कांवड़ियों पर बयान देकर बुरे फंस ‘स्वामी’!
उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के कांवड़ यात्रा को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद लखनऊ में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता गुस्से में हैं और स्वामी प्रसाद मौर्य के घर के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी ने प्रशासन को सतर्क कर दिया।
मौर्य ने अपने बयान में कहा था कि “कांवड़ियों के वेश में सत्ता संरक्षित गुंडे और माफिया उपद्रव कर रहे हैं। भगवान शिव के सच्चे भक्त भोले और शांत स्वभाव के होते हैं, वे माहौल खराब नहीं कर सकते। ये यात्रा अब धार्मिक नहीं, राजनीतिक स्टंट बनती जा रही है।” उनके इस बयान के बाद विश्व हिंदू रक्षा परिषद जैसे संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उनका विरोध करने का ऐलान कर दिया।
उत्तर भारत में श्रावण मास के दौरान कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। लाखों श्रद्धालु इस दौरान पैदल यात्रा कर गंगाजल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। ऐसे समय में जब यात्रा अपने चरम पर है, स्वामी प्रसाद मौर्य का ये बयान सीधे उन श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट के रूप में देखा जा रहा है।
उनका ये भी कहना था कि, “कुछ लोग कांवड़ यात्रा की आड़ में गुंडागर्दी कर रहे हैं। सड़कों पर डीजे, नाच-गाना और हंगामा करके वे धर्म का अपमान कर रहे हैं।” उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि “सत्ता संरक्षण में ऐसे उपद्रवी हर साल बढ़ते जा रहे हैं।”
बयान के बाद विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने मौर्य के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की और कहा कि, वे गंगाजल लाकर उनके घर को “शुद्ध” करेंगे। संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना था कि मौर्य ने न सिर्फ शिवभक्तों का अपमान किया है बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।
विरोध की आशंका को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने उनके आवास के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। निर्धारित समय पर जब विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कार्यकर्ता कैंडल तिराहे से मौर्य के आवास की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें 200 मीटर पहले ही हिरासत में ले लिया।
सैकड़ों की संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। मौके पर पहुंचे पुलिस बल ने संयम से स्थिति को संभाला और किसी भी प्रकार की झड़प नहीं होने दी।
इस बीच स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थक भी मौके पर पहुंच गए थे। समर्थकों ने साफ तौर पर कहा कि, अगर कोई उनके नेता के आवास की ओर बढ़ेगा, तो उन्हें मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। समर्थकों की मौजूदगी से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन पुलिस की सक्रियता और मध्यस्थता से टकराव टाल दिया गया।
स्वामी प्रसाद मौर्य इससे पहले भी रामचरितमानस और हिंदू धर्मग्रंथों पर विवादित टिप्पणियां कर चुके हैं। इस बार कांवड़ यात्रा जैसे संवेदनशील विषय पर उनके बयान ने एक बार फिर राजनीति को ध्रुवीकृत कर दिया है। भाजपा नेताओं ने मौर्य के बयान की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें “सनातन विरोधी” और “राजनीतिक अवसरवादी” करार दिया है।
सपा ने हालांकि मौर्य से दूरी बनाई हुई है, लेकिन विपक्षी दलों ने इस बयान को “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के नाम पर समर्थन देने की कोशिश की है।
सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले अफसरों ने लखनऊ में कानून-व्यवस्था पर नजर रखते हुए कोई भी चूक नहीं होने दी। मौर्य के आवास को सुरक्षा घेरे में रखा गया और उनकी हर गतिविधि पर पुलिस की निगरानी रही। खुद स्वामी प्रसाद मौर्य इस घटनाक्रम पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कांवड़ यात्रा को लेकर बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य का यह ताजा बयान उस समय आया है जब पूरे उत्तर भारत में कांवड़ यात्रा चरम पर है। ऐसे में जनता की आस्था से जुड़ी यात्रा को लेकर इस तरह की टिप्पणी जहां सियासत को गर्म कर रही है, वहीं धार्मिक संगठनों को भी भड़काने का काम कर रही है।
हालांकि लखनऊ पुलिस की सतर्कता ने किसी बड़े टकराव को टाल दिया, लेकिन यह साफ है कि मौर्य का ये बयान आने वाले दिनों में उन्हें सियासी और सामाजिक मोर्चे पर जवाबदेह बनाएगा।
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