करते हुए कहा –
“आपकी सुरक्षा के मद्देनज़र ही आपको सरकारी गाड़ी से भेजा जा रहा है, प्राइवेट गाड़ी को अंदर अनुमति नहीं है। बैरिकेडिंग नहीं हटेगी।”
हालांकि दोनों नेताओं की गाड़ियाँ रोके जाने के बावजूद वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और अंततः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर नजर आए। सीएम योगी ने दुल्हैड़ा चौकी के पास कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की और जल चढ़ाने आए भक्तों का उत्साहवर्धन किया।
मेरठ में सीएम योगी के कार्यक्रम से पहले जो दृश्य सामने आया, वह राज्य में कानून-व्यवस्था, प्रोटोकॉल और सत्ता के बीच संतुलन की जमीनी हकीकत को दर्शाता है। जहां एक ओर अधिकारी सुरक्षा और नियमों को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं जनप्रतिनिधि अपनी हैसियत और भूमिका के अनुसार विशेष व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं।
हालांकि अंत में सब कुछ शांतिपूर्वक निपट गया, लेकिन यह प्रकरण प्रशासनिक और राजनीतिक समन्वय की गंभीर आवश्यकता की ओर इशारा करता है।
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