सब्जी बेचने से कॉमनवेल्थ तक… झंडू कुमार ने जीता भारत के लिए पहला पदक

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला पदक दिलाने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गए हैं। बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले 28 वर्षीय खिलाड़ी ने कठिन हालात से लड़ते हुए पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।

बचपन में पोलियो, फिर भी नहीं मानी हार

झंडू कुमार जब सिर्फ पांच साल के थे, तब पोलियो की वजह से उन्हें शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपने सपनों के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। उनका सपना था कि एक दिन भारत की जर्सी पहनकर देश के लिए मेडल जीतें।

सब्जी बेची, ई-रिक्शा चलाया और जारी रखी ट्रेनिंग

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। घर का खर्च सब्जी बेचकर चलता था। कोरोना महामारी के दौरान दुकान बंद होने के बाद झंडू ने परिवार की मदद के लिए ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। सुबह सब्जियां लाना, दिनभर काम करना और शाम को जिम में घंटों अभ्यास करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई।

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मिली असफलता

साल 2023 में राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया। हालांकि उस प्रतियोगिता में वह एक भी सफल लिफ्ट नहीं लगा सके। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी मेहनत जारी रखी।

मेहनत ने बदली किस्मत

राष्ट्रीय कोच राजिंदर सिंह राहेलू ने झंडू की लगन को पहचानते हुए उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग का मौका दिलाया। इसके बाद उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक अपने नाम किए।

ग्लासगो में जीता भारत के लिए पहला पदक

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने 196 किलोग्राम उठाकर नया रिकॉर्ड बनाने की भी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर भी भारत के लिए पहला पदक जीतने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दी।

झंडू कुमार ने क्या कहा?

पदक जीतने के बाद झंडू कुमार ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे खास पल है। उनका सपना सिर्फ भारत के लिए मेडल जीतना था और अब वह सपना पूरा हो गया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) को भी दिया, जिनके सहयोग से उन्हें बेहतर प्रशिक्षण मिला।

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