देश

जातिगत जनगणना और आरक्षण नीति में संभावित बदलाव

जातिगत जनगणना और आरक्षण नीति में संभावित बदलाव

देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होने जा रही है। मोदी सरकार ने सभी जातियों की गिनती के लिए इसे मंजूरी दे दी है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इस जनगणना से हर जाति की वास्तविक संख्या का पता चलेगा, जिससे आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। 1931 की जाति जनगणना में पिछड़ी जातियों की संख्या 52% से अधिक मानी गई थी, और मंडल आयोग ने भी इसी आधार पर ओबीसी आरक्षण की सिफारिश की थी। अब जब हर जाति की गणना होगी, तो आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग तेज़ हो सकती है

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसके साथ ही दो अहम मांगें रखी हैं—आरक्षण की 50% सीमा को खत्म करना और निजी शैक्षणिक संस्थानों में भी आरक्षण लागू करना। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों या संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि निजी क्षेत्र में भी समान अवसर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 15(5) का हवाला दिया है, जो निजी स्कूल-कॉलेजों में आरक्षण की अनुमति देता है।

अनुच्छेद 15(5) के तहत दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय के छात्रों को निजी शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिल सकता है। वर्ष 2006 में पारित केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम के तहत यह प्रावधान पहले ही केंद्रीय संस्थानों में लागू हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में भी अनुच्छेद 15(5) को संवैधानिक रूप से वैध बताया गया है, जिससे यह रास्ता अब पूरी तरह खुला हुआ है।

वर्तमान में भारत में अनुसूचित जातियों को 15%, अनुसूचित जनजातियों को 7.5%, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% और आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण प्राप्त है। लेकिन यदि जातिगत जनगणना में पिछड़े वर्गों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई जाती है, तो आरक्षण सीमा को 50% से ऊपर ले जाने की राजनीतिक और सामाजिक मांग बढ़ सकती है।

राहुल गांधी की इस पहल से यह स्पष्ट है कि जातिगत जनगणना केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके सामाजिक और राजनीतिक असर दूरगामी होंगे। यदि निजी संस्थानों में भी आरक्षण लागू होता है, तो स्कूल-कॉलेजों में सामाजिक संरचना में बड़ा बदलाव आएगा। अभी तक जहां प्राइवेट संस्थानों में अपर क्लास का वर्चस्व रहा है, वहां अब हाशिए पर रहे समुदायों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

इस प्रकार जातिगत जनगणना और उसके बाद उठी मांगें भारत की आरक्षण नीति और शैक्षणिक ढांचे को एक नए मोड़ पर ला सकती हैं।

 

यह भी पढ़े:

एक्शन मोड में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, मानसून को लेकर अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

 

admin

Recent Posts

यूपी में सपा का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, कई मुद्दों पर सरकार को घेरा

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर राज्य…

5 hours ago

जंतर-मंतर आंदोलन को मिली नई ताकत! रविंद्र सिंह भाटी और निर्मल चौधरी की एंट्री, सरकार पर बढ़ा दबाव

दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को…

6 hours ago

पेपर लीक पर सख्त होगी कार्रवाई, मोदी कैबिनेट ने बिल को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली के खिलाफ बड़ा कदम…

7 hours ago

ISRO Internship 2026: अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने वालों के लिए सुनहरा मौका

अगर आप अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग या नई तकनीक के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते…

7 hours ago

लखनऊ में बनेगा यूपी का नया विधानसभा भवन, कमल की आकृति में होगा भव्य परिसर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही नया विधानसभा परिसर बनने जा रहा है।…

7 hours ago

IRCTC तत्काल टिकट बुकिंग के नियमों में बदलाव, आधार OTP से होगी सुरक्षा मजबूत

आज के डिजिटल समय में ज्यादातर लोग अपने जरूरी काम ऑनलाइन ही करना पसंद करते…

8 hours ago