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violence in Ladakh: लद्दाख में हिंसा भड़काने का जिम्मेदार कौन ? हिंसा में क्यों बदल गया शांतिपूर्ण आंदोलन ?, गृह मंत्रालय ने किसको ठहराया जिम्मेदार ?

violence in Ladakh: लद्दाख में हिंसा भड़काने का जिम्मेदार कौन ?

लद्दाख (violence in Ladakh) में जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में शुरू हुआ शांतिपूर्ण आंदोलन अब एक गंभीर और चिंताजनक मोड़ पर पहुंच चुका है। 10 सितंबर को शुरू हुआ यह आंदोलन, जिसमें लद्दाख (violence in Ladakh) को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग की जा रही थी, बुधवार को हिंसा (violence in Ladakh) में तब्दील हो गया। इस हिंसक प्रदर्शन में चार लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। गृह मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए सोनम वांगचुक (violence in Ladakh) के कथित भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया है।

सोनम वांगचुक (violence in Ladakh), जो लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं, उन्होंने 10 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना था कि केंद्र सरकार लद्दाख के साथ न्याय नहीं कर रही है और वहां के मूल निवासियों की पहचान, संस्कृति और रोजगार खतरे में है। शुरू में यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और गैर-राजनीतिक नजर आ रहा था। लोग इस प्रदर्शन में शामिल हो रहे थे, पोस्टर-बैनर लेकर बैठ रहे थे, और वांगचुक (violence in Ladakh) की अपील पर अनुशासन बनाए रख रहे थे।

हालांकि, स्थिति ने बुधवार को अचानक ऐसा मोड़ (violence in Ladakh) लिया जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। सुबह 11:30 बजे के करीब प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने भूख हड़ताल स्थल से मार्च करना शुरू किया और धीरे-धीरे उग्र रूप लेने लगी। देखते ही देखते, भीड़ ने एक प्रमुख राजनीतिक दल के कार्यालय और लेह के चीफ एक्जीक्यूटिव काउंसिलर (CEC) के सरकारी कार्यालय पर धावा बोल दिया।

प्रदर्शनकारियों ने इन कार्यालयों में तोड़फोड़ की, आगजनी की और पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस की गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसक झड़प में 30 से अधिक पुलिस और CRPF जवान घायल हुए।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें कुछ लोगों के हताहत होने की पुष्टि हुई है। मृतकों की संख्या चार बताई जा रही है, जबकि कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए हैं। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

गृह मंत्रालय ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, वांगचुक ने भूख हड़ताल के दौरान कई भड़काऊ बयान दिए, जिनमें उन्होंने नेपाल में हुए जन आंदोलनों और अरब स्प्रिंग जैसे उदाहरणों का हवाला दिया। उन्होंने युवाओं को आंदोलन के लिए प्रेरित करते हुए कथित रूप से उन्हें “क्रांति” के लिए उकसाया। मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने सोशल मीडिया और मंच से दिए गए बयानों के जरिए भीड़ को भड़काया, जिसके परिणामस्वरूप यह हिंसा हुई।

हालांकि, सोनम वांगचुक ने इस हिंसा से खुद को अलग करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। उन्होंने कहा कि यह हिंसा युवा पीढ़ी की निराशा और बेरोजगारी का नतीजा है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह आंदोलन अब हिंसक हो गया है, लेकिन साथ ही युवाओं से अपील भी की कि वे इस संघर्ष को शांतिपूर्ण बनाए रखें। वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्होंने कई सालों तक लद्दाख के लिए संघर्ष किया है और नहीं चाहते कि उनकी मेहनत हिंसा की आग में जलकर राख हो जाए

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हिंसा के कारणों में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं है और यह आंदोलन अब सरकार और युवाओं के बीच का मुद्दा बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से ले और केवल सुरक्षा बलों के बल पर इस असंतोष को न दबाए।

वांगचुक ने यह कहते हुए अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी कि वह अब इस हिंसा के माहौल में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब हिंसा शुरू हुई, तब वह प्रदर्शन स्थल से हट गए और एम्बुलेंस के जरिए अपने गांव चले गए ताकि किसी और अनहोनी से बचा जा सके।

इस बीच गृह मंत्रालय ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर कोई भी भड़काऊ वीडियो या बयान साझा न करें, विशेषकर वे वीडियो जो पुरानी घटनाओं के हैं या जिनका उद्देश्य सिर्फ माहौल को और अधिक भड़काना है। मंत्रालय का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

वही आपको बता दे कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि लद्दाख में हुई हिंसा में कांग्रेस पार्टी का एक स्थानीय नेता सक्रिय रूप से शामिल था

मालवीय ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “लद्दाख में दंगा कर रहा यह व्यक्ति फुंतसोग स्टैनजिन त्सेपग है, जो कांग्रेस पार्टी के ऊपरी लेह वार्ड से पार्षद हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो में यह कांग्रेस नेता साफ तौर पर भीड़ को उकसाते हुए और हिंसा (violence in Ladakh) में भाग लेते हुए नजर आ रहा है, जिसने भाजपा कार्यालय और हिल काउंसिल को निशाना बनाया।

मालवीय ने आधिकारिक ‘एक्स’ पोस्ट में सवाल पूछते हुए लिखा, “क्या यही वह अशांति है जिसकी कल्पना राहुल गांधी कर रहे हैं?” फिलहाल इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, कांग्रेस की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घटना से जुड़े वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल (violence in Ladakh) हो रहे हैं। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

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