Supreme Court का शंभू बॉर्डर के किसान आंदोलन पर तुरंत सुनवाई से इनकार
शंभू बॉर्डर पर बैठे किसानों ने फिलहाल के लिए अपना दिल्ली मार्च स्थगित कर दिया है। किसानों का कहना है कि 8 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में पुलिस ने आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां बरसाई जिसमें 6-8 किसान घायल हो गए और वहीं, एक किसान को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया है।
वहीं, शंभू पर जारी किसानों का आंदोलन का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है। आज यानि सोमवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें शंभू बॉर्डर सहित सभी हाईवे को खोलने के निर्देश केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार को देने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा है कि अदालत इस मामले पर पहले ही सुनवाई कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामला उसके संज्ञान में है। पहले से एक मामला सुप्रीम कोर्ट में ही पेंडिंग हैं।
बता दें कि, किसानों ने 8 दिसंबर को अपना पैदल मार्च स्थगित करते हुए कहा था कि वह आगे की प्लानिंग आज यानि सोमवार को बताएंगे। किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका लगाई गई है, उसमे कहा गया है कि इस तरह हाईवे को ब्लॉक करना लोगों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और नेशनल हाईवे एक्ट और भारतीय न्याय सहिंता (BNS) के तहत एक अपराध भी है। वहीं, याचिका में गुहार लगाई गई है कि, प्रदर्शनकारी किसानों को हाईवे से हटाने के निर्देश दें।
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