विदेश

डोनाल्ड ट्रंप के यह 5 फैसले का असर दिखना हुआ शुरु

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं जिन्होंने वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। इनमें से कुछ फैसले भारतीय शेयर बाजार को भी प्रभावित करने वाले रहे हैं। यहां हम ट्रंप के पांच सबसे प्रभावशाली फैसलों के बारे में बात करेंगे, जिन्होंने कारोबार और निवेश को प्रभावित किया है।

ट्रेड टैरिफ

ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए स्टील और एल्यूमिनियम के आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। इस फैसले का असर उन कंपनियों पर पड़ा जो इन सेक्टरों से जुड़ी हैं। भारत जैसे देशों को भी इस टैरिफ से नुकसान हुआ, क्योंकि उनके निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया, जिससे कारोबार में मंदी आई।

BRICS देशों पर 100 से 150 प्रतिशत टैरिफ

ट्रंप ने ब्रिक्स देशों, जैसे भारत, चीन, ब्राजील, इथियोपिया और ईरान पर 100 से 150 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी। यह धमकी इन देशों की नई करेंसी शुरू करने की योजना के कारण थी, जिससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता आ सकती थी। ट्रंप के इस फैसले ने इन देशों के साथ व्यापार संबंधों पर असर डाला।

रेसिप्रोकल टैरिफ

ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा। इसका मतलब था कि अमेरिका दूसरे देशों से उतना ही आयात शुल्क लगाएगा जितना वे अमेरिका के निर्यात पर लगाते हैं। इस निर्णय का असर भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता था, खासकर उन पर जो निर्यात करने वाले थे।

पनामा नहर

ट्रंप ने पनामा नहर पर अमेरिका का नियंत्रण वापस लेने की मांग की। उन्होंने चीन पर आरोप लगाया कि उसने पनामा नहर पर अवैध नियंत्रण किया है। ट्रंप का यह कदम अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव को बढ़ाने की दिशा में था, और इसका असर वैश्विक शिपिंग पर पड़ा।

मेक्सिको और कनाडा पर टैरिफ

ट्रंप ने मेक्सिको और कनाडा से ड्रग्स की सप्लाई को रोकने के लिए इन देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इस फैसले से दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ा, और इससे अमेरिकी बाजार में भी कीमतों का दबाव बढ़ सकता था।

शेयर बाजार पर असर

ट्रंप के फैसलों ने भारतीय रुपये को कमजोर किया और विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।

इन फैसलों ने वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा की और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाला, साथ ही भारतीय शेयर बाजार की स्थिति भी प्रभावित हुई।

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