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‘सपा’ का अपने बागी विधायकों पर तंज: “ना कैबिनेट मिला, न स्वतंत्र प्रभार”

उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है। रविवार को हुए कैबिनेट विस्तार के अगले ही दिन सोमवार को समाजवादी पार्टी ने अपने बागी विधायकों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया।

राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ्तर के बाहर एक बड़ा राजनीतिक होर्डिंग लगाया गया, जिसने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस होर्डिंग के जरिए सपा ने उन नेताओं को सीधा संदेश देने की कोशिश की है, जिन्होंने पार्टी से दूरी बनाई थी।
इस होर्डिंग में समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायकों की तस्वीरें लगाई गई हैं।

इनमें अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह, अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह और कौशांबी की चायल सीट से विधायक पूजा पाल शामिल हैं। हालांकि होर्डिंग में उनके नाम नहीं लिखे गए, लेकिन तस्वीरों के साथ जो संदेश लिखा गया, वो काफी तीखा माना जा रहा है। बड़े अक्षरों में लिखा गया “ना कैबिनेट मिला, न स्वतंत्र प्रभार।”

दरअसल, योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर लंबे समय से अटकलें चल रही थीं कि, भाजपा उन नेताओं को बड़ा इनाम दे सकती है, जिन्होंने समाजवादी पार्टी से दूरी बनाकर सरकार के प्रति नरम रुख अपनाया था। लेकिन जब कैबिनेट विस्तार की सूची सामने आई, तो समाजवादी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं में केवल मनोज पांडेय को ही मंत्री पद मिला। बाकी बागी नेताओं को न तो कैबिनेट में जगह मिली और न ही किसी प्रकार का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। इसी मुद्दे को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी ने अपने विरोधियों पर हमला बोला।

सपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए इस होर्डिंग को राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ये संदेश देने की कोशिश कर रही है कि, जिन्होंने समाजवादी पार्टी से अलग रास्ता चुना, उन्हें भाजपा सरकार में भी अपेक्षित सम्मान या राजनीतिक लाभ नहीं मिला। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये होर्डिंग केवल तंज नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी का हिस्सा भी है।

होर्डिंग में 2027 के चुनाव का अप्रत्यक्ष संकेत भी साफ दिखाई देता है। समाजवादी पार्टी ये दिखाना चाहती है कि आने वाले चुनाव में बागी नेताओं को जनता के बीच जवाब देना होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिन नेताओं ने समाजवादी विचारधारा और संगठन से दूरी बनाई, उन्हें जनता भी स्वीकार नहीं करेगी…. यही वजह है कि सपा अब बागियों के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाती नजर आ रही है।
लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में इस होर्डिंग को लेकर काफी चर्चा हो रही है। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे समाजवादी पार्टी का रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दांव मान रहे हैं। उनका कहना है कि सपा इस संदेश के जरिए अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि जो नेता अवसरवाद की राजनीति करेंगे, उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा।
योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार ने समाजवादी पार्टी के भीतर भी नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के अंदर ये चर्चा तेज हो गई है कि बागी नेताओं के खिलाफ अब और सख्त रुख अपनाया जाए। वहीं दूसरी ओर भाजपा की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।

समाजवादी पार्टी का ये कदम साफ तौर पर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है। पार्टी ये दिखाना चाहती है कि बागियों के लिए न तो पुरानी पार्टी में जगह बची है और न ही नई राजनीतिक राह आसान है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इन तीनों बागी विधायकों का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और 2027 के चुनाव में जनता उन्हें किस नजर से देखेगी।

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