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अमित शाह ने सुदर्शन रेड्डी पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- “रेड्डी का ‘सलवा जुडूम’ पर फैसला था गलत”, “सुदर्शन रेड्डी के फैसले ने दिया नक्सलवाद को बढ़ावा”

अमित शाह ने सुदर्शन रेड्डी पर लगाए गंभीर आरोप

भारत की राजनीति में इस समय उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सियासत गरमाई हुई है। एनडीए की ओर से राष्ट्रपति के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन हैं, वहीं विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर बड़ा हमला बोला है।

” शाह ने कहा कि, अगर जस्टिस रेड्डी ने ‘सलवा जुडूम’ मामले में वो फैसला नहीं दिया होता, तो देश से नक्सलवाद पांच साल पहले ही खत्म हो गया होता। अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा कि “फैसले ने नक्सलवाद को बढ़ावा दिया गया। साथ ही कहा कि विपक्ष ने वामपंथियों के दबाव में सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है

उन्होंने दावा किया कि जस्टिस रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट जैसे मंच का इस्तेमाल नक्सलवाद और वामपंथी उग्रवाद को समर्थन देने के लिए किया।
2005 में छत्तीसगढ़ सरकार ने सलवा जुडूम आंदोलन शुरू किया था।

इसका उद्देश्य माओवादी हिंसा से प्रभावित आदिवासी इलाकों में युवाओं को जोड़कर नक्सलवाद का मुकाबला करना था। इस अभियान के तहत आदिवासी युवाओं को स्पेशल पुलिस ऑफिसर के रूप में भर्ती किया गया और उन्हें हथियार भी दिए गए। लेकिन इस अभियान को लेकर शुरुआत से विवाद रहा था।

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि सलवा जुडूम के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को निशाना बनाया गया, गांव जलाए गए और लोगों को जबरन विस्थापित किया गया। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर बड़ा फैसला सुनाते हुए सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगा दिया

उस समय दो सदस्यीय बेंच में जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी और जस्टिस एसएस निज्जर शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि, आदिवासी युवाओं को हथियारबंद करना और उन्हें नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में झोंकना असंवैधानिक है।

अमित शाह ने केरल के कोच्चि में एक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा “अगर जस्टिस रेड्डी ने सलवा जुडूम पर पाबंदी लगाने वाला फैसला न दिया होता, तो 2020 तक भारत से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो गया होता। लेकिन उनके फैसले ने नक्सलियों को राहत दी और देश को और कई साल तक हिंसा झेलनी पड़ी।

”उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने वामपंथियों के दबाव में सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया। शाह के मुताबिक, ये चुनाव सिर्फ एक पद का चुनाव नहीं है, बल्कि ये दिखाता है कि विपक्ष की सोच किस तरह वामपंथी विचारधारा के प्रभाव में है।

भारत में नक्सलवाद पिछले 5-6 दशकों से एक गंभीर समस्या रहा है। झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के कई जिले लंबे समय तक इस समस्या से प्रभावित रहे। हजारों निर्दोष लोग और सुरक्षा बल इसमें मारे गए। सलवा जुडूम को एक तरह से “जनता की नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई” कहा गया था।

कुछ इलाकों में इस अभियान ने नक्सलियों पर दबाव भी बनाया। लेकिन इसके कारण मानवाधिकार हनन की घटनाएं भी सामने आईं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ये अभियान बंद कर दिया गया।
सलवा जुडूम को लेकर दो तरह की राय है कुछ लोग मानते हैं कि, ये नक्सलवाद खत्म करने का असरदार तरीका था। जबकि कई लोग इसे आदिवासियों के शोषण और हिंसा का जरिया मानते हैं।

अमित शाह के आरोपों पर विपक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि, भाजपा जानबूझकर न्यायपालिका के एक ईमानदार जज की छवि को खराब कर रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जस्टिस रेड्डी ने संविधान और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए फैसला दिया था।

उन्होंने सिर्फ न्याय के आधार पर काम किया और अब भाजपा उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि ये चुनाव लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने वाली ताकतों और सत्ता के दुरुपयोग करने वालों के बीच की लड़ाई है। हालांकि 9 सितंबर को मतदान और उसी दिन नतीजे घोषित होंगे।

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