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अब हद हो गई, पाकिस्तान का हिसाब करना बहुत जरूरी, जिन्ना के पाप का अंत होना चाहिए

जिन्ना ने जो जहरीला पौधा लगाया था। वो आज जहरीला पेड़ बन चुका है। इस जहर का सबसे बड़ा भुक्तभोगी भारत ही बना हुआ है।  26/11, उरी, पुलवामा और अब पहलगाम, ये तो सिर्फ कुछ उदाहरण दिए हैं आपको। लिस्ट बहुत लंबी है।  सैकड़ों परिवार होंगे जो जिन्ना के बनाए हुए राक्षस देश पाकिस्तान के पाले हुए, आतंकियों की करतूतों के शिकार हुए हैं।  रौगटे खड़े हो जाएंगे। उनकी आप बीती सुनेंगे तो।  लेकिन हर बार पिटने के बाद भी आखिर पाकिस्तान बाज क्यों नहीं आता। पाकिस्तान के पाले हुए, शैतान हाफिज सईद, मसूद अजहर, तहव्वुर राणा, हेडली, और पहलगाम हमले का शैतान सैफुल्लाह खालिद ये तो सिर्फ चंद नाम हैं, जो पाकिस्तान के पाले हुए शैतान है। इन शैतानों की लिस्ट काफी लंबी है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि, पाकिस्तान आखिर इनको पालता क्यों है। वैसे ये बात भी सच है कि, पाकिस्तान का निर्माण ही लाशों के ढेर पर हुआ है। पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त लाखों लोगों की जान गई।  लाखों लोग बेघर हुए।  बंटावारे के दंश को आज भी अगर कोई याद करता है तो सिहर उठता है तो आप समझ सकते हैं कि, पाकिस्तान के बनने से ही इंसानियत की मौत शुरू हो गई थी, जो अब तक जारी है। पहलगाम सबसे ताजा उदाहरण है

पाकिस्तान से आए शैतानों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में खुनी खेल खेला और 26 मासूमों का धर्म पूछकर हत्या कर दी। तो समझ सकते हैं कि पाकिस्तान एक इंसानियत का दुश्मन देश है। ये सिर्फ धर्म के नाम पर लोगों की हत्या करना जानता है। अब अपने सवाल पर वापस आते हैं।  पाकिस्तान आखिर इंसानियत के दुश्मन आतंकियों को पालता क्यों है। इसका सीधा और सटीक जवाब है। भारत की तरक्की। क्योंकि 1947 में जब बंटवारा हुआ था तो दोनों देश एक समान थे। दोनों देशों में बेरोजगारी-बुखमरी गरीबी चरम पर थी।  लेकिन आज भारत का तिरंगा चांद पर शान से लहरा रहा है।  लेकिन पाकिस्तान वहीं खड़ा है। भूखमरी वहां चरम पर है। गरीबी और बेरोजगारी का कोई अंत नहीं है। वहीं दूसरी और भारत ने तरक्की के हरे एक आयाम को छू लिया है। बस यही बात, पाकिस्तान को हजम नहीं होती और हमेशा भारत को अस्थिर करने की कोशिश में लगा रहता है। और अब पाकिस्तानी आतंकियों का सबसे ज्यादा टारगेट भारत का कश्मीर है। क्योंकि धारा 370 हटने के बाद से कश्मीर में तरक्की के रास्ते खुले हैं। अब कश्मीर को नए कश्मीर के तौर पर जाना जाता है। लोगों की आमदनी बढ़ने लगी है। कश्मीर खुशहाल होने लगा है।  विधानसभा चुनाव भी शंतिपूर्वक हुए हैं, और केंद्र सरकार ये कह भी चुकी है। जल्द ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। लेकिन पाकिस्तान और उसके पालतू आतंकी कश्मीर की शांति से चिढ़ते है। इसका ताजा उदाहरण ही पहलगाम में हुआ आतंकी हमला है। इस हमले बाद अब कश्मीर में सैलानियों का आना कम हो जाएगा और कश्मीर की तरक्की पर फूल स्टोप लग जाएगा। पाकिस्तान यही चाहता है। यही वजह है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकी शैतानों को पालने के लिए मिलयन डॉलर खर्च करता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर में 17 ट्रेनिंग कैंप 37 लॉन्च पैड्स एक्टिव हैं। जहां कई सैकड़ों आतंकी ट्रेन और मौके की फिराक में बैठे हैं। कब उनको मौका मिले और अपने मंसूबों को पूरा कर सकें।  चलिए आपको पाकिस्तान में एक्टिव आतंक के अड्डों के बारे में बताते हैं, जहां पर पाकिस्तानी सेना आतंकियों को तैयार करती है।

नॉन-मिरान शाह
खैबर पख्तूनख्वा में 1998 से सक्रिय ये इलाका लश्कर-ए-तैयबा के पुराने प्रशिक्षण अड्डों में से एक है। यहां आतंकियों को बेसिक से लेकर एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है।

मानसेहरा के जंगल और खोस्त
ये क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा है, जहां गुप्त रूप से आतंकी प्रशिक्षण चलता है।

मंगला और हेड मराल
मीरपुर और सियालकोट में मौजूद ये ट्रेनिंग कैंप हाल ही में फिर से एक्‍ट‍िव किए गए हैं। लश्कर सरगना हाफिज सइद का बेटा तल्हा सइद की देखरेख में यहां वाटर-इनफिल्ट्रेशन की ट्रेनिंग दी जाती है।  यानी कैसे पानी के रास्‍ते आतंकियों को घुसाया जाए, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में ये हाई वैल्यू टारगेट हैं।

रावलकोट और नूर-उल-इस्लाम
LOC के पास ये लॉन्चिंग पैड हैं, जहां से आतंकी भारत में घुसपैठ की कोशिश करते हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि, इन्हें निशाना बनाकर घुसपैठ को रोका जा सकता है।

मुरीदके और इस्लामाबाद एयरबेस
मुरीदके लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय है, जहां लॉजिस्टिक प्लानिंग होती है। इस्लामाबाद एयरबेस में एक ट्रेनिंग कैंप भी है।  हालांकि ये इलाके शहरी केंद्रों के करीब होने की वजह से राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं और यहां कार्रवाई से कूटनीतिक विवाद उत्पन्न हो सकता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पीओके के अब्दुल्ला बिन मसूद, शावई नल्लाह, गढ़ी दुपट्टा, पीर चिनासी, दुधनियाल और मुजफ्फराबाद में शमस-उल-हक जैसे इलाकों में भी छोटे-छोटे आतंकियों के ठिकाने हैं।  सूत्रों के मुताबिक हर एक आतंकी शिविर में करीब 45 से 50 आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि आतंकवादियों को नियंत्रण रेखा पर उनके लॉन्च पैड पर भेजे जाने से पहले प्रशिक्षण 30 से 35 दिनों तक चलता है।  हिज्बुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हूजी, अल-बद्र जैसे आतंकवादी संगठनों के आतंकवादियों को इन्हीं में प्रशिक्षित किया जाता है।  कुछ शिविरों में छोटे मिश्रित समूहों के आतंकवादियों को भी प्रशिक्षित किया जाता है।

अब आती है इन आतंक के ठिकानों के मैनेजमेंट की बात, दरअसल इन आतंक के ठिकानों को पाकिस्तानी खूफिया ऐजेंसी ISI मैनेज करती है। पाकिस्तानी सेना इसमें इसकी मदद करती है। तो ये साफ हो गया है कि, आतंक की फैक्ट्री सिर्फ पाकिस्तान है। लेकिन पहलगाम हमले के बाद अब भारत ने भी ठान लिया है कि आतंक की इस फैक्ट्री को जड़ से खत्म किया जाए। पहलगाम हमले के बाद पूरा देश गुस्से में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो, सख्त लहजे में कह दिया है कि, आतंकियों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। उन्हें मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।  क्योंकि, 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में मासूम और निहत्थे लोगों को बेरहमी से मार दिया गया, जिसकी वजह से देश व्यथित है। ये हमला पर्यटकों पर नहीं हुआ है, भारत की आत्मा पर हुआ है। तो पाकिस्तान का हिसाब करना बहुत जरूरी है। अगर अभी हिसाब नहीं हुआ तो ना जाने और कितने मासूम मारे जा सकते हैं। आखिर कब हमारे देश के लोगों का खून बहेगा। पाकिस्तान को सबक सिखाना अब बहुत जरूरी हो गया है।

Rupesh Jha

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